आरण्यकम् Aranyakam
आरण्यकम् । -श्रीमद्वासुदेव मिश्रशर्म्मा। ग्रामे॒ मन॑सा स्वाध्या॒यमधी॑यीत॒ दिवा॒ नक्त॑व्वेँ॒ति ह॑स्मा॒ह शौ॒च आह्ने॒य उ॒तार॑ण्ये॒बल॑ उ॒त वा॒चोत तिष्ठ॑न्नु॒त व्रज॑न्नु॒तासी॑न उ॒त शया॑नो॒ऽधीयी॑तै॒व स्वाध्या॒यन्तप॑स्वी॒ पुण्यो॑ भवति॒ । तैत्तिरीयारण्यकम् २.१२ ।। अरण्याध्ययनादेतदारण्यकमितीर्यते ।अरण्ये तदधीयीतेत्येवं वाक्यं प्रवक्ष्यते ।। वैदिक यज्ञों के अन्तरतम अर्थवत्ता, वास्तविक वैज्ञानिक रहस्यों के सन्धान के लिए जिस शास्त्र का प्रकाश हुआ, उसे आरण्यक कहते हैँ । समूह […]
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