Upanishad Vijnana Bhashya Bhumika I — पृष्ठ 41–50
उपनिषद विज्ञान भाष्य भूमिका १ मोतीलाल शास्त्री · पृष्ठ 41–50
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के P A1 BE 1599522 ि 25 श्रीः इति - उपनिषद्विज्ञानभाष्यभूमिकानुगत - प्रथमखण्डस्य " किमपि - प्रास्ताविकम " उपरतम्
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श्रीः उपनिषद विज्ञान भाष्यभूमिकानुगत - प्रथमखण्ड की “ प्रधानविषयसूची ” एवं “ स्मारक विषयसूची "
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श्रीः ४६ १ - प्रारम्भिक - निवेदन [ भूमिका ] जाता है? * -- प्रथमखण्ड - विराम क - वैदिक साहित्य, और हमारी मनोवृत्ति ख- वैदिक - साहित्य, और प्रतीच्य विद्वान् -- वैदिक - साहित्य, और वैज्ञानिक - निदर्शन ग--9 के क्रिक-१ से ८० पर्यन्त १ से ३४ " " १ से ७२, २३६ से २४२ पर्य्यन्त ... २२ से ४१, ..... ४२ से ८० " ि उपनिषद्विज्ञानभाष्यभूमिकानुगत - प्रथमखण्ड की प्रधान-- विषयसूची २ – उपनिषदों के आद्यन्त में मंगलपाठ क्यों किया ३- ' उपनिषत् ' शब्द का क्या अर्थ है? ४ - क्या ' उपनिषत् ' वेद? - संकलनात्मिका - पृष्ठसंख्या २७२ सर्वसंकलनानुगता - पृष्ठसंख्या - ४६२ ( चारसौ बासठ ) प्रधानविषयों से अनुगत - परिच्छेदात्मक F प्रमुख - विषय F १ - प्रारम्भिक - निवेदन, के अन्तर्गत प्रमुख - विषय -१ से ८० पर्य्यन्त
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विषयसूची क - - कम्र्म्ममेदमूलक - अधिकारी का विभेद ख - देवी - आसुरी - सम्पति, और मङ्गलरहस्य ग - आत्मविद्या, और उपनिषच्छास्त्र घ - मङ्गलभेद - मीमांसा की ज २ ६० विषय - १ से ७२ पर्य्यन्त -विषयोपक्रम ख- प्राचीनदृष्टि, और उपनिषच्छदार्थ ग - विज्ञानदृष्टि, और उपनिषच्छब्दार्थ घ - ब्राह्मण में उपनिषत् ङ - श्रारण्यक में उपनिषत् च - उपनिषत् में उपनिषत् my ३ ppp फ क— प्रस्तावना - विषयप्रवेश ख-दार्शनिकों के विभिन्न - विचार .. १ से ६, ... ७ से ११,, ..- १२ से १८,, १६ से ३४,, IDIE ....... १.६ " ... ७ से २६,, २७ से ३०, ... ३१ से ४७,, ... ४८ से ४६ " .... ५० से ७२,, कीर ... १ से २८ पर्य्यन्त .... २६ से ३४,, ... १ से ८८ " २ – उपनिषदों के आद्यन्त में मङ्गलपाठ क्यों किया जाता है?, के अन्तर्गत - प्रमुख विषय १ से ३४ पर्य्यन्त ३- ' उपनिषत् ' शब्द का क्या अर्थ है, के अन्तर्गत- प्रमुख ४ - क्या ' उपनिषत् ' वेद है?, के अन्तर्गत प्रमुख - विषय -ग- वेद पौरुषेय हैं, अथवा अपौरुषेय १, इस सम्बन्ध में-
