Essays of gurudeva

ENTANGLEMENT IN THE VEDAS (संयोगः) 1

Entanglement requires at least a pair to share spatial proximity (अविरलदेशत्व) and interacting with or without exchange of energy in such a way that, the description of the state of one particle depends on the state of the other. It is a form of coupling that connects two objects (like the two ends of a rubber string).

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तन्त्र क्या है?

तन्त्र क्या है । तनोति विपुलानर्थान् तन्त्र-मन्त्रसमन्वितान् ।त्राणं च कुरुते यस्मात् तन्त्रमित्यभिधीयते । जिस पद्धति में समस्त विषय का मूल रहस्य का विस्तार करने के पश्चात् (after detailed analysis of the concepts with its derivatives and corollaries), वस्तु तथा उनके तत्व के उपर मनन करने के पश्चात्, जिसके द्वारा हम अभीष्ट फल को प्राप्त करलेते

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EQUALITY OF SEXES IS MEANINGLESS

शम्भुस्वयम्भुहरयो हरिणेक्षणानां येनाक्रियन्त सततं गृहकुम्भदासाः ।वाचामगोचरचरित्रविचित्रितायतस्मै नमो भगवते मकरध्वजाय । शृङ्गारशतकम् । शम्भु – शिव, महादेव । स्वयम्भु – ब्रह्मा । हरि – विष्णु । हरिणेक्षणा – हरिणवत् मनोहर लोचना पार्वती, सरस्वती, श्री देवी । गृहकुम्भदासाः – गृह कुम्भ जल भारवाहक भृत्य – दास । सततम् – निरन्तरक्रिया, उसके पर्याय । जिसने शिव, ब्रह्मा, विष्णु

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माया के स्वरूप और भेद – भाग ६

ब्रह्म ह वा इदमग्र असीत् स्ययंभ्वेकमेव । ….. तस्य श्रान्तस्य तप्तस्य संतप्तस्य ललाटे स्नेहो यदार्द्रमाजायत । तेनानन्दत्तद्ब्रवीन्महद्वै यक्षं सुवेदमविदामह इति । तद्यदब्रवीन्महद्वै यक्षं सुवेदमविदामह इति तस्मात्सुवेदो ऽभवत्तं वा एतं सुवेदं सन्तं स्वेदइत्याचक्षते परोक्षेण … । गोपथब्राह्मणम् । उस स्ययम्भू ब्रह्मने जब सृष्टिकाम हुआ, तो क्रिया की उत्पत्ति हुई । क्रियासे ताप सृष्टि हुआ । अग्नेरापः

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माया के स्वरूप और भेद – भाग ५

स्वायम्भूवा लोकपितामहेन उत्पादकत्वात् रजसोऽतिरेकात् ।कालस्य योगात् नियमाबद्धेन क्षेत्रज्ञयुक्तान् कुरुते विकारान् ॥ ब्रह्माण्ड के प्रत्येक वस्तु एक अन्य का सापेक्ष (relative) है (इयं पृथिवी सर्वेषां भूतानां मध्वस्यै पृथिव्यैसर्वाणि भूतानि मधु …. मधुब्राह्मण । everything is interconnected and interdependent) । कार्य-कारण सम्बन्ध अनादि है । प्रत्येक कार्य का कारण भिन्न है । परन्तु इन वैचित्र्य के मध्यमें

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