Upanishad Vijnana Bhashya Bhumika II — पृष्ठ 21–30
उपनिषद विज्ञान भाष्य भूमिका २ मोतीलाल शास्त्री · पृष्ठ 21–30
पृष्ठ 21
पाठ पढ़ें पाठ छिपाएँ
श्रीः उपनिषद्विज्ञानभाष्यभूमिका - द्वितीयखण्डान्तर्गता परिलेखसूची —— ] ): ( -- ): ( [ १ - अभिव्यक्तिचाधारभूत - ' क्युन ' परिलेख: ( पृ ० सं ०६०, तथा ६६१ के मध्य में ) २ - सर्वत्सरात्मक - सम्वत्सरमण्डलपरिलेख ः ( १८४ - १८५ के मध्य में ) ३ – श्रग्न्यात्मक - कालात्मक - सम्वत्सरचक्र त्रयी स्वरूपपरिलेखः ( १८४ - १८५ के मध्य में ) ४ - वागापोऽग्निशुक्रत्रयवितानपरिलेखः ( २०१ - २०२ के मध्य में ) ५- सौर- पार्थिव - सम्वत्सरातिमान परिलेखः ( २४०-२४१ के मध्य में ) ६ - सप्त देवच्छन्दोमय -सौररथचक्रपरिलेखः ( ३५२ - ३५३ के मध्य में ) ७- विष्कम्भ ( व्यास ) भावानुगतस्त्रिगुणितपरिणाहमण्डलपरिलेखः ( ३१४-३१ ५ के मध्यमें ) ८ - छन्दो वेदप्रतिकृतिप्रदर्शनात्मकः परिलेख: ( ३१४-३१५ के मध्य में ) ६- अणु - स्कन्ध - प्रतिकृतिप्रदर्शनात्मकः परिलेखः ( ३१८-३१६ के मध्य में ) १० - रश्म्यर्कसहस्र बितानपरिलेखः ( ३१६-३२० के मध्य में ) ११- व्यासाणुबिन्दुवितानपरिलेख: ( ३२१ - ३२२ के मध्य में ) १२ - पार्थिवसम्वत्सरचक्रानुगत सामत्रयी - परिलेखः ( ३२४-३२५ के मध्य में ) १३ - सौरसम्वत्सरचक्रानुगत -सामत्रयी - परिलेख ( ३२४-३२५ के मध्य में ) १४ - सार - पार्थिव - सामातिमानपरिलेखः ( ३२४-३२५ के मध्य में ) १५ - चानुपसामातिमानपरिलेख ( ३२६-३२७ के मध्य में ) १६– छन्दोवेदात्मक - विष्कम्भवितानपरिलेखः ( ३२८-३२६ के मध्य में ) १७ - व्यासा साहस्री - वितानपरिलेखः ( ३२८-३२६ के मध्य में ) १८ - व्यासानुगतपरिणाहसाहस्री वितान परिलेखः ( ३२८-३२६ के मध्य में ) १६ - सूर्य्यानुगत- उक्थामद ( मूर्ति ) वितानपरिलेखः ( ३३०-३३१ के मध्य में ) २० – परिणाहात्मकसाममण्डलवितानपरिलेख: ( ३३४-३३५ के मध्य में ) २१ – मण्डलात्मक - पृष्ठय - रश्म्यात्मक अभिप्लव- मण्डलस्वरूपपरिलेखः ( ३३६-३३ज्केमध्यमें १८
पृष्ठ 22
पाठ पढ़ें पाठ छिपाएँ
