आयुर्वेदः – आयुका वेद – सम्पूर्ण रोगमुक्तपद्धति – भाग १
यत्रौषधीः समम्मत राजानः समिताविव ।विप्रः स उच्यते भिषग् रक्षोहामीवचातनः ॥ ऋग्वेदः १०-९७-६ ॥ राजा जिसप्रकार सङ्ग्राममें अपने सैनिकोंके साथ विराजते हैं, उसीप्रकार शल्यादि अष्टतन्त्रज्ञ नाडीविज्ञान विशारद जिस विद्वानपुरुष नाना प्रकारके औषधीगणेंको एकत्रकर उनके साथ प्रतिष्ठित होता है, वह भिषक् (वैद्य) कहलाता है। जैसे राजा दुष्टपुरुषोंके अत्याचारसे प्रजाका रक्षाकरता है, भिषक् रोगजनित पीडाका उपशमकर जनताका कल्याण […]
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