श्रीगणेशाय नमः।
महर्षि वेदव्यास कृत
महाभारत एवं पुराण आख्यान
महाभारत, श्रीमद्भागवत और श्रीमद्देवीभागवतमें बिखरे हुए आख्यान, उपाख्यान और संवाद — एक-एक करके, मूल संस्कृत श्लोकों और उनके हिन्दी अर्थके साथ। हर श्लोक गीताप्रेस संस्करणके स्कैनसे ज्यों-का-त्यों लिया गया है, और अपने ग्रन्थ, स्कन्ध अथवा पर्व, अध्याय तथा श्लोक-क्रमाङ्कके साथ मूल पृष्ठसे जुड़ा है — जिससे पाठक स्वयं ग्रन्थमें जाकर मिला सकें।
Retellings of the embedded stories of the Mahābhārata, the Śrīmad Bhāgavata and the Devī Bhāgavata — the ākhyānas, upākhyānas and saṃvādas — each one set beside the Sanskrit it comes from. Every śloka is reproduced verbatim from the Gita Press edition and cited to its own granth, skandha or parva, adhyāya and verse, so nothing here has to be taken on trust.
- कथाएँ
- 167
- श्लोक उद्धृत
- 2379
- स्रोत
- गीताप्रेस
आख्यान किसे कहते हैं
महाभारत केवल एक युद्धकी कथा नहीं है, और पुराण केवल वंशावली नहीं। उनके भीतर सैकड़ों छोटी-बड़ी कथाएँ गुँथी हुई हैं — किसी पात्रके प्रश्नपर कही गयी, किसी सङ्कटके समय सुनायी गयी, अथवा किसी ऋषिके उपदेशके रूपमें आयी हुई। इन्हींको आख्यान, उपाख्यान और संवाद कहा जाता है। नल-दमयन्ती, सावित्री, अणीमाण्डव्य, गजेन्द्रमोक्ष, ध्रुव, प्रह्लाद, हरिश्चन्द्र — ये सब मुख्य कथाके भीतर अपनी-अपनी पूर्ण कथाएँ हैं, और सदियोंसे स्वतन्त्र रूपसे पढ़ी और सुनायी जाती रही हैं।
The Mahābhārata is not one story but many, and a Purāṇa is not merely a genealogy. Woven through them are hundreds of self-contained episodes — the ākhyānas, upākhyānas and saṃvādas — told when a character asks a question, when a crisis needs a precedent, or when a sage answers. Nala and Damayantī, Sāvitrī, Aṇīmāṇḍavya, the liberation of Gajendra, Dhruva, Prahlāda, Hariścandra: each is a complete story inside the larger one, and each has been read on its own for centuries.
ये पृष्ठ कैसे बने हैं
प्रत्येक आख्यान गीताप्रेस संस्करणके उन्हीं अध्यायोंसे तैयार किया गया है जिनमें वह कथा कही गयी है। गद्य पुनर्कथन है — मूल अनुवादका शब्दशः प्रतिरूप नहीं — इसलिए उसे मूलके स्थानपर न पढ़ा जाय। परन्तु जो श्लोक उद्धृत हैं वे रचे नहीं गये हैं: वे स्कैनसे ज्यों-के-त्यों लिये गये हैं, अपने ग्रन्थ, वक्ता, अध्याय और श्लोक-क्रमाङ्कके साथ। जिस श्लोकका सन्दर्भ मिल नहीं सका, उसे छोड़ दिया गया है — अनुमानसे भरा नहीं गया।
Each ākhyāna is composed from the very adhyāyas in which its story is told. The prose is a retelling, not a translation, and is not a substitute for the original. The ślokas are a different matter: they are never composed. Each is lifted verbatim from the scan with its granth, speaker, chapter and verse number, and any citation that could not be resolved against the page was dropped rather than guessed.