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उपनिषद्भूमिका प्रथमखण्ड -" वैज्ञानिक- वेद - निरुक्ति " ४ ६ ---– MPS १ - वेद प्रतिष्ठानुगता - श्रात्मस्वरूपनिरुक्तिः २ - सच्चिदानन्दलक्षणा - वेदनिरुक्तिः ३. - अमृत- मृत्युमय आत्मलक्षणा - वेदनिरुक्तिः 1 ४ - मनः - प्राण- वाङमयी त्रिकलवेदनिरुक्तिः II - उक्थ - ब्रह्म- साम - लक्षणा वेदनिरुक्तिः ६ - आत्म - ज्योति - प्रतिष्ठा - लक्षणा - वेदनिरुक्तिः • ८६ से २३८, I ... २६ से ४० " •.४१ से ५४, · ५५ से ६६, .... ६७ से ८०, " .... ८१ से ८८, ८ से २३८ पर्य्यन्त .... ८६ से १०२ ” ... १०३ से ११४,, १५ से १२०, ... १२१ से १२६, - १२७ से १३४,, ··· १३५ से १४४, : घ - वेद के तात्विक स्वरूप की रूपरेखा से अनुप्राणित-ग -- “ वेदपौरुषेय हैं, अथवा अपौरुषेय?, इस सम्बन्ध में-“ दार्शनिकों के विभिन्न - विचार " - के अन्तर्गत प्रमुख-विषय -१ से ८८ पर्य्यन्त १ - त्रयोदश- अवान्तरमतयुक्तं पूर्वोत्तरमीमांसादर्शनाभिमत - मतप्रदर्शनम् १ से २८,, २- सप्त- अवान्तरमतयुक्तं नव्यन्यायाभिमत मतप्रदर्शनम् 34 ३ – पञ्च - श्रवान्तरमंतयुक्त ं - प्राचीनन्यायाभिमत- मतप्रदर्शनम् ४ – सप्त - अवान्तरमतयुक्त ' - प्राधानिकाभिमत - मतप्रदर्शनम् ५- सप्त - श्रवान्तरमतयुक्त - वैशेषिकदर्शनाभिमत- मतप्रदर्शनम् ६ – नास्तिकदर्शनाभिमत - मतप्रदर्शनम् 138 घ घ - — वेद वेद के तात्त्विक - स्वरूप की रूपरेखा से अनुप्राणिता-“ वैज्ञानिक -- वेद - निरुक्ति " के अवान्तर - प्रमुख विषय-
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विषयसूची ७ – उपलब्धिलक्षणा वेदनिरुक्तिः ८- ब्रह्मन्द्र विष्णुसहकृता - वेदनिरुक्तिः ६- प्राण श्रापा वाक सहकृता - वेदनिरुक्तिः १०- समष्टिरूपेण आत्मवेदनिरुक्तिः ११- ब्रह्म - विद्या - वेद- भिन्ना- ज्ञानलक्षणा - वेदनिरुक्तिः १२- वेदनिरुक्तौ ( १ ) - पर्ववेदनिरुक्तिः १३-( २ ) - भावनावेदनिरुक्तिः 99 १४- " ( ३ ) - भाववेदनिरुक्तिः ... १५ " ( ४ ) -- दिग्वेदनिरुक्तिः १६- ” ( ५ ) - देशवेदनिरुक्ति १७–,, ( ६ ) - कालवेदनिरुक्तिः १८- १ ( ७ ) --- वर्णवेदनिरुक्तिः - १४५ से १५२,, १५३ से १६०, " -- १६१ से १६६,, · १६७ से १७२,, ··· १७३ से १८६ " .... १८७ से १६४, --- १६५ से २०६ ... २०७ से २६२,, " - ३१३ से २२०, ... २२१ से २२६,, * २२७ से २३२, · २३३ से २३८,, उपनिषद्विज्ञानभाष्यभूमिकानुगत - प्रथमखण्ड का विराम २३६ से २४२ पर्य्यन्त इति - उपनिषद्वज्ञानभाष्यभूमिकानुगत - प्रथमखण्डस्य प्रधान- विषयसूची-उपरता es