विषयसूची २२- अभिप्लवस्तोमार्कवितानपरिलेखः ( ३३८-३३६ के मध्य में ) २३- परिणात्मकसहस्रसामवितान परिलेखः ( ३४०-३४१ के मध्य में ) २४ - प्रकारान्तरेण सहस्रसाम वितानपरिलेखः ( ३४४-३४५ के मध्य में ) २५- विष्कम्भ - मूर्त्ति - वितान- समष्टिपरिलेख: ( ३४४-३४५ के मध्य में ) २६ - पारावतपृष्ठानुगत - पार्थिव - जागतमण्डलपरिलेख: ( ३५४-३५५ के मध्य में ) २७- त्रैलोक्यत्रिलोकी - रूप - स्तौम्यत्रैलोक्यानुगत - महापृथिवी - परिलेख: ( ३५४-३५५के मध्यमें ) २८ - पञ्चविधसामानुगत- पार्थिवमण्डल परिलेखः 1: ( ३५४-३५५ के मध्य में ) २६ - छन्दो- वितान - रस - भावानुगत - त्रयीवेदस्वरूपपरिलेख: ( ३६४ - के अन्त में ) ३० - वेदत्रयी- समष्टिपरिलेख: ( ३६४ के अन्त में ) ३१ - सौर - अदितिमण्डलपरिलेखः ( ३७६-३७७ के मध्य में ) इति - उपनिषद्वि ज्ञानभाष्यभूमिका - द्वितीयखण्डान्तर्गता परिलेख सूची १६
पृष्ठ 23
पाठ पढ़ें पाठ छिपाएँ
उपनिषद्विज्ञानभाष्यभूमिका - द्वितीयखण्डान्तर्गता आलेखसूची _00 ): - * -: 00-१- ब्रह्मनिःश्वसित - ब्रह्मस्वेद वेदात्मक दशकल - विराब्रह्म - आलेख २ - वेद - लोक -देव - विव भाव - लेख ३ - त्रिमूर्त्तिश्चतुम्मु खब्रह्मा - श्रालेख ४- द्विमुखविष्णु - आलेख ५ - त्रिमुख शिव - आलेख ६- ब्रह्मा - विष्णु - शिव - संस्था - आलेख ७ त्रैलोक्य त्रिलोकी - आलेख ८- अष्टादशविध ( १८ ) गृहोपग्रहभाव आलेख ६ - प्रजापत्यनुगता - वेदसम्बन्धत्रयी - आलेख १० - पञ्चाग्निसमानुगत - पञ्चवेदस्वरूप आलेख ११ – पञ्चवेदानुगता वेदत्रयी - आलेख १२ – ' सर्वमिदं वयुनम् ' - आलेख १३ - त्रितन्त्रात्मक नवकल आत्मप्रजापति - लेख १४ - ज्ञान -कर्म्म - भूतात्मक वेदप्रजापति - आलेख १५ - शुक्र वेदविकास - आलेख १६ - अनन्त - दिव्य - गायत्रीमात्रिक वेद - लेख १७- ब्राह्मण - रेभ - ऋषि - देवता ब्रह्मानुगता वेद विद्यासंस्था - आलेख १८ - विज्ञेय - दुर्विज्ञेय - विज्ञेय - वेद - लेख १६ - असत् - रोचना -द्रष्ट्व - वक्त, -लक्षण ऋषि - आलेख ८ २०- स्तोम - लोक देव - वेद - चतुष्टयी - लेख २१ - प्रतिष्ठा ज्योति - यज्ञात्मक वेद - लेख २२ - वेदत्रयीप्रवर्त्तक- अग्नित्रयविव - आलेख २० पृ ० सं ०
पृष्ठ 24
पाठ पढ़ें पाठ छिपाएँ