स्रोत और मिलान
स्रोत गीताप्रेस, गोरखपुरके संस्करण हैं — महाभारत, श्रीमद्भागवत महापुराण और श्रीमद्देवीभागवत महापुराण — जिनका पूरा पाठ यहीं ग्रन्थ-सङ्ग्रहमें उपलब्ध है। हर कथाके शीर्षमें उसका ग्रन्थ नाम सहित दिया गया है और वह सीधे उसी पृष्ठपर ले जाता है जहाँसे वह लिखी गयी है। पाठक स्कैन खोलकर स्वयं देख सकता है — यहाँ कुछ भी विश्वासपर नहीं छोड़ा गया।
महाभारत
- अगस्त्योपाख्यान ऋषियों के तेज और सगरपुत्रों के विनाश का क्या कारण था?
- अङ्गिरसोपाख्यान अङ्गिरा की पुत्रियों के विविध स्वरूपों का रहस्य क्या है?
- अणीमाण्डव्योपाख्यान धर्मराज को शूद्र योनि में जन्म क्यों लेना पड़ा?
- अम्बोपाख्यान भीष्म ने शिखण्डी को क्यों नहीं मारा?
- अर्जुनाग्निसंवाद असम्भव दिखने वाले कठिन लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु क्या आवश्यक है?
- आङ्गिरसोपाख्यान अतुलनीय शक्ति वाले आदर्श पति की खोज कैसे हुई?
- आङ्गिरसोपाख्यानेऽग्निसमुद्भव अग्निदेव ने अपना पद त्यागकर अथर्वा को क्यों नियुक्त किया?
- आपवोपाख्यान वसुओं को मनुष्य योनि में जन्म क्यों लेना पड़ा?
- आयुष्याख्यान मनुष्य की आयु और कीर्ति कैसे बढ़ती है?
- इन्द्रद्युम्नोपाख्यान पुण्य क्षीण होने पर मनुष्य का पतन कैसे होता है?
- इन्द्रबृहस्पतिसंवाद किसी भी व्यक्ति को वश में करने का सबसे सरल साधन क्या है?
- इन्द्रमतङ्गसंवाद क्या जन्म की योनि से ब्राह्मणत्व मिटाया जा सकता है?
- इन्द्रस्कन्दसमागम अहङ्कार और शक्ति के अतिरेक से बचने का मार्ग क्या है?
- उञ्छवृत्त्युपाख्यान परम सत्य की खोज हेतु कौन सा मार्ग सबसे श्रेष्ठ है?
- उतथ्यगीता राजसत्ता और राजा के वास्तविक कर्तव्य क्या हैं?
- उत्तङ्कोपाख्यान क्या धर्म केवल व्यक्तिगत साधना है या सामूहिक कल्याण?
- उष्ट्रग्रीवोपाख्यान राजा को किस प्रकार के कार्यों से सुख और विजय प्राप्त होती है?
- ऋषभगीता आशा का भञ्जन मनुष्य को किस प्रकार दुर्बल करता है?
- ऋष्यशृङ्गोपाख्यान तपस्वी पुत्र को वेश्या के प्रलोभन से कैसे बचाया गया?
- और्वोपाख्यान क्रोध की अग्नि से उत्पन्न विनाशकारी प्रतिज्ञा को कैसे शान्त किया जाए?
- कर्मफलिकोपाख्यान मनुष्य के पूर्व कर्मों का फल उसे कैसे प्राप्त होता है?
- कायव्यचरित क्या एक लुटेरा व्यक्ति भी धर्म के मार्ग पर चलकर सिद्धि प्राप्त कर सकता है?
- कार्तवीर्योपाख्यान परशुराम ने समस्त क्षत्रियों का विनाश क्यों किया?
- कालकवृक्षीयोपाख्यान राजकीय कोष के अपहरण और मन्त्रियों के षड्यन्त्र से कैसे बचें?
- कीटोपाख्यान युद्ध के मैदान में प्राण त्यागने वाले योद्धाओं की गति क्या होती है?