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उपनिषद्विज्ञान भाष्यभूमिकानुगत - प्रथमखण्ड “ स्मारक - विषयसूची " ( १ - प्रारम्भिक - निवेदन ) ( १ से ८० पर्य्यन्त ) क वैदिक - साहित्य, और हमारी मनोवृत्ति १ से २१ पर्य्यन्त १ - इष्टसंस्मरण २१- वेदाध्ययन की आवश्यकत्तव्यता २२- वेदशास्त्र, और परमपुरुषार्थं २३ - सर्वशास्ता वेदज्ञ ब्राह्मण २४ -कर्म्मदोषनाशक वेदाग्नि २५ - श्रार्य्यप्रजा की भाग्यहीनता २६ - वरप्राप्ति के द्वारा उद्बोधन २७- अभ्युदय, निःश्र ेयस - साधक धर्म्म २८ - प्रकृति का कोप Ε २ - छन्दोभाषामय उपनिषद्ग्रन्थ ३ १० ३- नागरी, और उपनिषत् " २६- श्रद्धा का क्रमिक ह्रास ४- भारती, और उपनिषत् " ३० - वैदिकसाहित्योत्थान, और महाभारत ५- पारिभाषिक शब्दों की जटिलता ६ - नियतार्थप्रवृत्ति ७- मूल ग्रन्थ से ही रहस्यावगम ८ - वेदराशि और भारतवर्ष ३१ - वैदिक साहित्यपतन, और महाभारत ३२ - विद्वानों की प्रतिभा का दुरुपयोग ४ ३३ - सायण, महीधर के प्रति कृतज्ञता ११ ३४ - वेदभाष्य, और कम्परा व्याख्या ६ - सर्वाधार वेदशास्त्र १० - वेद का स्तुति गान ११- प्रकृति की नियत रचना १२ - नियति चरब्रह्म की सर्वरूपता १३- स्वतः आविर्भूत वेदशास्त्र १४- अपौरुषेय वेदशास्त्र १५ - वेदशास्त्र, और जीवनव्रत १६- वेदाध्ययन, और सर्वोत्कृष्ट धर्म्म १७ - द्विजाति का वेदानुगमन १८ - वेदाभ्यासलक्षण उत्कृष्ट तप १६- तपश्चर्य्यारित वेदस्वाध्यायी २० - वेदशून्य नामधारक द्विजाति ५ " ८ " ३५ - वैदिकतत्त्वज्ञान की जटिलता ३६ - वर्त्तमान- शताब्दी, और वेदतत्त्वविलुप्ति ३७- अङ्गशास्त्रों का साम्राज्य ३८ - मार्मिक बोध का प्रभाव ६ ३६ - वेदशास्त्र की दुर्दशा . 6 ४० - अर्थज्ञानशून्या वेदभक्ति ४१ धर्म की उपपत्ति, और हमारा मौनव्रत ४२ - स्मृतिशास्त्ररूप धर्मशास्त्र ४३ - विधि - निषेधात्मक धर्मशास्त्र ४४ - हमारी पण्डितम्मन्यता ४५ - धर्म्मपदार्थ, और गन्धर्वनगर ६ ४६ - राजनैतिकवर्ग, और हमारे शास्त्र ११ II १२ " १३ II १४४० 39
