Author name: Dwaipayan Pradhan

प्रत्यक्चैतन्य – वासुदेव मिश्रशर्म्मा

प्रत्यक्चैतन्य – MECHANISM OF CONSCIOUSNESS. वासुदेव मिश्रशर्म्मा चेतनतत्त्व (consciousness) क्या है ? सेन्द्रियं चेतन द्रव्यं निरिन्द्रियम् अचेतनम् – जिसमें इन्द्रिय है, वह चेतन है । जिसमें इन्द्रिय नहीं है, वह अचेतन है । चेतना एवं जीवन एकार्थक नहीं है । प्राणधारणं जीवनम् – शक्ति का एक उत्स किसी शरीर में बद्ध रहकर बाहर के शक्तियों […]

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शिक्षा – वासुदेव मिश्रशर्म्मा

शिक्षा । वासुदेव मिश्रशर्म्मा अध्ययन (अधि+इङ्) का ग्रहण, धारण तथा ब्रह्मयज्ञ के भेद से तीन विभाग किया गया है । गुरुमुख से उच्चारित शब्द का ग्रहण (कण्ठस्थ करना) और स्मृति में उसका धारण (याद रखना) करने के पश्चात उसका पारायण (मनन करना) को ब्रह्मयज्ञ कहते हैँ । वेदाङ्गों में उच्चारणपद्धति का ज्ञान सम्बन्धी उपदेश को

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भाषाविज्ञान

भाषाविज्ञान । -श्रीवासुदेव मिश्रशर्म्मा वाचं देवा उपजीवन्ति विश्वे वाचं गन्धर्वाः पशवो मनुष्याः । तैत्तिरीयब्राह्मणम् ।देव, गन्धर्व, पशु तथा मनुष्य वाक् (वचँ परि॒भाष॑णे – communication) के द्वारा ही जीवनके समीपतम प्रयोजन पूर्ण करने में समर्थ होते हैँ । यहाँ देवा (देवनमिह क्रीडा यथा बालः कन्दुकैर्नित्यमिति हलायुधः – त्रयस्त्रीगंशत् तु एव देवा – शतपथब्राह्मणम् – ३३ quantum

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