Tritiya Kand Pratham Khand satapathabrahman — पृष्ठ 11–20

शतपथ ब्राह्मणम् भाष्य - ३-१ - मोतीलाल शास्त्री · पृष्ठ 11–20

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शतपथ ब्राह्मण ( तृतीय काण्ड ) विषय - सूची ( प्रथमं खण्ड ) विषय पृ ० सं ० विषय पृष्ठ संख्या हिन्दी विज्ञानभाष्य प्रारम्भ १३२ मृगचम्मों का सम्बद्धत्व १७३ पश्च प्राणदेवता १३२ कृष्णमृगचर्म और उसके तीन रंग १७४ यजुःमन्त्र और प्रौद्ग्रभरण १३४ एमूषवराह १७५ श्रीभरण यज्ञ में पच प्राहुतियाँ १३५ कृष्ण मृगचर्म्म और उस पर बैठना १७६ वाग्धि यशः १३६ शिल्प के दो प्रकार १७६ और यूप १३६ ऋक् - साम - यजुः की प्रतिकृति कृष्णमृगचर्म्म १७६ सोमयज्ञ के चार सारभाग १३८ ऋक् का उत् १७८ वस्तु के तीन विभाग १४१ मनुष्य शरीर की दो व्याधियाँ १७८ सर्वव्यापी श्रात्मा, पद और पुनः पद १४२ उर्ध्वगमनसम्पत्ति और पश्चिमा भाग पदार्थ भेद से साम में अन्तर १४२ मेखला - धारण १८१ पानी से समस्त लोकों का निर्माण १४३ सृष्टिकर्त्ता श्रङ्गिरा सृष्टि यज्ञ का प्रारम्भ १४४ ऊर्क बल १८२ ब्रह्म, यज्ञ और यज्ञ से उत्पन्न सृष्टि १४५ उल्ब ( नेदिष्ठ ) - जरायु ( जेर ) प्राण १८४ पांचवीं प्राहुति - प्रत्यक्ष यज्ञ का स्वरूप १४६ प्रजापति का उल्ब प्राण १८५ वाक् मण्डल १४६ मेखला का त्रिवृत् स्वरूप १८६ सविता देवता १४८ जीवात्मा के तीन अन्न १८७ पाङ्क्त यज्ञ १४८ यजमान द्वारा मेखला - धारण १८८ आहुति से कामनाओं की प्राप्ति १४६ कृष्ण विषारण बन्धन की उपपत्ति १६० पुरुष ही यज्ञ है १४६ अत्रिप्राण और वाक् वाक् के चार प्रकार १६६ अथ द्वितीय अध्याय कृष्णविषाण- इन्द्र की योनि १६६ प्रदम्बर दण्ड २०३ १ - कृष्णाजिन दीक्षा २- दीक्षितव्रत ब्राह्मण कृष्णाजिन दीक्षा ( मूल ) १५१ कृष्णाजिन दीक्षा ( हिन्दी अनुवाद ) १५६ दीक्षित ब्राह्मण ( मूल ) २०७ हिन्दी विज्ञानभाष्य प्रारम्भ १७० दीक्षितव्रत ब्राह्मण ( हिन्दी अनुवाद ) २१२ कृष्णमृगचर्म्म १७१ हिन्दी विज्ञानभाष्य प्रारम्भ २२६ साम - मण्डल बृहत्साम हरिज्जन १७२ दीक्षित मनुष्यके व्रत - धर्म २२८ १७२ संसार में व्याप्त काला श्रौर सफेद तत्त्व २२६ १७३ प्रजापति से ऋत - सत्य की उत्पत्ति २३० [ ]