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४७ - राष्ट्रप्रेमियों के विचार ४८८ - सविनय निवेदन ४६ - भ्रान्ति का निराकरण ५० - राजनीति, तथा धर्मनीति ५१ - धर्म्मरक्षार्थ ईश्वर का अवतार ५२ - धर्म्मनीति, और भगवान् राम ५३ – धर्म्मनीति, और हरिश्चन्द्र ५४ - धर्म्मनीति, और शिबि ५५ - धर्म्मनीति, औरं युधिष्ठिर ५६ – धर्म्मनीति, और कर्णं ५७ - धर्मनीति, और प्रताप ५८ - धर्म्मनीति, और श्राय्यैललनाएँ ५६ - धर्मनीति, और शिवाबा ६० - धर्म्मनीति का पूर्ण विजय ६१ - राष्ट्र की मौलिक - सम्पत्तियाँ ६२ - सम्पत्तिरक्षक वेदशास्त्र ६३ - वैदिकसाहित्य की उपयोगिता ६४ - ' दशहस्ता हरीतकी ' ६५ - संस्कृतज्ञ विद्वान्, और वैदिक - साहित्य ६६ - अनार्ष - पश्चिमी विचारों के अनुगामी ६७ - सामान्य प्रजावर्ग ६८ - भौतिकविज्ञान, और प्रजावर्ग ६ - महर्षियों की विदितवेदितव्यता ७० - हमारी कृतघ्नता ७१ - अविद्यामूला विडम्बना विषयसूची १५ ७६ - फ्रञ्चपण्डित ' लुई जेकोलिट ' २२ " ७७ - फञ्चपण्डित ' क्रोभर ' २३ १६ ७८- काउन्ट जॉन स्टजना ' II १७ " I ७६ - ' विक्टर कजिन ' 50-८१ - फ्रेञ्च इतिहासज्ञ ८२ - ' पाल ड्य सन ' ८३- ' शॉपनहार ' " ८४ - श्रङ्गरेज इतिहासवेत्ता " ८६- डाक्टर ' एलेग्डर ' ८७ - जर्मन पण्डित ' शेगल ' - प्रॉफेसर ' वेबर ' : १८ " " १६ " " " २० ८५ – श्रध्यात्मशास्त्रवेत्ता ‘ इनर्सन ' न ८६- श्रीमती ' एनीबेसेन्ट ' ६० - डॉक्टर ‘ एलफिल ' ६१- स्वेडिश काउन्ट ६२ - मिस्टर ' कालब्रुक ' ६३ - प्रॉफेसर बॉप ६४ - मिस्टर ' थानट ' ६५ - सर्वश्री ' मेक्समूलर ' ६६ - प्रॉफेसर ' मेग्डानल्ड ' ६७- प्रोफेसर ' हीरेन ' ६८- डाक्टर ' वेलेन्टिन ' " ६६ - ' सर विलियम जोन्स ' २१ १०० - फ्रेञ्च पं ० पायरी लॉटे 11 २४ 17 २६ २७ २८ २६ 13 ३१ " ३२ " ३३ ३४ ७२ - भारतीय साहित्य, और पश्चिमी विद्वानों की सम्मति का अनुपयोग ७३ - भ्रान्त - भारतीय मानव १०१ -प्रसिद्ध विद्वान् स्टेबी १०२ - एविक्टेटस के शिष्य ' एरियम ' १०३ - चीनी यात्री ‘ हूयेनसांग ' १०४ - मि ० मार्कोपोलो १०५ - सर जान माल्कम साहिब ख -- वैदिक साहित्य, और पश्चिमी विद्वान् १०६ –कर्नल स्लिमन ३६ ( २२ से ४१ पर्य्यन्त ) १०७ - मि ० निबूर ७४ - भारतीय साहित्य के अनन्यभक्त २१ १०८ - मि ० कॉलमेन ७५ - पश्चिमी विद्वानों के स्पष्ट उद्गार २२ १०६ - फायर जेडिन्स ३७ ८