विषयसूची २६ – छन्दोमा - गोसव - सम्वत्सर - यज्ञ - आलेख २७- सपिण्डतानुगत अग्निवंश लेख २८ - प्राजापत्यत्रिलोकी - स्तौम्या आलेख ३१ - रूप- शरीर - प्राणात्मक अग्निहोत्र - श्रालेख ३२- पृश्नि- कृष्णा - शुक्ला - गौ- स्वरूप आलेख ३३ – कृष्णाजिन - पुष्करपर्ण - स्वरूप - आलेख ३४ - प्रतिष्ठा यज्ञ - काल - प्रजापति - आलेख ३५ – ‘ सप्त वै देवच्छन्दांसि ' - आलेख ३६ - महापृथिवीस्वरूप आलेख ४० - दशकल - चित्य- विराड ग्नि - आलेख ४१ - उक्थ अर्क - महान् स्वरूप आलेख ४२- पार्थिव ऋगग्नि- अनुगत उक्थभात्र - आलेख ४४ - दिव्य सामाग्नि - अनुगत महद्भाव - आलेख ४८ - प्रजनयिता सम्वत्सरप्रजापति - लेख ४६ ब्रह्म देव भूत - पशु - प्रजाचतुष्टयी आलेख -२१ १६८ १६६ १७० १७१ १७६ १७६ १६. १६१ १६८ १६८ २०१ २०८ २१२ २१८ २१६ २२५, एवं २२६ २२८, तथा २२६ के मध्य में २२६ २३० २३१ २३१ २३२ २३३ २३५ २३६ २४० २४२ २३ - सत्याग्नि- नारायणाग्नि पलितवामाग्नि रूप वेद या - लेख २४ - परमाकाश - समुद्र - इलान्द - रूपा त्रैलोक्य त्रिलोकी - आलेख २५- ब्राह्मी वैष्णवी - शैवी - त्रिलोकी - आलेख २६ - जगदाधार - जगत्कर्त्ता - जगत् - रूप समन्वयमूलक प्रजापति - आलेख ३० - चित्यप्रजापति - अनुगता चतुद्द ' श - चिति - आलेख ३६ – बृहतीभावानुगत - आधिदैविक प्रजापति - आलेख ३७ - बृहतीभावानुगत आध्यात्मिक प्रजापति श्रालेख ३८ - सम्वत्सरप्रजापतिकलाव्यूहन - आलेख ४३ –आन्तरिक्ष्य यजुरग्नि श्रनुगतर्कभाव - आलेख ४५ - आदित्य - वायु - अग्न्यनुगत उक्थ - महान् अर्क -भाव - आलेख ४६ - भूपिण्ड, एवं पृथिव्यनुगत उक्थ अर्क - महान् - भाव - आलेख ४७– व्रतं - महा, क्यं - अर्क, थम् - उक्, भाव - त्रा लेख...
पृष्ठ 25
पाठ पढ़ें पाठ छिपाएँ
विषयसूची ५० - ' त्रय्यां वाव विद्यायां सर्वाणि भूतानि ' - श्रालेख ५१ – सप्तच्छन्दोऽनुगता वेदत्रयी - लेख ५२ - छन्दोऽनुगता वेदविद्या आलेख -५३ - प्राजापत्यवेद - कला विभाग- आलेख ५४ - तच्चवेदानुगत पङि क्तभावसमन्वय - आलेख ५५ - वेदानुगत - मुहूर्त्तावयव - आलेख ५६ - ' दवीय सि परः दवयसि परः ख ५७ - चिति - परिश्रित - लोकम्पृणा समन्वय - आलेख ५८ - पञ्च चितिक न्यूनप्रजापति - श्रालेख ५६ - पञ्चचित्यनुगत ३६५ - कलाविभाग - श्रालेख ६० - चितिकलाविस्तार - आलेख ६१ - ' पदार्थस्य पदार्थचम्'- प्रालेख ६२ - महदुक्थ - पुरुष - महाव्रतात्मक विवस्वान् श्रालेख ६३ - ' सैषा त्रयीविद्या तपति ' - लेख ६४ - अमृत - सत्य - यज्ञ - विराड् - भावानुगत प्रजापति- श्रालेख ६५ - आत्मा - महिमा - शरीरानुगत प्रजापति - आलेख ' ६६ - रस - बल - अभ्वानुगत प्रजापति - लेख ६७– मनः प्राण - वागनुगत प्रजापति - श्रालेख ६८ - नभ्य - उद्गीथ - सर्वानुगत प्रजापति - आलेख ६६– उक्थ - ब्रह्म- सामानुगत प्रजापति - श्रालेख ७० - ज्ञातृ - ज्ञान - ज्ञेय - विभाग - आलेख ७१ - सत्य - नभ्य - सर्व- उद्गीथ प्रजापतिचतुष्टयी आलेख -७२ - अग्निवेदविवर्च - आलेख ७३ - आत्मा- प्रतिष्ठा ज्योतिर्वेद - - श्रालेख ७४ - रस- छन्द - वितान - वेद - लेख ७५- सच्चिदानन्दब्रह्मात्मक - वेदस्वरूप आलेख ७६ - मनोमयी आत्मवेदत्रयी - आलेख.. २२
पृष्ठ 26
पाठ पढ़ें पाठ छिपाएँ
विषयसूची ७७ – प्राणमयी ज्योतिर्वेदत्रयी - आलेख ७८ - वाङ मयी प्रतिष्ठावेदत्रयी -आलेख ७६- श्रात्मवेदात्मक - आनन्द - आलेख ८० - प्रतिष्ठावेदात्मिका सत्ता - आलेख ८१ - ज्योतिर्वेदात्मिका चेतना - लेख ८२ – वस्तु - तन्मूर्त्ति - त - मण्डल - लक्षण ' पदार्थ ' -आलेख ८३– हृदय - विष्कम्भ - परिणाह - लक्षण ऋग्वेद - आलेख ८४ - शाक्कर - वैरूप - रथन्तर - सामत्रयी - आलेख ८५ - रैवत - वैराज - बृहत् सामत्रयी - आलेख ८६- दशगर्भं ' चरसे धापयन्ते ' लेख ८७- पूर्व - उत्तर - मध्य - मण्डललक्षण सामवेद - आलेख ८८ - गुण - अणु - रेणु - महाभूतात्मक - आलेख ८६ - उत्क्रमण - विक्रमण व्युत्क्रमण - श्रालेख ६० - निवेदत्रयी - लेख ६१ - ' सर्वे वेदा: ' आलेख ६२ –सामवितानपरम्पराक्रम - आलेख ६३ – त्रिपृष्ठात्मक साम - आलेख ६४ - ' पञ्चविधं सामोपासीत ' -आलेख ६५ – ‘ सर्वं भृग्वङ्गिरोमयम् ' - आलेख ६६ - ‘ सर्वमापोमयं जगत् ' - आलेख ६७ – ब्रह्म - पारावत - दृश्य - स्पृश्य - पृष्ठचतुष्टयी - आलेख ६८ - ' अपां पृष्ठे सप्तविधं सामोपासीत ' - आलेख ६६ - ' शब्द वापञ्चे सप्तविधं सामोपासीत ' - आलेख १०० - ' सच्चवाक्प्रपञ्चे सप्तविधं सामोपासीत ' - आलेख १०१ - ग्रहपुरुश्चरणयाज्या - स्तोत्र - शस्त्रानुगता वेदत्रयी - आलेख १०२ - मूर्ति: - तेजः गतिः तद्रूपा तच्ववेदत्रयी - आलेख १०३ - मूलवेदत्रयी - आलेख २३ :
पृष्ठ 27
पाठ पढ़ें पाठ छिपाएँ
