श्रीमद्भागवतमहापुराण विषयसूची – ShrimadBhagavatam Index

ShrimadBhagavata Mahapurana, Bhagawat, Bhagavat, Index of contents

।। श्रीहरिः ।।

Bhagavat
श्रीमद्भागवतमहापुराण, ShrimadBhagavatam

।। श्रीहरिः ।।

विषय – सूची

प्रथम खण्ड

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य

१ – देवर्षि नारदकी भक्तिसे भेंट
२ – भक्तिका दुःख दूर करनेके लिये नारदजीका उद्योग
३ – भक्तिके कष्टकी निवृत्ति
४ – गोकर्णोपाख्यान प्रारम्भ
५ – धुन्धुकारीको प्रेतयोनिकी प्राप्ति और उससे उद्धार
६ – सप्ताहयज्ञकी विधि

प्रथम स्कन्ध

१- श्रीसूतजीसे शौनकादि ऋषियोंका प्रश्न
२ – भगवत्कथा और भगवद्भक्तिका माहात्म्य
३ – भगवान्के अवतारोंका वर्णन
४ – महर्षि व्यासका असंतोष
५ – भगवान्के यश – कीर्तनकी महिमा और देवर्षि नारदजीका पूर्वचरित्र
६ – नारदजीके पूर्वचरित्रका शेष भाग
७ – अश्वत्थामाद्वारा द्रौपदीके पुत्रोंका मारा जाना और अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाका मानमर्दन
८ – गर्भमें परीक्षित्की रक्षा , कुन्तीके द्वारा भगवान्की स्तुति और युधिष्ठिरका शोक
९ – युधिष्ठिरादिका भीष्मजीके पास जाना और भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति करते हुएभीष्मजीका प्राणत्याग करना
१० – श्रीकृष्णका द्वारका – गमन
११ – द्वारकामें श्रीकृष्णका राजोचित स्वागत
१२ – परीक्षित्का जन्म
१३ – विदुरजीके उपदेशसे धृतराष्ट्र और गान्धारीका वनमें जाना
१४ – अपशकुन देखकर महाराज युधिष्ठिरका शंका करना और अर्जुनका द्वारकासे लौटना
१५ – कृष्णविरहव्यथित पाण्डवोंका परीक्षित्को राज्य देकर स्वर्ग सिधारना
१६ – परीक्षित्की दिग्विजय तथा धर्म और पृथ्वीका संवाद
१७ – महाराज परीक्षित्वारा कलियुगका दमन
१८ – राजा परीक्षित्को शृंगी ऋषिका शाप
१९ – परीक्षित्का अनशनव्रत और शुकदेवजीका आगमन

द्वितीय स्कन्ध

१ – ध्यान – विधि और भगवान्‌के विराट्स्वरूपका वर्णन
२ – भगवान्के स्थूल और सूक्ष्मरूपोंकी धारणा तथा क्रममुक्ति और सद्योमुक्तिका वर्णन
३ – कामनाओंके अनुसार विभिन्न देवताओंकी उपासना तथा भगवद्भक्तिके प्राधान्यकानिरूपण
४ – राजाका सृष्टिविषयक प्रश्न और शुकदेवजीका कथारम्भ
५ – सृष्टि – वर्णन
६ – विराट्स्वरूपकी विभूतियोंका वर्णन
७ – भगवान्के लीलावतारोंकी कथा
८ – राजा परीक्षित्के विविध प्रश्न
९ – ब्रह्माजीका भगवद्धामदर्शन और भगवान्के द्वारा उन्हें चतुःश्लोकी भागवतका उपदेश
१० – भागवतके दस लक्षण

