Essays of gurudeva

वेदों का अपव्याख्यान – “कः” का अर्थ ।

वेदों का अपव्याख्यान – “कः” का अर्थ – श्रीवासुदेवमिश्र शर्म्मा।

इस जगत् प्रपञ्च के उत्पत्ति से पूर्व सर्वप्रथम प्रजापति हिरण्यगर्भ ही विद्यमान थे (मायाध्यक्षात् सिसृक्षोः परमात्मनः समजायत)। वही एक अद्वितीय (वह जगत के धारण, सृजन तथा पालन में अन्यनिरपेक्ष) समग्र उत्पन्न भूतमय जगत् का स्रष्टा (प्रदीप्त दृश्यप्रपञ्चका गर्भ अथवा उत्पत्ति-स्थान) तथा पालक हैं।

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TYPES OF ENTANGLEMENT (आरादुपकारक & संनिपत्योपकारक) – 7.

TYPES OF ENTANGLEMENT (आरादुपकारक & संनिपत्योपकारक) – 7- Shri Basudeba Mishra WHAT IS NOT A DIMENSION Some say: we can specify the time and place of an event in the universe by using three Cartesian coordinates for space and another number for time. This makes space-time four-dimensional. It shows that we can specify time using

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TYPES OF ENTANGLEMENT (आरादुपकारक & संनिपत्योपकारक) – 5.

TYPES OF ENTANGLEMENT (आरादुपकारक & संनिपत्योपकारक) – 5- Shri Basudeba Mishra To explain quantum entanglement, physicists use the concept of quantum superposition – the idea that particles exist in multiple states at the same time. It is wrongly assumed that the particle collapses permanently to one of the states in the superposition on observation. For

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TYPES OF ENTANGLEMENT (आरादुपकारक & संनिपत्योपकारक) – 4

TYPES OF ENTANGLEMENT (आरादुपकारक & संनिपत्योपकारक) – 4. – Shri Basudeba Mishra ON SUPERPOSITION (अध्यास). The word superposition is derived from the Latin word “super”, which means above, and the word “position”, which means place. Superposition was also known since time immemorial. Vedanta uses it profusely (अध्यास – अधिरीश्वरे + आसँ॒ उप॒वेश॑ने). In 1669 Nicolaus

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हिन्दू जीवन पद्धति के ८१ बिन्दु

दक्ष प्रजापति द्वारा श्रेष्ठ जीवन जीने के ८१ बिन्दुओं का निर्धारण दक्ष स्मृति में किया गया है। क्रमशः इनका विवरण दिया जा रहा है- ————— डॉ कामेश्वर उपाध्याय द्वारा रचित पुस्तक “हिन्दू जीवन पद्धति” से प्रचारार्थ उद्धृत। पुस्तक प्राप्त करने का पता निम्नाङ्कित है।प्राप्ति स्थानआचार्य डॉ. कामेश्वर उपाध्याय“देवतायन”, 96, जानकी नगर, पोस्टऑफिस- बजरडीहा, वाराणसी, उत्तरप्रदेशपिनकोड –

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