विषयसूची १०४ - वेदशाखाविभाग - आलेख १०५ - अदितिविवर्त्तस्त्ररूप दिग्दर्शन - आलेख १०६-- पृथिव्यन्तरिक्षंद्य । दिशः- लेख १०७ - ऋक् - यजुः - साम - अथर्वाण: -आलेख १०८ - मूलवेदात्मिका अदितिसंहिता - आलेख १०६ - अग्निवाय्वादित्यसोमानुगता मूलवेदचतुष्टयी - प्रालेख ११० -मूल- तूल- वेद - विवर्त्तभावाः - आलेख १११ - शब्दात्मक- पौरुषेय - वेदविभागसंकलन - आलेख ११२ - सोमाग्नियमादित्यानुगत- पूर्णस्थान - आलेख ' ' ११३ – विकासमात्रास्त्ररूपविश्लेषक आलेख ११४ - चतु: संस्थानानुगत विकास विव - लेख ११५ - ' नवो नवो भवति जायमानः ' - श्रालेख ११६ – नवाक्षरानुगत न्यून विराट् - आलेख ११७- वेदसम्मतशून्य बितान - लेख ११८ मतान्तरेण - वेदसम्मत शून्यवितान - लेख ११६ - लोकसम्मत शून्य वितान - श्रालेख १२० - भृग्वङ्गिरोमूर्ति - सूर्य्य - आलेख १२१ -- विकासमात्रासमन्वय - आलेख १२२ - विकास स्वरूप प्रदर्शक प्रथम आलेख ( क ) १२३– विकासस्वरूप प्रदर्शक द्वितीय - आलेख ( ख ) १२४ - विकास स्वरूपप्रदर्शक तृतीय - आलेख ( ग ) १२५ - विकासस्वरूपप्रदर्शक चतुर्थ - आलेख ( घ ) १२६ – विकासस्वरूपप्रदर्शक पञ्चम - आलेख ( ङ ) १२७- विकासस्वरूपप्रदर्शक षष्ठ - आलेख ( च ) ः इति - उपनिषद्विज्ञानभाष्यभूमिका - द्वितीयखण्डान्तर्गता लेख सूची २४
पृष्ठ 28
पाठ पढ़ें पाठ छिपाएँ
श्री: उपनिषद्विज्ञानभाष्यभूमिका - द्वितीयखण्डस्य संक्षिप्ता - विषयसूची -- * --१ - वेद का मौलिक रूप ( प्रथमस्तम्भ ) २ - तात्विक वेद, और प्रमाणवाद ( द्वितीयस्तम्भ ) ३ - प्राजापत्यवेदमहिमा ( तृतीयस्तम्भ ) ४ - अपौरुषेयवेद का तान्त्रिक इतिवृत्त ( चतुर्थस्तम्भ ) ६ - श्रग्निविकासरहस्य, और वेदशाखा विभाग ( पञ्चमस्तम्भ ) - परिशिष्टविभाग सैषा पञ्चस्तम्भात्मिका द्वितीयखण्डानुगता उपनिषद्भुमिका - * --( १ ) - ' वेद का मौलिक स्वरूप ' नामक प्रथमस्तम्भान्तर्गत अवान्तर परिच्छेद-१- माङ्गलिक संस्मरस निर्वचनशैली ४ - वेद भाष्यकार श्रीसायण - महीधर-आचार्य की आलोच्या भाष्यशैली ५- वेदार्थ परिशीलनसाफल्योपक्रम ६ - मौलिक वेद का इतिवृत्त १ | १२ - अनन्तंवेद का दुर्विज्ञेय इतिवृत्त १२- अनन्तवेद का विज्ञेय इतिवृत्त १४ - प्रतिपदनुचरमाव १५ - सावित्राग्नि का स्वरूपलक्ष ए १७- आत्ममहिमालक्षण द्विविध वेद २ - भूमिका प्रथमखण्ड का सिंहावलोकन ३- वेदव्याख्याता यास्क की आलोच्या १ I १६ - ०० प्रिलक्षण प्राजापत्यवेद ६ ७ १८ - वेदविद्या के संस्थाविभाग ८ १६ - वेद का ' ऋषि ' पदार्थ ७ - वेदार्थ की समस्यापूर्णा जटिलता-११ ८- महर्षि भरद्वाज के अनन्तवेद २० - अमल्लक्षण ऋषि ' ' ( १ ) .२ २१- रोचनालक्षण ' ऋषि ' ( २ ) - सावित्राग्नि के तटस्थ लक्षण १२ १०-० - सावित्राग्निमूलक ग्रहोपग्रह भाव ११- अनन्त वेद का विज्ञेय इतिवृत्त २२ द्रष्ट लक्षण ' ऋषि ' ( ३ ) १५ २३ - वक्तृ लक्षण ' ऋषि ' ( ४ ) १६ उपरतश्चाय प्रथमस्तम्भः -१-२५