तृतीय स्कन्ध

१ – उद्धव और विदुरकी भेंट
२ – उद्धवजीद्वारा भगवान्की बाललीलाओंका वर्णन
३ – भगवान्के अन्य लीलाचरित्रोंका वर्णन
४ – उद्धवजीसे विदा होकर विदुरजीका मैत्रेय ऋषिके पास जाना
५- विदुरजीका प्रश्न और मैत्रेयजीका सृष्टिक्रम वर्णन
६ – विराट् शरीरकी उत्पत्ति
७ – विदुरजीके प्रश्न८ – ब्रह्माजीकी उत्पत्ति
९ – ब्रह्माजीद्वारा भगवान्की स्तुति
१० – दस प्रकारकी सृष्टिका वर्णन
११- मन्वन्तरादि कालविभागका वर्णन
१२ – सृष्टिका विस्तार
१३ – वाराह – अवतारकी कथा
१४ – दितिका गर्भधारण१५ – जय – विजयको सनकादिका शाप
१६ – जय – विजयका वैकुण्ठसे पतन
१७ – हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्षका जन्म तथा हिरण्याक्षकी दिग्विजय
१८ – हिरण्याक्षके साथ वराहभगवान्का युद्ध
१९ – हिरण्याक्ष – वध
२० – ब्रह्माजीकी रची हुई अनेक प्रकारकी सृष्टिका वर्णन
२१ – कर्दमजीकी तपस्या और भगवान्‌का वरदान
२२ – देवहूतिके साथ कर्दम प्रजापतिका विवाह
२३- कर्दम और देवहूतिका विहार
२४ – श्रीकपिलदेवजीका जन्म
२५ – देवहूतिका प्रश्न तथा भगवान् कपिलद्वारा भक्तियोगकी महिमाका वर्णन
२६ – महदादि भिन्न – भिन्न तत्त्वोंकी उत्पत्तिका वर्णन
२७ – प्रकृति – पुरुषके विवेकसे मोक्ष प्राप्तिका वर्णन
२८ – अष्टांगयोगकी विधि
२९ – भक्तिका मर्म और कालकी महिमा
३० – देह – गेहमें आसक्त पुरुषोंकी अधोगतिका वर्णन
३१ – मनुष्ययोनिको प्राप्त हुए जीवकी गतिका वर्णन
३२ – धूममार्ग और अर्चिरादि मार्गसे जानेवालोंकी गतिका और भक्तियोगकी उत्कृष्टताका वर्णन
३३ – देवहूतिको तत्त्वज्ञान एवं मोक्षपदकी प्राप्ति

चतुर्थ स्कन्ध

१ – स्वायम्भुव – मनुकी कन्याओंके वंशका वर्णन
२ – भगवान् शिव और दक्ष प्रजापतिका मनोमालिन्य
३- सतीका पिताके यहाँ यज्ञोत्सवमें जानेके लिये आग्रह करना
४ – सतीका अग्निप्रवेश
५ – वीरभद्रकृत दक्षयज्ञविध्वंस और दक्षवध
६- ब्रह्मादि देवताओंका कैलास जाकर श्रीमहादेवजीको मनाना
७ – दक्षयज्ञकी पूर्ति
८ – ध्रुवका वन – गमन
९ – ध्रुवका वर पाकर घर लौटना
१० – उत्तमका मारा जाना , ध्रुवका यक्षोंके साथ युद्ध
११ – स्वायम्भुव – मनुका ध्रुवजीको युद्ध बंद करनेके लिये समझाना
१२ – ध्रुवजीको कुबेरका वरदान और विष्णुलोककी प्राप्ति
१३ – ध्रुववंशका वर्णन , राजा अंगका चरित्र
१४- राजा वेनकी कथा
१५ – महाराज पृथुका आविर्भाव और राज्याभिषेक
१६ – वंदीजनद्वारा महाराज पृथुकी स्तुति
१७ – महाराज पृथुका पृथ्वीपर कुपित होना और पृथ्वीके द्वारा उनकी स्तुति करना
१८- पृथ्वी – दोहन
१९ – महाराज पृथुके सौ अश्वमेध यज्ञ
२० – महाराज पृथुकी यज्ञशालामें श्रीविष्णुभगवान्का प्रादुर्भाव
२१ – महाराज पृथुका अपनी प्रजाको उपदेश
२२ – महाराज पृथुको सनकादिका उपदेश
२३ – राजा पृथुकी तपस्या और परलोकगमन
२४ – पृथुकी वंशपरम्परा और प्रचेताओंको भगवान् रुद्रका उपदेश
२५ – पुरंजनोपाख्यानका प्रारम्भ
२६ – राजा पुरंजनका शिकार खेलने वनमें जाना और रानीका कुपित होना
२७ – पुरंजनपुरीपर चण्डवेगकी चढ़ाई तथा कालकन्याका चरित्र
२८ – पुरंजनको स्त्रीयोनिकी प्राप्ति और अविज्ञातके उपदेशसे उसका मुक्त होना
२९ – पुरंजनोपाख्यानका तात्पर्य
३० – प्रचेताओंको श्रीविष्णुभगवान्का वरदान
३१- प्रचेताओंको श्रीनारदजीका उपदेश और उनका परमपद – लाभ

