Author name: Dwaipayan Pradhan

पुरुषसूक्त की वर्णव्यवस्था

ऋग्वेद संहिता के दशम मण्डल, सूक्त ९०, ऋचा १२ तथा यजुर्वेद के ३१वें अध्याय के ११वें मन्त्र में कहा गया है कि – ब्रा॒ह्म॒णो॑ऽस्य॒ मुख॑मासीद्बा॒हू रा॑ज॒न्य॑: कृ॒तः । ऊ॒रू तद॑स्य॒ यद्वैश्य॑: प॒द्भ्यां शू॒द्रो अ॑जायत ॥ -ऋग्वेद संहिता १०-९०-१२ उस परम्ब्रह्म का मुख ब्राह्मण था, बाहु के कारण क्षत्रिय बने, उसकी जंघाएं वैश्य हुए तथा पैरों

पुरुषसूक्त की वर्णव्यवस्था Read More »

देवता कौन हैं?

Basudeba Mishra पुरुषसूक्तमें आए यज्ञेनयज्ञमयजन्त देवा: के अर्थ के सम्बन्धमें अनेक भ्रान्तियाँ हैं । वह कौनसा यज्ञ था । देवता कौन हैं । वे यज्ञ द्वारा कैसे यज्ञ का यजन किए । उसका परिणाम क्या हुआ । इसीमें बहुत सारे वैज्ञानिक तथ्य छिपे हुए हैं । यहाँ यज्ञ का अर्थ अग्नि मेँ घृताहुति नहीं है

देवता कौन हैं? Read More »

Interpretation of the fifth सूत्र of ब्रह्मसूत्रम्

A friend wanted a proper interpretation of the fifth सूत्र of ब्रह्मसूत्रम्. Since ALL COMMENTARIES in it are not correct, the proper interpretation is given below. The fifth सूत्र of ब्रह्मसूत्रम् introduces माया through the word ईक्षतेः. In all branches of the Vedas, the word ईक्षत refers to the creation event. For example, गोपथब्राह्मणम् says:

Interpretation of the fifth सूत्र of ब्रह्मसूत्रम् Read More »