वेद में अवतार २ – मत्स्य अवतार
नासदीयसूक्त (ऋग्वेद 10-129) के अनुसार सृष्टि से पूर्व सवकुछ अवात अर्थात् प्राणशून्य (अतः क्रियाशून्य) था । उस समय नार (न+अर) सर्वत्र व्याप्त था । निषेधात्मक अ अक्षर के साथ गत्यात्मक र अक्षर युक्त होनेसे अर शव्द का अर्थ गतिराहित्य है । न अक्षर के द्वारा उसका पुनः निषेध करने से नार शव्द का असामान्य अर्थ […]
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