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प्रतिपथ ब्राह्मण ( तृतीय काण्ड ) विषय सूची ( प्रथम खण्ड ) विषय पृष्ठ संख्या विषय पृष्ठ संख्या पारमेष्ठ्य सोम का अनवरत श्राहुत होना २३२ ३३ यज्ञिय देवता २८५ ' सूर्य का यूप - स्वरूप २३३ श्रारमा - स्वरूप अग्नि ( वाक् ) २३६ वसु - रुद्र - आदित्य संशयवाद ३८५ २८८ प्रातःकाल वाक् - संयमन २३६ चार प्रकार की सृष्टियाँ २ ९ ० सायंकाल वाक्- विसर्जन २३७ पृथिवी के मूल प्राण का आत्मसात् करण २ ९ ४ सम्वत्सर - मण्डल २३७ अदिति पृथिवी २६५ प्रजापति के उक्थं प्रकं - अशिति भाव २३८ पृथिवी - प्रायणीय और उदयनीय २ ९ ५ वाक् - विसर्जन के विभिन्न मत २३६ खगोल के दो विभाग - दृश्यमण्डल और ब्रह्म के तीन भेद २४२ प्राकृतिक मण्डलः २६५ अग्नि- सोम यज्ञ २४४ सूयं का प्रचलत्व २६६ दुग्ध - पान का प्रावधान - २४७ पृथिवी की गति .२६६ अव्यय पुरुष की पाँच कलाएँ २४६ दैनन्दिन गति - सांवत्सरिक गति .२ ९ ६ चिदाभास - जीव २४सौर वर्ष २६६ ब्रह्मणस्पति सोम २४६ क्रान्तिवृत्त - विष्वद् वृत्त २६७ प्रज्ञामन इन्द्रियमन २५० शरत संपात २६७ २५१ दिन - रात की घट - बढ़ -१६७ वसन्त - संपात कार्य के विभाग २ ९ ७ २५२ मित्रावरुण वायु २५२ दशिनो विराट् ३०० रोग के दो प्रकार - श्रमीवा और यक्ष्मा बृहती छन्द ३०० २५८ अहोरात्र वृत्त ३०० देवता - प्राण और विग्रह भेद से दो प्रकार २५६ देवसर्ग - तमःसर्ग - रजः सर्ग सुमेरु – कुमेरु ३०१ २५६ कदम्ब वृत्त - नाक ३०२ व्रत और वृत्त २६० विष्वद्वृत्त - पृथिवी ३०४ व्रतपति अग्नि २६५ अदिति के आठ पुत्र ३०५ वाक् - संयमन का समय २६६ पथ्या स्वस्ति ३०८ वाक् - संयमन का कारण २६७ चितेनिधेय - चित्याग्नि ३०६ ३ - प्रायणीयेष्टि ब्राह्मण मर्त्या वाक ३१० ३१० प्रायणीयेष्टि ब्राह्मण ( मूल ) २७१ यज्ञ के मूलभूत पाँच देवताओं का यजन ३१२ प्रायणीयेष्टि ब्राह्मण ( हिन्दी अनुवाद ) २७३ सापेक्ष निरपेक्ष पदार्थ ३१२ हिन्दी विज्ञानभाष्य प्रारम्भ २८५ अग्नि- सोमादि देवताओं से ऋतु -ज्ञान ३१४ [ १० ]