 पञ्चम स्कन्ध

१ – प्रियव्रत – चरित्र
२ – आग्नीध्र – चरित्र
३ – राजा नाभिका चरित्र
४ – ऋषभदेवजीका राज्यशासन
५ – ऋषभजीका अपने पुत्रोंको उपदेश देना और स्वयं अवधूतवृत्ति ग्रहण करना
६ – ऋषभदेवजीका देहत्याग
७ – भरत – चरित्र
८ – भरतजीका मृगके मोहमें फँसकर मृगयोनिमें जन्म लेना
९ – भरतजीका ब्राह्मणकुलमें जन्म
१० – जडभरत और राजा रहूगणकी भेंट
११ – राजा रहूगणको भरतजीका उपदेश
१२ – रहूगणका प्रश्न और भरतजीका समाधान
१३ – भवाटवीका वर्णन और रहूगणका संशयनाश
१४ – भवाटवीका स्पष्टीकरण
१५ – भरतके वंशका वर्णन
१६ – भुवनकोशका वर्णन
१७ – गंगाजीका विवरण और भगवान् शंकरकृत संकर्षणदेवकी स्तुति
१८ – भिन्न – भिन्न वर्षोंका वर्णन
१९ – किम्पुरुष और भारतवर्षका वर्णन
२० – अन्य छः द्वीपों तथा लोकालोक – पर्वतका वर्णन
२१ – सूर्यके रथ और उसकी गतिका वर्णन
२२ – भिन्न – भिन्न ग्रहोंकी स्थिति और गतिका वर्णन
२३ – शिशुमारचक्रका वर्णन
२४ – राहु आदिकी स्थिति , अतलादि नीचेके लोकोंका वर्णन
२५ – श्रीसङ्कर्षणदेवका विवरण और स्तुति
२६ – नरकोंकी विभिन्न गतियोंका वर्णन

षष्ठ स्कन्ध

 १ – अजामिलोपाख्यानका प्रारम्भ
२ – विष्णुदूतोंद्वारा भागवतधर्म – निरूपण और अजामिलका परमधामगमन
३ – यम और यमदूतोंका संवाद
४ – दक्षके द्वारा भगवान्की स्तुति और भगवान्का प्रादुर्भाव
५ – श्रीनारदजीके उपदेशसे दक्षपुत्रोंकी विरक्ति तथा नारदजीको दक्षका शाप
६ – दक्षप्रजापतिकी साठ कन्याओंके वंशका विवरण
७ – बृहस्पतिजीके द्वारा देवताओंका त्याग और विश्वरूपका देवगुरुके रूपमें वरण
८ – नारायणकवचका उपदेश
९ – विश्वरूपका वध , वृत्रासुरद्वारा देवताओंकी हार और भगवान्की प्रेरणासे देवताओंका दधीचि ऋषिके पास जाना
१० – देवताओंद्वारा दधीचि ऋषिकी अस्थियोंसे वज्रनिर्माण और वृत्रासुरकी सेनापर आक्रमण
११ – वृत्रासुरकी वीरवाणी और भगवत्प्राप्ति
१२ – वृत्रासुरका वध
१३ – इन्द्रपर ब्रह्महत्याका आक्रमण
१४ – वृत्रासुरका पूर्वचरित्र
१५ – चित्रकेतुको अंगिरा और नारदजीका उपदेश
१६ – चित्रकेतुका वैराग्य तथा संकर्षणदेवके दर्शन
१७ – चित्रकेतुको पार्वतीजीका शाप
१८ – अदिति और दितिकी सन्तानोंकी तथा मरुद्गणोंकी उत्पत्तिका वर्णन
१९ – पुंसवन – व्रतकी विधि