- कुण्डधारोपाख्यान धर्म, अर्थ और काम में से सबसे श्रेष्ठ क्या है?
- कुन्तीप्रश्न असहनीय विपत्ति और कुल-विनाश से बचने का मार्ग क्या है?
- कृतघ्नोपाख्यान मित्रों के साथ विश्वासघात करने वाले व्यक्ति का क्या हश्र होता है?
- कैकेयोपाख्यान राजा को अपनी धर्मनिष्ठा कैसे सिद्ध करनी चाहिए?
- गालवचरित अहङ्कार और हठ किस प्रकार मनुष्य के अर्जित पुण्य का विनाश कर देते हैं?
- गोदानमाहात्म्य गोदान और भूमिदान की श्रेष्ठता एवं पात्रता का निर्णय कैसे करें?
- चित्रसेनोर्वशीसंवाद इन्द्र ने उर्वशी को अर्जुन की सेवा हेतु क्यों भेजा?
- चित्राङ्गदोपाख्यान अहङ्कार किस प्रकार एक पराक्रमी योद्धा का पतन कर देता है?
- चिरकारिकोपाख्यान धर्मयुक्त किन्तु हिंसापूर्ण कर्तव्य पर विचार कैसे करें?
- च्यवनोपाख्यान अमूल्य आध्यात्मिक मूल्यों का विनिमय किस प्रकार सम्भव है?
- जन्तूपाख्यान क्या किसी दूसरे के कर्म का फल स्वयं भुगतने की इच्छा धर्म है?
- जापकोपाख्यान जप करने वालों को किस प्रकार की परम गति प्राप्त होती है?
- तपत्युपाख्यान अर्जुन को 'तापत्य' क्यों कहा गया और इसका वास्तविक अर्थ क्या है?
- तारकवधोपाख्यान अजेय कहे जाने वाले तारकासुर का वध कैसे सम्भव हुआ?
- त्रिताख्यान लोभ और स्वार्थ के कारण अपनों का साथ कैसे छूट जाता है?
- त्रिपुरवधोपाख्यान अतिशयोक्तिपूर्ण शक्ति प्राप्त करने हेतु किस प्रकार के समर्पण की आवश्यकता होती है?
- त्रिपुराख्यान अजेय पुरों का विनाश करने वाला योद्धा कौन है?
- दण्डोत्पत्युपाख्यान संसार में अराजकता और अधर्म को रोकने के लिए दण्ड की उत्पत्ति कैसे हुई?
- दम्भोद्भवोपाख्यान अहङ्कार से पूर्ण योद्धा को पराजित करने और उसे धर्म की राह पर लाने का क्या उपाय है?
- दुर्वासउपाख्यान सङ्कट के समय ईश्वर की शरण कैसे प्राप्त होती है?
- धुन्धुमारोपाख्यान कुवलाश्व का नाम धुन्धुमार कैसे पड़ा?
- धृतराष्ट्रप्रश्न असाध्य सङ्कट के समय योद्धा का धर्म क्या होता है?
- नकुलाख्यान क्या केवल भव्य यज्ञ ही स्वर्ग प्राप्ति का मार्ग है?
- नलोपाख्यान अचानक आए सङ्कटों और अपनों के वियोग में धैर्य कैसे बनाए रखें?
- नलोपाख्यानपर्वणिऋतुपर्णस्य अज्ञात और परिचित ध्वनियों के बीच सत्य की पहचान कैसे करें?
- नारदपर्वतोपाख्यान सत्य की प्रतिज्ञा भङ्ग करने का क्या परिणाम होता है?
- नाहुषचरित दान देते समय मन में द्वेष क्यों नहीं आना चाहिए?
- निमित्ताख्यान अधर्म के विनाश और धर्म की पुनर्स्थापना का मार्ग क्या है?
- नृगोपाख्यान अचेत पाप और अनजाने में हुए अपराध का क्या परिणाम होता है?