पृष्ठ 13

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tate ब्राह्मण ( तृतीय काण्ड ) विषय सूची ( प्रथम खण्ड ) विषय पृष्ठ संख्या विषय पृष्ठ संख्या दिशा - ज्ञान की सापेक्षता ३१४ प्रारण तत्त्व ३५२ वाक् श्रग्नि ३१६ ऋषि श्रसत् ३५२ निदानेन वाक् ३१७ वाक् के चार प्रकार ३५३ अदिति - श्रग्नि सोम तथा सवित्ता से सौरी वाक् ३५४ दिशाओं का ज्ञान ३२१ पानी के चार प्रकार ३५५ ऊर्ध्वा और अधः दिशाएँ ३२१ स्वयम्भू के मनोता ३५६ यज्ञ में मस्तक हस्तादि की कल्पना परमेष्ठी के मनोता ३२३ ३५६ सूर्य के मनोता ३५७ ४- सोमाख्यान ब्राह्मरण मरुत्वान और मघवा इन्द्र ३५८ चन्द्रमा की २७ स्त्रियाँ ३५६ सोमाख्यान ब्राह्मण ( मूल ) ३२५ दक्षवृत्त ३५६ सोमाख्यान ब्राह्मण ( हिन्दी अनुवाद ) ३२८ सर्वप्रजापति ३६१ हिन्दी विज्ञानभाष्य प्रारम्भ ३४१ चन्द्रमा का मरणधर्म्म ३६२ सुत्या कम ३४१ चित्याग्नि ३६२ सुपर्णी- कद्रू श्राख्यान ३४३ पुनः पद ३६३ गायत्री द्वारा सोम का अपहरण ३४५ वाक् से क च ट त प आत्मिका शब्द-जगती - त्रिष्टुप का गायत्री में शामिल होना ३४६ वाक् की उत्पत्ति ३६३ क़द्रू को एक सहस्र पुत्रों का वरदान ३४६ अंगिरा आदित्य संघर्ष अश्वघर्षण ३६५ विनता को' पुत्र द्वारा शाप ३४६ विष्ववृत्तीय पृष्ठ - ध्रुव ३६५ विनता द्वारा कद्रू की दासी बनना ३४६ स्कम्भ - स्थाणु ३६६ ब्रह्म के तीन रूप ३४६ पृथिवी की कृष्ण रश्मियाँ ३६६ आभू ब्रह्म ३४७ रंग सृष्टि एवं सूर्य के सात रंग ३६७ प्रविष्ट ब्रह्म ३४८ भास्वर सोम और दिक् सोम ३६६ सृष्ट ब्रह्म ३४६ वृत्त के ३६० अंश ३७० क्षर - अक्षर अव्यय ब्रह्म ३४६ मण्डल के चार भाग ३७० क्षर के तीन भाग ३४६ श्रग्नि के ग्यारह प्रकार ३७३ अव्यय - अक्षर - आत्मक्षर की पाँच कलाएँ ३४ ९ प्राणों का उल्वण ३७४ सर्वयज्ञ ३५० वाणी और वाक् का स्वरूप ३७६ पाँच यज्ञक्षर मण्डल ३५१ वीर्य के तीन प्रकार ३७६ विश्व - सृट् ३५१ आकाश और वाक् ३८० विश्व सृट् में सप्तलोक - व्यवस्था ३५१ धृता मनसा वाक् ३५० रोदसी - क्रन्दसी संयति त्रिलोकियाँ ३५१ वाक् की सर्वव्यापकता ३८५ [ ११ ]

पृष्ठ 14

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शतपथ ब्राह्मण ( तृतीय काण्ड ) विषय - सूची ( प्रथम खण्ड ) विषय पृष्ठ संख्या विषय अनुवचन - प्रकाम - गाथा वाक् मानुष्यात्मा का स्वर्ग से सम्बन्ध असंयता बाक पृष्ठ संख्या ३८६ ४२६ ३८८ आगम और निगम शास्त्र ४२८ शतपथ और माध्यन्दिन शाखा ४३० अथ तृतीय अध्याय सोमोनहन और सोमपर्यारणहन ४३१ उष्णीष बाँधना ४३१ १ - सोमकयरणी ब्राह्मण सम्वत्सर मण्डल और सात छन्द ४३२ सोमक्रयरणी ब्राह्मण ( मूल ) ३६१ वाङ्मण्डल का अधिपति सोम ४३३ सोम की प्रजा - छन्द ४३४ सोमक्रयणी ब्राह्मण ( हिन्दी अनुवाद ) ३६३ सोम का ४० स्वरूपों में परिणत होना ४३५ हिन्दी विज्ञानभाष्य प्रारम्भ ४०० श्रविभक्ता वाक् ४०१ विचित मनुष्य ४३६ नाभानेदिष्ठ प्राण ४३८ विभक्ता वाक् ४०१ वालखिल्य प्रारण ४३८ वाक् और छन्द ४०१ वृषाकपि इन्द्र प्राण ४३६ रथन्तर सामयुक्त वाक् के तीन विभाग ४०२ वायुमय एवयामरुत प्राण ४३६ शाक्वर छन्द- शाक्वर साम ४०२ छन्द के चार प्रकार ४४१ परार्ध्य अपरार्ध्य गौ ४०४ सविता देवता ४४२ पशुपति रुद्र ४०४ अध्वर्यु द्वारा सोम मापन ४४४ परस्पर घोर शत्रुः इन्द्र- वरुरण ४०६ सूर्य द्वारा पार्थिव पदार्थों का भोग ४४६ त्रिवृत् वज्र ४०८ घर की प्रतिष्ठा पत्नी ४१० ३ - सोमपणन ब्राह्मरण वृषा - योषा ४११ घी - स्वरूपा वाक् देवी ४११ सोमपणन ब्राह्मण ( मूल ) ४४६ संसार के निर्मापक पाँच अक्षर ४१२ सोमपणन ब्राह्मण ( हिन्दी अनुवाद ) ४५१ एक सहस्र गौ ४१२ हिन्दी विज्ञानभाष्य प्रारम्भ ४५८ गौ के विभिन्न रंग और उनका गाय के दस वीर्य्य ( प्रोज ) ४५६ तात्त्विक विवेचन ४१३ सोम के मूल्य रूप पाँच वस्तुएँ ४६१ पाँच अवयवों में विभक्त प्राकृतिक यज्ञ ४६२ २- सोमोपनहन ब्राह्मण अजा और प्रजापति का स्वरूप ४६४ धिष्ण्याग्नियाँ ४६८ सोमोनहन ब्राह्मण ( मूल ) ४१५ सोमोनहन ब्राह्मण ( हिन्दी अनुवाद ) ४१७ ४ - सोमपर्थ्याहन ब्राह्मण हिन्दी विज्ञानभाष्य प्रारम्भ ४२६ दिव्यात्मा की उत्पत्ति सोमपर्य्याणहन ब्राह्मण ( मूल ) ४२६ सोमपणहन ब्राह्मण ( हिन्दी अनुवाद ) ४७३ ४७७ [ १२ ]