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११० - चीन सम्राट याँगटी १११ - मि ० इडरीसी ११२ - मेगेस्थेनिज ११५ - अबुल फजल उपनिषद्भूमिका -- प्रथमखण्ड ३७ 27 ३८ 17 ३६ 33 १४१ - यज्ञविद्या, और विज्ञानपक्ष १४२ - गीताचार्य की सम्मति १४३ - ज्ञानप्रधान श्रात्मविद्याशास्त्र १४४ - विज्ञानप्रधान विश्वविद्याशास्त्र १४५ - श्रात्मविद्या, और दर्शनशास्त्र १४६ - फिजिक्स, और ' ब्रह्मविद्या ' ११३ - लॉर्ड हेस्टिंगस ११४ - बिशप हेवर साहिब ११६ - शम्सुद्दीन अब्दुला ११७- पश्चिमी विद्वानों का वेदस्वाध्यायप्रेम ११८ - हमारा श्रात्यन्तिक पतन 33 १४७ - केमेस्ट्री, और ' यज्ञविद्या ' ४० १४८ - ' कलौ वेदान्तिनः सर्वे ' ४१ ग- वैदिक साहित्य, और वैज्ञानिक - निदर्शन ( ४२ से ८० पर्यन्त ) ११६ - ' विज्ञान ' शब्द, और हमारी आकुलता १२० - विज्ञानवाद में नास्तिकता का भ्रम १२१- संत्रस्त पण्डितवर्ग १२२- नास्तिकों का क्षणिक विज्ञानवाद १२३- भ्रम का दूसरा कारण ४२ 19 " " १२४ - हमारा विज्ञानशब्द, और उसकी मौलिकता ४३ १२५ श्रास्तिकों का नित्यविज्ञानवाद १२३ - सनातनधर्म में दृढनिष्ठा " " " १४६ - भारतवर्ष का जगद्गुरुत्त्व * --यज्ञपदार्थनिदर्शन ( १ ) १५० - अठतम यज्ञपदार्थ १५१ - लोकप्रजाप्रवत्त ' के यज्ञकर्म १५२ - इष्टकामधुक् यज्ञक १५३ - प्रश्नोपनिषत् के ' रयि -- प्राण ' १५४ यज्ञ, और यज्ञप्रजापति १५५ - सम्वत्सर, और अहं का अभेद १५६ - षोडशकल सम्वत्सर १५७ - भूतानांपति सम्वत्सर १५८ - वैश्वानरलक्षण पिता सम्वत्सर १५६ - पञ्चावयत्रमूर्त्ति सम्बत्सर १६० - अग्निमूर्त्ति सम्वत्सर ४८ 59 39 " I ५० 27 ५१ ५२ १२७- श्रद्धा का पुनः स्थापन ९ २८ - विज्ञातव्य ईश्वर - प्रपञ्च II १२६ - वेदों की ' सञ्चरविद्या ' ४५ १३० - वेदों की ' प्रतिसञ्चरविद्या ' ४६ १३१ - सर्वविद्या ४७ १३२ - आत्मविद्या, विश्वविद्या II १३३ - विविधा - खण्डविद्याएँ १३४- मौलिकविद्या १३५ - यौगिक विद्या १३६ - मौलिकतत्त्व, और ब्रह्म ४८ १३७ - ब्रह्म, और ' ब्रह्मविद्या ' १३८ - यौगिकतत्त्व, और यज्ञ १३६ - यज्ञ, और ' यज्ञ विद्या ' १४० - ब्रह्मविद्या, और ज्ञानपक्ष 39 " १६१ - सोममूत्ति सम्वत्सर १६२- काममूर्त्ति सम्वत्सर १६३ - ऋतुमूर्ति सम्वत्सर १६४ - यज्ञमूर्ति सम्वत्सर १६: - प्रजामूर्ति सम्वत्सर १६६ - यज्ञमूर्ति पुरुष १६७ - पुरुषमूर्त्ति सम्वत्सर " " १६८ - वैधयज्ञ का उपभोग * ज्योतिः -- पदार्थ - निदर्शन ( २ ) १६६ - पश्चिमी जगत् का ज्योतिर्विज्ञान १७० - हीट, लाइट, इलेक्ट्री १७१ - हमारा अग्निविज्ञान १७२ - ताप - प्रकाश - विद्युत् ५३ 39 27