- नृशंसाख्यान नृशंस जैसे कुत्सित चरित्र वाले व्यक्तियों की पहचान कैसे करें?
- पञ्चशिखजनकसंवाद क्या धन, तपस्या या शास्त्रों के अध्ययन से मृत्यु को जीता जा सकता है?
- पञ्चेन्द्रोपाख्यान पाण्डव और द्रौपदी का दिव्य स्वरूप क्या है?
- पतिव्रतोपाख्यान अत्यन्त कठिन और निन्दनीय कर्मों के बीच धर्म का मार्ग कैसे खोजें?
- पराशरगीता परम कल्याण प्राप्त करने के लिए मनुष्य को कौन-सा शुभ कर्म करना चाहिए?
- परिक्षिदुपाख्यान तपस्वी की गरिमा और आत्मिक अहङ्कार का वास्तविक स्वरूप क्या है?
- पानीयदानमाहात्म्य अन्न और जल दान में से श्रेष्ठ कौन सा है?
- प्रायश्चित्तीयोपाख्यान क्या अपनों के वध का पाप कभी धुल सकता है?
- बिसस्तैन्योपाख्यान अत्यधिक भूख और प्रलोभन के समय आत्मिक शुद्धि कैसे बनी रहे?
- बोध्यगीता शान्ति प्राप्त करने हेतु किस प्रकार की बुद्धि और आचरण आवश्यक है?
- ब्रह्मगीता परम सत्य का अनुभव केवल बुद्धि द्वारा ही क्यों सम्भव है?
- ब्राह्मणगीता आत्मा का वास्तविक स्वरूप और ब्रह्मज्ञान प्राप्त करने का मार्ग क्या है?
- ब्राह्मणमाहात्म्य राजा की सत्ता और दैवीय पद के बीच क्या सम्बन्ध है?
- ब्राह्मणमाहात्म्य ब्राह्मणों की वास्तविक श्रेष्ठता और उनकी भूमिका क्या है?
- ब्राह्मणमाहात्म्यकथन अज्ञानवश हुए पाप से मुक्ति और मृत्यु पर विजय कैसे प्राप्त होती है?
- भङ्गास्वनोपाख्यान स्त्री और पुरुष के संयोग में विषयसुख की अनुभूति किसको अधिक होती है?
- मङ्किगीता धन की तृष्णा से ग्रस्त व्यक्ति परम सुख कैसे प्राप्त करे?
- मण्डूकोपाख्यान अधर्म और अहङ्कार के कारण मनुष्य का पतन कैसे होता है?
- मत्स्योपाख्यान परमेश्वर ने मत्स्य रूप धारण करके सृष्टि की रक्षा क्यों की?
- महाभिषोपाख्यान देवलोक की मर्यादा भङ्ग करने पर क्या दण्ड मिला?
- महेश्वरमाहात्म्य परमेश्वर के विविध रूपों और उनके नामों का रहस्य क्या है?
- माण्डव्यजनकसंवाद धन और सम्पत्ति की असीमित तृष्णा से मुक्ति कैसे पाएं?
- मातृपितृगुरुमाहात्म्य श्रेष्ठ धर्म और परम यश की प्राप्ति कैसे हो?
- मान्धातोपाख्यान असाधारण शक्ति प्राप्त करने के लिए क्या आवश्यक है?
- मुचुकुन्दोपाख्यान राजा को अपनी शक्ति और पद की रक्षा कैसे करनी चाहिए?
- मुद्गलोपाख्यान अत्यधिक अभाव और भूख के समय धैर्य कैसे बनाए रखें?
- यमगौतमसंवाद माता-पिता के ऋण से मुक्ति और पुण्य लोक की प्राप्ति कैसे होती है?
- ययात्युपाख्यान अत्यधिक इच्छाओं और तृष्णा के चक्र से मुक्ति कैसे प्राप्त होती है?
- यवक्रीतोपाख्यान बिना गुरु के वेद प्राप्त करने की कोशिश क्यों विफल रही?