सप्तम स्कन्ध

१ – नारद – युधिष्ठिर – संवाद और जय – विजयकी कथा
२ – हिरण्याक्षका वध होनेपर हिरण्यकशिपुका अपनी माता और कुटुम्बियोंको समझाना
३ – हिरण्यकशिपुकी तपस्या और वरप्राप्ति
४- हिरण्यकशिपुके अत्याचार और प्रह्लादके गुणोंका वर्णन
५ – हिरण्यकशिपुके द्वारा प्रह्लादजीके वधका प्रयत्न
६ – प्रह्लादजीका असुर – बालकोंको उपदेश
७ – प्रह्लादजीद्वारा माताके गर्भ में प्राप्त हुए नारदजीके उपदेशका वर्णन
८ – नृसिंहभगवान्का प्रादुर्भाव , हिरण्यकशिपुका वध एवं ब्रह्मादि देवताओं द्वारा भगवान्की स्तुति
९ – प्रह्लादजीके द्वारा नृसिंहभगवान्की स्तुति
१० – प्रह्लादजीके राज्याभिषेक और त्रिपुरदहनकी कथा
११ – मानवधर्म , वर्णधर्म और स्त्रीधर्मका निरूपण
१२ – ब्रह्मचर्य और वानप्रस्थआश्रमोंके नियम
१३ – यतिधर्मका निरूपण और अवधूत – प्रह्लाद – संवाद
१४ – गृहस्थसम्बन्धी सदाचार
१५ – गृहस्थोंके लिये मोक्षधर्मका वर्णन

अष्टम स्कन्ध

१- मन्वन्तरोंका वर्णन
२- ग्राहके द्वारा गजेन्द्रका पकड़ा जाना
३ – गजेन्द्रके द्वारा भगवान्की स्तुति और उसका संकटसे मुक्त होना
४ – गज और ग्राहका पूर्वचरित्र तथा उनका उद्धार
५ – देवताओंका ब्रह्माजीके पास जाना और ब्रह्माकृत भगवान्की स्तुति
६ – देवताओं और दैत्योंका मिलकर समुद्रमन्थनके लिये उद्योग करना
७ – समुद्रमन्थनका आरम्भ और भगवान् शंकरका विषपान
८ – समुद्रसे अमृतका प्रकट होना और भगवान्का मोहिनी – अवतार ग्रहण करना
९ – मोहिनी – रूपसे भगवान्के द्वारा अमृत बाँटा जाना
१० – देवासुर – संग्राम११ – देवासुर – संग्रामकी समाप्ति
१२ – मोहिनीरूपको देखकर महादेवजीका मोहित होना
१३- आगामी सात मन्वन्तरोंका वर्णन
१४ – मनु आदिके पृथक् – पृथक् कर्मोंका निरूपण
१५ – राजा बलिकी स्वर्गपर विजय
१६ – कश्यपजीके द्वारा अदितिको पयोव्रतका उपदेश
१७ – भगवान्का प्रकट होकर अदितिको वर देना
१८ – वामनभगवान्का प्रकट होकर राजा बलिकी यज्ञशालामें पधारना
१९ – भगवान् वामनका बलिसे तीन पग पृथ्वी माँगना , बलिका वचन देना और शुक्राचार्यजीका उन्हें रोकना
२० – भगवान् वामनजीका विरारूप होकर दो ही पगसे पृथ्वी और स्वर्गको नाप लेना
२१ – बलिका बाँधा जाना
२२ – बलिके द्वारा भगवान्की स्तुति और भगवान्का उसपर प्रसन्न होना
२३ – बलिका बन्धनसे छूटकर सुतललोकको जाना
२४ – भगवान्के मत्स्यावतारकी कथा 

द्वितीय खण्ड

नवम स्कन्ध

१ – वैवस्वत मनुके पुत्र राजा सुद्युम्नकी कथा
२ – पृषध्र आदि मनुके पाँच पुत्रोंका वंश
३ – महर्षि च्यवन और सुकन्याका चरित्र , राजा शर्यातिका वंश
४ – नाभाग और अम्बरीषकी कथा
५ – दुर्वासाजीकी दुःखनिवृत्ति६ – इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन , मान्धाता और सौभरि ऋषिकी कथा
७- राजा त्रिशंकु और हरिश्चन्द्रकी कथा
८- सगर- चरित्र
९ – भगीरथ – चरित्र और गंगावतरण
१० – भगवान् श्रीरामकी लीलाओंका वर्णन
११ – भगवान् श्रीरामकी शेष लीलाओंका वर्णन
१२ – इक्ष्वाकुवंशके शेष राजाओंका वर्णन
१३ – राजा निमिके वंशका वर्णन
१४ – चन्द्रवंशका वर्णन
१५ – ऋचीक , जमदग्नि और परशुरामजीका चरित्र
१६ – परशुरामजीके द्वारा क्षत्रिय – संहार और विश्वामित्रजीके वंशकी कथा
१७ – क्षत्रवृद्ध , रजि आदि राजाओंके वंशका वर्णन१८ – ययाति – चरित्र
१९ – ययातिका गृहत्याग१०- पूरुके वंश , राजा दुष्यन्त और भरतके चरित्रका वर्णन
२१ – भरतवंशका वर्णन , राजा रन्तिदेवकी कथा
२२ – पांचाल , कौरव और मगधदेशीय राजाओंके वंशका वर्णन
२३ – अनु , द्रुह्यु , तुर्वसु और यदुके वंशका वर्णन
२४ – विदर्भके वंशका वर्णन

