अर्जुनाग्निसंवाद : असम्भव दिखने वाले कठिन लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु क्या आवश्यक है?
पुरुषार्थ और संसाधनों का समन्वय
महाभारतके सन्दर्भ सहित वास्तविक आख्यान — मूल श्लोक और पृष्ठ-सङ्केतके साथ।
महाभारत — खण्ड १ · आदिपर्व → खाण्डवदाहपर्व · अध्याय 223 · पृष्ठ 1546–1549
471 शब्द · 3 मिनटका पाठ · 4 श्लोक
वैशम्पायन ने जनमेजय से कहा
राजा जनमेजय के प्रश्न पर उत्तर देने हेतु।
वैशम्पायनजी कहते हैं— हे जनमेजय! खाण्डववन को जलाने के अपने प्रयास में मिली असफलता से अग्निदेव बड़ी निराशा और ग्लानि में डूब गए। वे कुपित होकर पितामह ब्रह्माजी के पास पहुँचे और उन्हें अपनी व्यथा यथोचित रीति से सुनाई। तब ब्रह्माजी ने दो घड़ी तक विचार किया और अग्निदेव से बोले, ‘अनघ! तुम जिस प्रकार खाण्डववन को जलाओगे, वह उपाय तो मुझे सूझ गया है; किन्तु उसके लिये तुम्हें कुछ समयतक प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। हव्यवाहन! उस समय नर और नारायण तुम्हारे सहायक होंगे। उन दोनों के साथ रहकर तुम उस वन को जला सकोगे।’ अग्निदेव ने ब्रह्माजी की बात सुनकर कहा, ‘अच्छा, ऐसा ही सही।’
भविष्यतः सहायौ ते नरनारायणौ तदा ।
ताभ्यां त्वं सहितो दावं धक्ष्यसे हव्यवाहन ॥
‘ हव्यवाहन! उस समय नर और नारायण तुम्हारे सहायक होंगे । उन दोनोंके साथ रहकर तुम उस वनको जला सकोगे '
दीर्घकाल बीतने के पश्चात जब अग्निदेव को पता चला कि नर-नारायण ऋषियों का अवतरण हो चुका है, तब वे पुनः ब्रह्माजी के पास पहुँचे। इस बार ब्रह्माजी ने उन्हें एक अन्य उपाय बताया, ‘विभावसो! आदिदेव नर और नारायण मुनि इस समय देवताओं का कार्य सिद्ध करने के लिये मनुष्यलोक में अवतीर्ण हुए हैं। वहाँ के लोग उन्हें अर्जुन और वासुदेव के नाम से जानते हैं। वे दोनों इस समय खाण्डववन के पास ही एक साथ बैठे हैं। तुम उन दोनों से खाण्डववन जलाने के कार्य में सहायता की याचना करो। तब तुम इन्द्रादि देवताओं से रक्षित होने पर भी उस वन को जला सकोगे। वे दोनों वीर एक साथ होने पर यत्नपूर्वक वन के सारे जीवों को भी रोकेंगे और देवराज इन्द्र का भी सामना करेंगे, मुझे इसमें कोई संशय नहीं है।’
तौ तु सत्त्वानि सर्वाणि यत्नतो वारयिष्यतः ।
देवराजं च सहितौ तत्र मे नास्ति संशयः ॥
' वे दोनों वीर एक साथ होनेपर यत्नपूर्वक वनके सारे जीवोंको भी रोकेंगे और देवराज इन्द्रका भी सामना करेंगे, मुझे इसमें कोई संशय नहीं है '
यह सुनकर हव्यवाहन ने तुरन्त श्रीकृष्ण और अर्जुन के पास जाकर अपना निवेदन किया। अग्निदेव के कथन सुनकर अर्जुन ने, जो इन्द्र की इच्छा के विरुद्ध खाण्डववन जलाने की अभिलाषा रखने वाले जातवेदा अग्नि से उस समय के अनुकूल थे, उन्हें अपनी बात कही। अर्जुन बोले— ‘भगवन्! मेरे पास बहुत-से दिव्य एवं उत्तम अस्त्र तो हैं, जिनके द्वारा मैं क्या, अनेक वज्रधारियों से युद्ध कर सकता हूँ; परन्तु मेरे पास मेरे बाहुबल के अनुरूप धनुष नहीं है, जो समरभूमि में युद्ध के लिये प्रयत्न करते समय मेरा वेग सह सके। इसके सिवा शीघ्रतापूर्वक बाण चलाते रहने के लिये मुझे इतने अधिक बाणों की आवश्यकता होगी, जो कभी समाप्त न हों तथा मेरी इच्छा के अनुरूप बाणों को ढोने के लिये शक्तिशाली रथ भी मेरे पास नहीं है।
धनुर्मे नास्ति भगवन् बाहुवीर्येण सम्मितम् ।
कुर्वतः समरे यत्नं वेगं यद् विषहेन्मम ॥
परंतु मेरे पास मेरे बाहुबलके अनुरूप धनुष नहीं है, जो समरभूमिमें युद्धके लिये प्रयत्न करते समय मेरा वेग सह सके ।
मैं वायु के समान वेगवान श्वेत वर्ण के दिव्य अश्व तथा मेघ के समान गम्भीर घोष करने वाला एवं सूर्य के समान तेजस्वी रथ चाहता हूँ। इसी प्रकार इन भगवान् श्रीकृष्ण के बल-पराक्रम के अनुसार कोई आयुध इनके पास भी नहीं है, जिससे ये नागों और पिशाचों को युद्ध में मार सकें। भगवन्! इस कार्य की सिद्धि के लिये जो उपाय सम्भव हो, वह मुझे बताइये, जिससे मैं इस महान् वन में जल बरसाते हुए इन्द्र को रोक सकूँ। भगवन् अग्निदेव! पुरुषार्थ से जो कार्य हो सकता है, उसे हमलोग करने के लिये तैयार हैं; किन्तु इसके लिये सुदृढ़ साधन जुटा देने की कृपा आपको करनी चाहिये।’
पौरुषेण तु यत् कार्यं तत् कर्तारौ स्व पावक ।
करणानि समर्थानि भगवन् दातुमर्हसि ॥
भगवन् अग्निदेव! पुरुषार्थसे जो कार्य हो सकता है, उसे हमलोग करनेके लिये तैयार हैं; किंतु इसके लिये सुदृढ़ साधन जुटा देनेकी कृपा आपको करनी चाहिये ।
In English
Agni's Plan to Burn the Khandava Forest
After failing to burn the Khandava forest, Agni seeks advice from Brahma. Brahma tells Agni to seek help from Narayana and Nara, who are known as Krishna and Arjuna. Arjuna asks Agni for a stronger bow, more arrows, a powerful chariot, and fast horses so they can protect the forest creatures and face Indra.
This page answers
- How did brahma advise agni to burn the khandava forest?
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- What weapons and tools did arjuna ask agni for?
- Why did arjuna need a new bow and more arrows?
Also written: Arjunagnisanvada, Brahmaji, Nara, Narayana, Arjuna, Krishna, Agnideva, अर्जुनाग्निसंवाद