पृष्ठ 29
पाठ पढ़ें पाठ छिपाएँ
( २ ) - ' तात्विक वेद और प्रमाणवाद ' नामक द्वितीय स्तम्भान्तर्गत श्रवान्तर परिच्छेद-१- प्रचलित श्रद्धा विश्वास, और २६ - भृग्वङ्गिरा, और वेदत्रयी प्रमाणवाद १४ २७ - प्राजापत्य सृष्टि, और वेदत्रयी २ - ऋकृतत्त्व, और अग्नि ६४ २८ - त्रैलोक्यरस, और वेदत्रयी ३ - अग्नितत्त्व, और ऋक - साम १५ २६ - माता - पिता, और ऋक्साम ४ - यज्ञप्रजापति, और त्रयीवेद ५- पाञ्जजन्य अग्नि, और त्रयीवेद ६ - मनःप्राणवाङ्मय आत्मा और त्रयीवेद ७- सर्वेन्द्रियमन, और त्रयीवेद ८- मनोमय गन्धर्व, और ऋक्साम-रूपा अप्सरा ६ —– गरुत्मान् सुपर्ण, और त्रयीवेद ६७ ३० - भैषज्य यज्ञ, और वेदत्रयी ६८ ३१ - व्याहृतित्रयी, और वेदत्रयी ६८ ३२ - अज पृश्नि, और ब्रह्मनिःश्वसितवेद ६६ ३३ - महाव्रत, और वेदत्रयी ३४ - चतुष्पाद साम, और वेदचतुष्टयी ६६ ३५ - उद्गीथ, और वेदत्रयी १०० ३६ - देवमधु, और वेदत्रयी १० - नत्राहयज्ञ, और त्रयीवेद ११ - दिव्यस्कम्भ, और त्रयीवेद १२ - अध्यात्मसंस्था, और त्रयीवेद १३ - उदूढत्रिलोकी, और त्रयीवेद १४ - सम्वत्सरप्रजापति, और त्रयीवेद " १५ - स्वायम्भुवी वाकू, और त्रयीवेद १६ – सूर्य्यसंस्था, और त्रयीवेद १७- कृष्णमृग, और त्रयीवेद १८ - आत्मसमुद्र, और वेदत्रयी १६ - ' सा ' - ' अम ' -, और सामवेद १०१ ३७- अमृतरस, और वेदत्रयी १०१ ३८ - अधिदैवत, और वेदत्रयी १०१ ३६ - अध्यात्म, और वैदत्रयी १०२ ४० - सर्वोङ्कार, और वेदत्रयी १०२ | ४१ - विस्रस्त प्रजापति, और त्रयीवेद १०४ | ४२ - वाङ्मय भुतात्मा, और त्रयीवेद १०५ ४३ - महन्मूत्तिरव्यय, और त्रयीवेद १०५ ४४- अमितौजा पर्य्यङ्क, और त्रयीवेद ' ११३ | ४५ - देवमानुषपित्र्यभाव, और वेदत्रयी ११४ | ४६ - प्राजापत्य त्रिवृद्भाव, और त्रयीवेद ११५ ४७ -सावित्री के तीन पाद, और त्रयीवेद ११६ ४८ - विश्व संस्थाविभाग, और वेद २०- देवात्मा, और वेदत्रयी २१ - ब्रह्म - क्षत्र, और ऋक्रू - साम २२ - इन्द्र, और ऋक् - साम ११७ ४६ - देवत्रयी, और यज्ञात्मक वेद २३- दिक् - काल - देश - वर्ण, और वेदत्रयी ११८ ५०- सर्व प्रसृति, और त्रयीवेद २४ - द्यावापृथिवी, और ऋक - साम ११८ ५१ - सम्वत्सर प्रजापति, और त्रयीवेद ' २५ लोकचतुष्टयी, और वेदचतुष्टयी ... ११६ उपरतश्चायं द्वितीयस्तम्भः -२-२६