दशम स्कन्ध ( पूर्वार्ध )

१ – भगवान्के द्वारा पृथ्वीको आश्वासन , वसुदेव – देवकीका विवाह और कंसके द्वारा देवकीके छः पुत्रोंकी हत्या
२ – भगवान्का गर्भ – प्रवेश और देवताओंद्वारा गर्भस्तुति
३ – भगवान् श्रीकृष्णका प्राकट्य
४ – कंसके हाथसे छूटकर योगमायाका आकाशमें जाकर भविष्यवाणी करना
५ – गोकुलमें भगवान्का जन्ममहोत्सव
६ – पूतना – उद्धार
७ – शकट – भंजन और तृणावर्त – उद्धार८ – नामकरण – संस्कार और बाललीला
९ – श्रीकृष्णका ऊखलसे बाँधा जाना
१० – यमलार्जुनका उद्धार
११ – गोकुलसे वृन्दावन जाना तथा वत्सासुर और बकासुरका उद्धार१२- अघासुरका उद्धार
१३ – ब्रह्माजीका मोह और उसका नाश१४ – ब्रह्माजीके द्वारा भगवान्की स्तुति
१५ – धेनुकासुरका उद्धार और ग्वालबालोंको कालियनागके विषसे बचाना
१६ – कालियपर कृपा
१७ – कालियके कालियदहमें आनेकी कथा तथा भगवान्का व्रजवासियोंको दावानलसे बचाना
१८ – प्रलम्बासुर – उद्धार
१९ – गौओं और गोपोंको दावानलसे बचाना
२० – वर्षा और शरद्ऋतुका वर्णन
२१ – वेणुगीत
२२ – चीरहरण
२३ – यज्ञपत्नियोंपर कृपा
२४ – इन्द्रयज्ञ – निवारण
२५ – गोवर्धनधारण
२६ – नन्दबाबासे गोपोंकी श्रीकृष्णके प्रभावके विषयमें बातचीत

२७- श्रीकृष्णका अभिषेक २७-२
२८ – वरुणलोकसे नन्दजीको छुड़ाकर लाना
२९ – रासलीलाका आरम्भ
३० – श्रीकृष्णके विरहमें गोपियोंकी दशा
३१ – गोपिकागीत
३२ – भगवान्का प्रकट होकर गोपियोंको सान्त्वना देना
३३- महारास 
३४ – सुदर्शन और शंखचूडका उद्धार
३५ – युगलगीत
३६ – अरिष्टासुरका उद्धार और कंसका श्रीअक्रूरजीको व्रजमें भेजना
३७ – केशी और व्योमासुरका उद्धार तथा नारदजीके द्वारा भगवान्की स्तुति
३८ – अक्रूरजीकी व्रजयात्रा
३९ – श्रीकृष्ण – बलरामका मथुरागमन
४० – अक्रूरजीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति
४१ – श्रीकृष्णका मथुराजीमें प्रवेश
४२ – कुब्जापर कृपा , धनुषभंग और कंसकी घबड़ाहट
४३ – कुवलयापीड़का उद्धार और अखाड़ेमें प्रवेश
४४ – चाणूर , मुष्टिक आदि पहलवानोंका तथा कंसका उद्धार
४५ – श्रीकृष्ण – बलरामका यज्ञोपवीत और गुरुकुल प्रवेश
४६ – उद्धवजीकी व्रजयात्रा
४७ – उद्धव तथा गोपियोंकी बातचीत और भ्रमरगीत
४८ – भगवान्का कुब्जा और अक्रूरजीके घर जाना
४९ – अक्रूरजीका हस्तिनापुर जाना

दशम स्कन्ध ( उत्तरार्ध )