पृष्ठ 15

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शतपथ ब्राह्मण ( तृतीय काण्ड ) विषय सूची ( प्रथम खण्ड ) विषय पृष्ठ संख्या विषय पृष्ठ संख्या हिन्दी विज्ञानभाष्य प्रारम्भ ४८८ यज्ञिय वृक्ष ५३५ वृषभ सोम ४८६ आश्विवाल ५३६ पृथिवी अन्तरिक्ष- द्यो लोक ४६० याज्या और अनुवाक्या मन्त्र ५४४ नाष्ट्रा प्राण ४६१ सोम की चार अवस्थाएँ ४ ९ ४ २- तानूनप्त्र ब्राह्मण एतश घोड़े ४६५ बलों पर भाई से वृष्टि का अनुमान ४६८ तानूनप्त्र ब्राह्मण ( मूल ) ५४७ तीन तरह के शत्रु ५०१ तनूनपत्र ब्राह्मण ( हिन्दी अनुवाद ) II श्येन श्रौर सोम ५०२ हिन्दी विज्ञानभाष्य प्रारम्भ ५५३ शोभन मन्त्र हरिवाहन महल्याजार संवत्सराग्नि ५०२ ब्रह्माण्ड और सप्त लोक ५५४ ५०३ पानी से मैथुनी सृष्टि ५५५ ५०४ स्वयम्भू का प्राण तत्त्व ५५६ ५०६ असत् प्राण तत्त्व ५५६ कृष्णसारंग पशु बाह्यचक्षु - अन्तश्चक्षु सूर्य - चक्षुवृत् ग्राम्भस - नाभस - माहस देवता ५०७ सृष्टिक्रम का विवेचन ५५७ ५०८ अत्रिप्राण ५५८ ५०८ पृथिवी का मनोता ५५८ ५०६ ब्राह्मी स्थिति ५५८ ३३ देवता ५५६ श्रथ चतुर्थ अध्याय ३३ यज्ञिय देवताओं में सोमाहुति ५६० १- श्रातिथ्येष्टि ब्राह्मण अन्तरिक्ष का बायु ५६१ वस्तु का अधिष्ठाता अग्नि ५६१ ३३ देवताओं के पाँच थोक ५६२ श्रातिथ्येष्टि ब्राह्मण ( मूल ) ५१३ देवताओं के अधिष्ठाता इन्द्र ५६५ आतिथ्येष्टि ब्राह्मण ( हिन्दी अनुवाद ) ५१६ - तानूनपत्र का स्वरूप ५६८ हिन्दी विज्ञानभाष्य प्रारम्भ ५२३ तनूनपात् शाक्वर वायु ५६पुरुष - रूपी सोमयज्ञ ५२३ साम्ब सदाशिव वायु ५६६ क्षत्र - वीय्यं के दाता ५३२ दिक् और भास्वर सोम ५७० सम्वत्सर - संमित सोम यज्ञ ५३३ उपद्रष्टा वायु ५७१ नवकपाल पुरोडाश ५३३ प्रकतिमण्डल के चार देवता ५७४ यज्ञ - पुरुष के दो विभाग ५३४ मन की इच्छा का प्रेरक तनूनप्ता वायु ५७७ प्राण के तीन प्रकार ५३४ इच्छा को सर्वत्र विकसित करने वाला वैश्वानराग्नि ५३५ परिपति वायु ५७८ [ १३ ]