पृष्ठ 30
पाठ पढ़ें पाठ छिपाएँ
... विषयसूची ( ३ ) - ' प्राजापत्य वेदमहिमा ' नामक तृतीयस्तम्भ के अवान्तर परिच्छेद– १ - चतुष्कल प्रजापति - अमृत - मत्य - प्रजापति " ... ३- सम्बत्सराग्नि का मूलरूप ४ - प्राजापत्यवेद के दर्शन ५ - सम्बत्सर वेला, और हिरण्मयाण्ड ६ - सम्वत्सर, और विकर्षणविज्ञान... ७- यज्ञप्रजापति, और लोकवितान १४२ | २३ - प्रतिष्ठा, यज्ञ, और काल २०८ १ ३ | २४ - बृहत्सर्थ्य, और बृहतीछन्द २०६ १४६ २५ - सप्तच्छन्दोवितान २१० १५१ २६ - चतुर्द्धा व्यूहन २१३ १५३ २७ - प्रजापति की सात अभिव्यक्तियाँ २१४ १५५ २८ - आध्यात्मिक प्रजापति २१७ १६१ | २६ - अहरहर्ययज्ञ २२१ ८-- त्रैलोक्य - लोकी, और वेदवितान १६५ ३० - अहोरात्र- यूहन प्रक्रिया २२२ - श्रग्निभ्रातरः १७२ ३१ - सम्वत्सर, और पुरुष का समतुलन २२६ ( क ) १०- अग्निवंश की सपिण्डता १७२ ३२ - विराडग्नि २२८ ११ - व्याहृति, और पञ्चाक्षररहस्य १७६ || ३३ - अर्काग्नि का बितान २२६ १२- सर्वत्सर, और सम्बत्सर १८० ३४ - ब्रह्म - क्षत्र - मूर्त्ति अग्नि २३६ १३ - सुत्या, एवं चित्या कर्म्म १८६ ३५ - नवाह यज्ञ का वितान २३७ १४ - पाङ्क्तो वै यज्ञः १८८ ३६ - भूतद्रव्यात्मक प्रजापति २३६ १५ - गौजनक अग्निहोत्र १६- शाकायनि महर्षि का १७ - हिरण्यगर्भमहर्षि का १८ - शाटधाय निमहर्षि का अग्नि १६ - सम् - वसन्, और सम्वत्सर २० - रूप - प्राण - शरीर - विवर्त्त २१ - कृष्णाजिन, और पुष्करपर्ण २२ ( क ) - ' अपां शरः ' २२ ( ख ) -- बृहती छन्द का वितान और चयनयज्ञरहस्य ... १६२ | ३७ - प्रजापति की प्रजाचतुष्टयी १६३ ३८ - त्रयीविद्या, और भूतदृष्टि १६४ | ३६- छन्दांसि, और त्रयीवेद् १६४ ४० - बृहतीछन्द के तीन वितान १६६ | ४१ - वितानवेदत्रयी, और बृहत छन्द २५१ १६७ | ४२ - बृहतीसहस्र, और तत्त्ववेदसंस्था २५२ १६६ | ४३ - वेदसंख्यापरिज्ञानोपयोग, और अभियज्ञ २५४ २०२ | ४४ - वेदव्यूहनप्रक्रिया, और चयनयज्ञ २५८ २०५ * -प्रकरणोपसंहार २६८ उपरतश्चायं तृतीयस्तम्भः ३ २४१ ... २४२ २४७ २५० २७