५० – जरासन्धसे युद्ध और द्वारकापुरीका निर्माण
५१ – कालयवनका भस्म होना , मुचुकुन्दकी कथा
५२ – द्वारकागमन , श्रीबलरामजीका विवाह तथा श्रीकृष्णके पास रुक्मिणीजीका सन्देशा लेकर ब्राह्मणका आना
५३ – रुक्मिणीहरण
५४ – शिशुपालके साथी राजाओंकी और रुक्मीकी हार तथा श्रीकृष्ण – रुक्मिणी – विवाह
५५ – प्रद्युम्नका जन्म और शम्बरासुरका वध
५६ – स्यमन्तकमणिकी कथा , जाम्बवती और सत्यभामाके साथ श्रीकृष्णका विवाह
५७ – स्यमन्तक – हरण , शतधन्वाका उद्धार और अक्रूरजीको फिरसे द्वारका बुलाना
५८ – भगवान् श्रीकृष्णके अन्यान्य विवाहोंकी कथा
५९ – भौमासुरका उद्धार और सोलह हजार एक सौ राजकन्याओंके साथ भगवान्का विवाह
६० – श्रीकृष्ण – रुक्मिणी – संवाद
६१ – भगवान्की सन्ततिका वर्णन तथा अनिरुद्धके विवाहमें रुक्मीका मारा जाना
६२ – ऊषा – अनिरुद्ध – मिलन
६३ – भगवान् श्रीकृष्णके साथ बाणासुरका युद्ध
६४ – नृग राजाकी कथा
६५ – श्रीबलरामजीका व्रजगमन 
६६ – पौण्ड्रक और काशिराजका उद्धार
६७ – द्विविदका उद्धार
६८ – कौरवोंपर बलरामजीका कोप और साम्बका विवाह
६९ – देवर्षि नारदजीका भगवान्की गृहचर्या देखना
७० – भगवान् श्रीकृष्णकी नित्यचर्या और उनके पास जरासन्धके कैदी राजाओंके दूतका आना
७१ – श्रीकृष्णभगवान्का इन्द्रप्रस्थ पधारना
७२ – पाण्डवोंके राजसूययज्ञका आयोजन और जरासन्धका उद्धार
७३ – जरासन्धके जेलसे छूटे हुए राजाओंकी विदाई और भगवान्‌का इन्द्रप्रस्थ लौट आना
७४ – भगवान्की अग्रपूजा और शिशुपालका उद्धार
७५ – राजसूययज्ञकी पूर्ति और दुर्योधनका अपमान
७६ – शाल्वके साथ यादवोंका युद्ध
७७ – शाल्व – उद्धार
७८ – दन्तवक्त्र और विदूरथका उद्धार तथा तीर्थयात्रामें बलरामजीके हाथसे सूतजीका वध
७९ – बल्वलका उद्धार और बलरामजीकी तीर्थयात्रा
८० – श्रीकृष्णके द्वारा सुदामाजीका स्वागत
८१ – सुदामाजीको ऐश्वर्यकी प्राप्ति
८२ – भगवान् श्रीकृष्ण – बलरामसे गोप – गोपियोंकी भेंट
८३ – भगवान्की पटरानियोंके साथ द्रौपदीकी बातचीत
८४ – वसुदेवजीका यज्ञोत्सव
८५ – श्रीभगवान्के द्वारा वसुदेवजीको ब्रह्मज्ञानका उपदेश तथा देवकीजीके छः पुत्रोंको लौटा लाना
८६ – सुभद्राहरण और भगवान्का मिथिलापुरीमें राजा जनक और श्रुतदेव ब्राह्मणके घर एक ही साथ जाना
८७ – वेदस्तुति
८८ – शिवजीका संकटमोचन
८९ – भृगुजीके द्वारा त्रिदेवोंकी परीक्षा तथा भगवान्‌का मरे हुए ब्राह्मण – बालकोंको वापस लाना
९० – भगवान् श्रीकृष्णके लीला – विहारका वर्णन