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शतपथ ब्राह्मण ( तृतीय काण्ड ) विषय सूची ( प्रथम खण्ड ) विषय चार लोकों के चार पदार्थ पृष्ठ संख्या विषय पृष्ठ संख्या ५७८ ध्रुव धत्रं धरुण - धर्मं सोम ६१७ शक्यां वायु ५७६ सोम - श्राप्यायन के कारण ६१८ आठ प्रकार की त्रिलोकियाँ ५८२ यज्ञ श्रौर सारघ मधु ६१६ श्रापोलोक ५८२ क्षत्र - वी के चार विभाग ६२१ अग्नि - सोम इन्द्र - वरुण का सूर्य्यं से सम्बन्ध ५८५ ब्रह्म - वीर्य्यं के चार विभाग ६२१ सोम का आप्यायन ६२२ ३ प्रवान्तरदीक्षा ब्राह्मण अवान्तरदीक्षा ब्राह्मण ( मूल ) ४- उपसदिष्टि ब्राह्मरण ५८७ अवान्तरदीक्षा ब्राह्मण ( हिन्दी अनुवाद ) ५६० उपसदिष्टि ब्राह्मण ( मूल ) ६३१ हिन्दी विज्ञानभाष्य प्रारम्भ ५६७ उपसदिष्टि ब्राह्मण ( हिन्दी अनुवाद ) ६३४ ६ प्रकार की संगतियाँ ५६७ हिन्दी विज्ञानभाष्य प्रारम्भ ६४३ श्रवभृथ स्नान ५६६ पुरुष - स्वरूप यज्ञात्मा ६४३ भवान्तरदीक्षा ६०१ प्रवर्ग्य यज्ञ ६४४ अग्नि से त्वचा का वेष्टन ६०१ यज्ञ के पाँच प्रकार ६४५ प्राण देवताओं का अंगुलीन्यश्चन ६०३ उपसत्याग ६४५ स्त्री में अग्नि का उत्वरण होना ६०५ अनुवाक्या और याज्या मन्त्रों का उपयोग ६४६ मेखला को कसने का रहस्य ६०६ आयसी - राजती - हिरण्यमयी पुरी ६४६ सोम यज्ञ के १६ ऋत्विक् ६०७ सम्वत्सर के तीन विभाग - प्राज्य - पृष्ठ- स्तोम ६५४ अनिरुक्त प्रजापति ६०७ ज्ञान- उपासना कर्म काण्ड ६५७ निरुक्त प्रजापति ६०७ विधि के दो प्रकार ६५७ उद्गीथ प्रजापति ६०८ आश्रावरण कर्म्म ६५८ सप्तदशस्थ आहवनीयाग्नि ६०८ अस्तु श्रौषट् यज्ञ ६५८ समिद्धार ऋत्विक् ६०८ संवत्सर - यज्ञ का संस्कार ६६१ प्रवचनकार ऋत्विक् ६०८ उपसत् क्रिया ६६३ गरमपानी से सोम का उपचार ६१३ होम याग ६६५ सोम के चार प्रकार ६१३ वर्धिष्णु- क्षयिष्णु चान्द्रायण व्रत ६६७ द्रोणकलश का तात्त्विक स्वरूप ६१६ परउर्वी - परोह्वीः ६६८ - * -१४

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शुक्लयजुर्वेदीय- माध्यन्दिन - शतपथब्राह्मणभाष्ये " अध्वरनाम ” तृतीयं काण्डम् ३

पृष्ठ 20

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