श्रीगणेशाय नमः।

महर्षि वेदव्यास कृत

महाभारत एवं पुराण आख्यान

महाभारत, श्रीमद्भागवत और श्रीमद्देवीभागवतमें बिखरे हुए आख्यान, उपाख्यान और संवाद — एक-एक करके, मूल संस्कृत श्लोकों और उनके हिन्दी अर्थके साथ। हर श्लोक गीताप्रेस संस्करणके स्कैनसे ज्यों-का-त्यों लिया गया है, और अपने ग्रन्थ, स्कन्ध अथवा पर्व, अध्याय तथा श्लोक-क्रमाङ्कके साथ मूल पृष्ठसे जुड़ा है — जिससे पाठक स्वयं ग्रन्थमें जाकर मिला सकें।

Retellings of the embedded stories of the Mahābhārata, the Śrīmad Bhāgavata and the Devī Bhāgavata — the ākhyānas, upākhyānas and saṃvādas — each one set beside the Sanskrit it comes from. Every śloka is reproduced verbatim from the Gita Press edition and cited to its own granth, skandha or parva, adhyāya and verse, so nothing here has to be taken on trust.

कथाएँ
167
श्लोक उद्धृत
2379
स्रोत
गीताप्रेस

आख्यान किसे कहते हैं

महाभारत केवल एक युद्धकी कथा नहीं है, और पुराण केवल वंशावली नहीं। उनके भीतर सैकड़ों छोटी-बड़ी कथाएँ गुँथी हुई हैं — किसी पात्रके प्रश्नपर कही गयी, किसी सङ्कटके समय सुनायी गयी, अथवा किसी ऋषिके उपदेशके रूपमें आयी हुई। इन्हींको आख्यान, उपाख्यान और संवाद कहा जाता है। नल-दमयन्ती, सावित्री, अणीमाण्डव्य, गजेन्द्रमोक्ष, ध्रुव, प्रह्लाद, हरिश्चन्द्र — ये सब मुख्य कथाके भीतर अपनी-अपनी पूर्ण कथाएँ हैं, और सदियोंसे स्वतन्त्र रूपसे पढ़ी और सुनायी जाती रही हैं।

The Mahābhārata is not one story but many, and a Purāṇa is not merely a genealogy. Woven through them are hundreds of self-contained episodes — the ākhyānas, upākhyānas and saṃvādas — told when a character asks a question, when a crisis needs a precedent, or when a sage answers. Nala and Damayantī, Sāvitrī, Aṇīmāṇḍavya, the liberation of Gajendra, Dhruva, Prahlāda, Hariścandra: each is a complete story inside the larger one, and each has been read on its own for centuries.

ये पृष्ठ कैसे बने हैं

प्रत्येक आख्यान गीताप्रेस संस्करणके उन्हीं अध्यायोंसे तैयार किया गया है जिनमें वह कथा कही गयी है। गद्य पुनर्कथन है — मूल अनुवादका शब्दशः प्रतिरूप नहीं — इसलिए उसे मूलके स्थानपर न पढ़ा जाय। परन्तु जो श्लोक उद्धृत हैं वे रचे नहीं गये हैं: वे स्कैनसे ज्यों-के-त्यों लिये गये हैं, अपने ग्रन्थ, वक्ता, अध्याय और श्लोक-क्रमाङ्कके साथ। जिस श्लोकका सन्दर्भ मिल नहीं सका, उसे छोड़ दिया गया है — अनुमानसे भरा नहीं गया।

Each ākhyāna is composed from the very adhyāyas in which its story is told. The prose is a retelling, not a translation, and is not a substitute for the original. The ślokas are a different matter: they are never composed. Each is lifted verbatim from the scan with its granth, speaker, chapter and verse number, and any citation that could not be resolved against the page was dropped rather than guessed.

स्रोत और मिलान

स्रोत गीताप्रेस, गोरखपुरके संस्करण हैं — महाभारत, श्रीमद्भागवत महापुराण और श्रीमद्देवीभागवत महापुराण — जिनका पूरा पाठ यहीं ग्रन्थ-सङ्ग्रहमें उपलब्ध है। हर कथाके शीर्षमें उसका ग्रन्थ नाम सहित दिया गया है और वह सीधे उसी पृष्ठपर ले जाता है जहाँसे वह लिखी गयी है। पाठक स्कैन खोलकर स्वयं देख सकता है — यहाँ कुछ भी विश्वासपर नहीं छोड़ा गया।