एकादश स्कन्ध

१ – यदुवंशको ऋषियोंका शाप
२- वसुदेवजीके पास श्रीनारदजीका आना और उन्हें राजा जनक तथा नौ योगीश्वरोंका संवाद सुनाना
३ – माया , मायासे पार होनेके उपाय तथा ब्रह्म और कर्मयोगका निरूपण
४ – भगवान्के अवतारोंका वर्णन 
५ – भक्तिहीन पुरुषोंकी गति और भगवान्की पूजाविधिका वर्णन
६ – देवताओंकी भगवान्से स्वधाम सिधारनेके लिये प्रार्थना तथा यादवोंको प्रभासक्षेत्र जानेकी तैयारी करते देखकर उद्धवका भगवान्के पास आना
७ – अवधूतोपाख्यान — पृथ्वीसे लेकर कबूतरतक आठ गुरुओंकी कथा
८ – अवधूतोपाख्यान — अजगरसे
९ – अवधूतोपाख्यान — कुररसे लेकर पिंगलातक नौ गुरुओंकी कथा लेकर भृंगीतक सात गुरुओंकी कथा

१० – लौकिक तथा पारलौकिक भोगोंकी असारताका निरूपण
११ – बद्ध , मुक्त और भक्तजनोंके लक्षण
१२ – सत्संगकी महिमा और कर्म तथा कर्मत्यागकी विधि
१३ – हंसरूपसे सनकादिको दिये हुए उपदेशका वर्णन
१४ – भक्तियोगकी महिमा तथा ध्यानविधिका वर्णन
१५ – भिन्न – भिन्न सिद्धियोंके नाम और लक्षण
१६ – भगवान्की विभूतियोंका वर्णन
१७ – वर्णाश्रम – धर्म – निरूपण
१८ – वानप्रस्थ और संन्यासीके धर्म
१९ – भक्ति , ज्ञान और यम – नियमादि साधनोंका वर्णन२० – ज्ञानयोग , कर्मयोग और भक्तियोग
२१ – गुण – दोष व्यवस्थाका स्वरूप और रहस्य
२२ – तत्त्वोंकी संख्या और पुरुष – प्रकृति – विवेक
२३ – एक तितिक्षु ब्राह्मणका इतिहास
२४ – सांख्ययोग
२५ – तीनों गुणोंकी वृत्तियोंका निरूपण
२६ – पुरूरवाकी वैराग्योक्ति
२७ – क्रियायोगका वर्णन
२८ – परमार्थनिरूपण
२९ – भागवतधर्मोंका निरूपण और उद्धवजीका बदरिकाश्रमगमन
३० – यदुकुलका संहार३१ – श्रीभगवान्का स्वधामगमन

द्वादश स्कन्ध

१ – कलियुगके राजवंशोंका वर्णन
२ – कलियुगके धर्म
३ – राज्य , युगधर्म और कलियुगके दोषोंसे बचनेका उपाय – नामसंकीर्तन
४ – चार प्रकारके प्रलय
५ – श्रीशुकदेवजीका अन्तिम उपदेश 
६ – परीक्षित्की परमगति , जनमेजयका सर्पसत्र और वेदोंके शाखाभेद
७ – अथर्ववेदकी शाखाएँ और पुराणोंके लक्षण
८ – मार्कण्डेयजीकी तपस्या और वर – प्राप्ति
९ – मार्कण्डेयजीका माया – दर्शन
१० – मार्कण्डेयजीको भगवान् शंकरका वरदान
११ – भगवान्के अंग , उपांग और आयुधोंका रहस्य तथा विभिन्न सूर्यगणोंका वर्णन
१२- श्रीमद्भागवतकी संक्षिप्त विषय – सूची
१३ – विभिन्न पुराणोंकी श्लोक – संख्या और श्रीमद्भागवतकी महिमा श्रीमद्भागवतमाहात्म्य

१ – परीक्षित् और वज्रनाभका समागम , शाण्डिल्य – मुनिके मुखसे भगवान्की लीलाके रहस्य और व्रजभूमिके महत्त्वका वर्णन २ – यमुना और श्रीकृष्णपत्नियोंका संवाद , कीर्तनोत्सवमें उद्धवजीका प्रकट होना ३ – श्रीमद्भागवतकी परम्परा और उसका माहात्म्य , भागवतश्रवणसे श्रोताओंको भगवद्धामकी प्राप्ति ४ – श्रीमद्भागवतका स्वरूप , प्रमाण , श्रोता – वक्ताके लक्षण , श्रवणविधि और माहात्म्य१ – श्रीमद्भागवत – पाठके विभिन्न प्रयोग २ – श्रीगोविन्ददामोदरस्तोत्रम् ३ – श्रीमद्भागवतकी आरती