- युधिष्ठिरादिधृतराष्ट्रसमागम अकेलेपन और शोक के क्षणों में परिजनों का मिलन कैसे होता है?
- रामोपाख्यान क्या किसी पवित्र स्त्री पर भी पाप का कलङ्क लग सकता है?
- रामोपाख्यान परशुराम ने क्षत्रियों का संहार क्यों किया और पृथ्वी की रक्षा कैसे हुई?
- रुरुडुण्डुभसंवाद प्रतिज्ञा के वशीभूत होकर क्या किसी का वध करना उचित है?
- वसिष्ठोपाख्यान शापित राजा ने धर्मनिष्ठ गुरु के साथ ऐसा अधर्म क्यों किया?
- वामदेवगीता एक आदर्श राजा को धर्म और सत्ता के बीच सन्तुलन कैसे बनाना चाहिए?
- विचख्नुगीता अत्यधिक अहिंसा के कारण क्या मनुष्य अपने अस्तित्व को बचा पाएगा?
- विपुलोपाख्यान गुरुपत्नी की रक्षा के लिए किसी को क्या आत्मिक और शारीरिक त्याग करना पड़ता है?
- विश्वामित्रोपाख्यान एक क्षत्रिय पुरुष ने ब्राह्मणत्व प्राप्त करने की कठिन परीक्षा कैसे पार की?
- विश्वोपाख्यान पाण्डव युद्ध में अवध्य और विजयी क्यों हैं?
- वीतहव्योपाख्यान क्या एक क्षत्रिय राजा कठिन तपस्या और कृपा से ब्राह्मणत्व प्राप्त कर सकता है?
- वृत्रगीता दुखों से मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति का वास्तविक मार्ग क्या है?
- वृत्रवधोपाख्यान अधर्म के विनाश हेतु सबसे पहले किसका अन्त आवश्यक है?
- व्युषिताश्वोपाख्यान पति की मृत्यु के बाद एक स्त्री का क्या कर्तव्य है?
- शकुन्तलोपाख्यान सत्य और धर्म की रक्षा हेतु पिता को पुत्र को कैसे स्वीकार करना चाहिए?
- शम्पाकगीता धन और राज्य के मोह से मुक्ति कैसे प्राप्त करें?
- शाकुलोपाख्यान सङ्कट आने से पहले ही उसका समाधान कैसे प्राप्त किया जाए?
- शान्तनूपाख्यान धर्म की मर्यादा और वासना के बीच सन्तुलन कैसे स्थापित करें?
- शार्ङ्गकोपाख्यान अभिभावक की अनुपस्थिति में सङ्कट काल में आत्म-रक्षा का निर्णय कैसे लें?
- शिबिचरित परम धर्म की रक्षा हेतु मनुष्य को क्या त्याग करना चाहिए?
- श्रीरामोपाख्यान अदृश्य शत्रुओं को देखने की शक्ति कैसे प्राप्त हुई?
- षड्जगीता धर्म, अर्थ और काम में से सबसे श्रेष्ठ क्या है?
- षोडशराजोपाख्यान पुत्र के शोक से मुक्ति पाने का मार्ग क्या है?
- सत्यवतीलाभोपाख्यान पिता की इच्छा पूर्ण करने हेतु पुत्र ने क्या त्याग किया?
- सारस्वतोपाख्यान कुरुक्षेत्र की भूमि को राजा कुरु ने किस प्रयोजन से जोता था?
- सावित्रीव्रतोपाख्यान पापमोचनी और धर्मफल प्राप्त करने हेतु कौन सा मन्त्र श्रेष्ठ है?
- सावित्र्युपाख्यान पति की मृत्यु के बाद एक पत्नी अपने पति को पुनर्जीवित कैसे कर सकती है?
- सुदर्शनोपाख्यान एक गृहस्थ ने धर्म का आश्रय लेकर मृत्यु पर विजय कैसे प्राप्त की?
- सुन्दोपसुन्दोपाख्यान समान लक्ष्य वाले दो शक्तिशाली योद्धा आपस में क्यों लड़ गए?
- सुरभ्युपाख्यान पुत्रों के प्रति माता का प्रेम और करुणा क्यों विशेष होती है?
- सेदुकवृषदर्भचरित क्या अपनी मर्यादा भङ्ग करने वाले को दण्ड देना उचित है?
- सेनजिदुपाख्यान परम दुःख और शोक से मुक्ति का मार्ग क्या है?
- सौभवधोपाख्यान श्रीकृष्ण द्वारकापुरी से अनुपस्थित रहकर किस महान कार्य की सिद्धि कर रहे थे?
- स्कन्दोपाख्यान अत्यधिक शक्तिशाली योद्धा को सत्ता का पद क्यों नहीं दिया जाता?
- स्वर्णष्ठीविसम्भवोपाख्यान अत्यधिक शक्तिशाली सन्तान के जन्म पर भयभीत राजा को क्या परामर्श देना चाहिए?
- हंसकाकीयोपाख्यान अहङ्कार में डूबा हुआ व्यक्ति अपनी पराजय के समय क्या अनुभव करता है?
- हंसगीता परम सत्य, संयम और क्षमा का वास्तविक स्वरूप क्या है?
- हरिणकृशकाख्यान अत्यन्त शक्तिशाली शत्रु को केवल वाणी के बल पर कैसे वश में करें?
- हारीतगीता परमधाम की प्राप्ति हेतु कैसा आचरण आवश्यक है?
श्रीमद्भागवत महापुराण
- इलोपाख्यान परम ज्ञानी ऋषियों के सङ्कल्पों का विपरीत फल क्यों प्राप्त हुआ?
- ऐलोपाख्यान पुरूरवा ने उर्वशीलोक प्राप्त करने हेतु किस कठिन साधना का मार्ग चुना?
- कापिलेयोपाख्यान अज्ञान और मोह के चक्र से मुक्त होकर परमपद कैसे प्राप्त किया जा सकता है?
- गजेन्द्रोपाख्यान असहनीय सङ्कट के समय जीवात्मा को मुक्ति कैसे प्राप्त होती है?
- जडभरतचरित परमेश्वर अपने भक्त की रक्षा कैसे करते हैं?
- ध्रुवचरित बाल्यावस्था में अपमान सहकर भी परमपद प्राप्त करने का मार्ग क्या है?
- नैमिषीयोपाख्यान कम समझ वाले पुरुषों के लिए वेदों का विभाग क्यों किया गया?
- पुरंजनोपाख्यान कर्मकाण्ड और आसक्ति के जाल से मुक्त होकर परम कल्याण कैसे प्राप्त करें?
- पृथुकोपाख्यान परमेश्वर के अनन्य भक्त को क्या प्राप्त होता है?
- पृथुचरित मनुष्य अपनी आत्मा को कैसे पहचान सकता है और दुखों से मुक्त हो सकता है?
- प्रचेतसोपाख्यान गृहस्थी के मोह में फंसकर आध्यात्मिक लक्ष्य को कैसे पुनः प्राप्त करें?
- प्रह्रादचरित एक पिता अपने ही पुत्र के प्रति इतना क्रूर क्यों हो गया?
- बलदेवचरित्र अहङ्कार और अधर्म का अन्त कैसे होता है?
- भरतचरित योगियों का मन उनके लिए सबसे बड़ा शत्रु क्यों है?
- भरतोपाख्यान संसार रूपी दुर्गम वन में जीव किस प्रकार भटकता रहता है?
- वामनावतारचरित एक असुर को स्वर्ग से भी श्रेष्ठ राज्य कैसे प्राप्त हुआ?
- श्रीदामचरित परमेश्वर के सखा बनने हेतु किस प्रकार का आत्मिक समर्पण आवश्यक है?
- श्रीरामोपाख्यान लोक-निन्दा के भय से सीताजी का परित्याग क्यों हुआ?
- सगरोपाख्यान अहङ्कारवश तपस्वी का अपमान करने पर क्या परिणाम भुगतने पड़े?
- सौभर्याख्यान विषयों के भोग और तपस्या के बीच सन्तुलन कैसे स्थापित करें?
- स्यमन्तकोपाख्यान झूठे कलङ्क से मुक्ति हेतु किस आत्मिक त्याग की आवश्यकता होती है?
- हरिश्चन्द्रोपाख्यान पुत्र-मोह के बन्धन से मुक्त होकर आत्मज्ञान कैसे प्राप्त होता है?
- ऽजामिलोपाख्यान क्या पापियों के लिए पूर्ण मुक्ति सम्भव है?
- ऽम्बरीषचरित भक्त की रक्षा हेतु भगवान स्वयं क्यों व्याकुल होते हैं?
श्रीमद्देवीभागवत महापुराण
- गङ्गोपाख्यान गङ्गा को पृथ्वी पर क्यों भेजा गया और उनका वास्तविक स्वरूप क्या है?
- त्रिशङ्कपाख्यान शापित व्यक्ति को पुनः स्वर्ग प्राप्त कैसे हो सकता है?
- दक्षिणोपाख्यान कर्मों को फल प्रदान करने वाली शक्ति कौन है?
- देवीचरित्र अखण्ड राज्य और मोक्ष की प्राप्ति कैसे सम्भव है?
- देवीमाहात्म्य अतिशयोक्तिपूर्ण प्रतिज्ञा और आत्म-मर्यादा का सन्तुलन कैसे स्थापित करें?
- देवीमाहात्म्य सृष्टि के रचयिता ब्रह्माजी ने सङ्कट काल में किसकी शरण ली?
- धर्मध्वजसुतातुलस्युपाख्यान परमेश्वर की अनन्य प्रियतमा बनने के लिए क्या आवश्यक है?
- प्रकृतिचरित्र सृष्टि की रचना में प्रकृति देवी के विभिन्न रूप और उनकी उत्पत्ति कैसे हुई?
- भगवतीमाहात्म्य असीमित शक्ति प्राप्त करने के बाद अहङ्कार का परिणाम क्या होता है?
- भस्ममाहात्म्य पाप विनाश और आत्मिक शुद्धि हेतु भस्म का रहस्य क्या है?
- मङ्गलचण्डीमनसयोरुपाख्यान नागों के भय से मुक्ति और वंश की रक्षा कैसे सम्भव है?
- मनसोपाख्यान धर्म रक्षा हेतु पति ने पत्नी का त्याग क्यों किया?
- लक्ष्म्युपाख्यान इन्द्र के पास से महालक्ष्मी क्यों चली गईं?
- विन्ध्योपाख्यान अहङ्कारवश एक पर्वत ने सृष्टि के सन्तुलन को कैसे बिगाड़ दिया?
- श्रीलक्ष्म्युपाख्यान देवताओं के ऐश्वर्य और लक्ष्मी का वैभव क्यों लुप्त हो गया?
- षष्ठ्युपाख्यान पुत्रहीनता और शोक के समय ईश्वर से सहायता कैसे प्राप्त करें?
- सावित्र्युपाख्यान परम दुर्लभ भक्ति और मुक्ति के वास्तविक सार क्या हैं?
- सुरभ्युपाख्यान सृष्टि की उत्पत्ति और जीव नियन्त्रण का रहस्य क्या है?
- स्वधोपाख्यान पितरों की तृप्ति और श्राद्ध के पूर्ण फल हेतु क्या आवश्यक है?
- स्वाहोपाख्यान यज्ञों में स्वाहा शब्द जोड़ने से क्या सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं?
- हरिश्चन्द्रोपाख्यान सत्य की रक्षा हेतु मनुष्य को किन कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है?