श्रीगणेशाय नमः।
यन्त्र-सहायतासे संकलित · नामित संस्करणसे मिलाकर
व्याख्या
शास्त्रके प्रश्नोंके उत्तर, जिनमें उद्धृत प्रत्येक संस्कृत पंक्ति नामित संस्करणमें खोजकर ही रखी गयी है। जो पंक्ति किसी संस्करणमें नहीं मिली, वह यहाँ छपती ही नहीं — उसे हटा दिया जाता है और उसका लेखा रखा जाता है। प्रत्येक पृष्ठ स्वयं बताता है कि वह कैसे बना।
Commentary articles in which every Sanskrit quotation was looked up in a named edition before it was published. A quotation that matched nothing is not published at all: it is dropped, and the drop is recorded. Compiled with machine assistance, and every page says so on its face.
- व्याख्या
- 51
- मूल पद्य
- 2892
- ग्रन्थ
- 5
व्याख्या क्या है
यह न आख्यान है, न मर्म। आख्यान महाभारत और पुराणोंके प्रसंगोंका पुनःकथन है; मर्म एक विषयपर बिखरे हुए पद्योंका संग्रह। व्याख्या किसी एक प्रश्नका क्रमबद्ध उत्तर है — जिसका मूल आधार वे ही पद्य हैं जो नामित संस्करणसे मिलाकर रखे गये हैं, और जिसका हिन्दी विवेचन यन्त्र-सहायतासे बना है।
Not an ākhyāna and not a marma page. An ākhyāna retells an episode of the Mahābhārata or the Purāṇas; a marma page gathers verses on one subject from across the corpus. A vyākhyā is an ordered answer to one question, resting on verses that were each matched against a named edition, with a Hindi exposition that was machine-assisted.
ये कैसे बनती हैं
उत्तर पहले बनता है, फिर उसका प्रत्येक संस्कृत उद्धरण उस ग्रन्थकी मूल-सूचीमें खोजा जाता है जिसका वह होनेका दावा करता है। जो अक्षरशः मिल जाता है, वह अपने प्रमाणके साथ यहाँ आता है। जो लगभग मिलता है, उसके साथ संस्करणका पाठ ऊपर और संकलनका अपना पाठ नीचे — दोनों दिखाये जाते हैं, ताकि अन्तर छिपे नहीं। जो कहीं नहीं मिलता, वह प्रकाशित नहीं होता।
The answer is written first; then every Sanskrit quotation in it is looked up in the mūla index of the work it claims to come from. What matches exactly is published with its citation. What matches only nearly is published with the edition's reading above and the compilation's own wording below it, so the difference is visible rather than smoothed away. What matches nothing is not published.
क्या मानें, क्या जाँचें
मूल पाठ सदा नामित संस्करणका है — संकलनका लिखा हुआ नहीं। हिन्दी विवेचन यन्त्र-सहायतासे बना है, अतः उसे मूल ग्रन्थसे मिलाकर ही प्रमाण माना जाये। प्रत्येक पृष्ठके नीचे यह गिनती दी रहती है कि कितने उद्धरण थे, कितने मिले, कितनोंमें पाठभेद रहा और कितने छोड़ दिये गये।
- इन्द्र-मतंग संवाद - ब्राह्मणत्व प्राप्ति की दुर्लभता - महाभारत
- बृहद्योगियाज्ञवल्क्यस्मृतिः योगियाज्ञवल्क्यकी स्मृति — ओंकार, व्याहृति, गायत्री, न्यास, संध्या, स्नान-तर्पण-जप, प्राणायाम-प्रत्याहार, ध्यान, सूर्योपस्थान, योगधर्म और विद्या-अविद्या: बारह अध्याय, संपादकोंके पाठभेद और विषयानुक्रमणी सहित।
- प्रशस्तपादभाष्य — न्यायकन्दली सहित वैशेषिक दर्शनका पदार्थधर्मसङ्ग्रह: प्रशस्तपादभाष्य, श्रीधर भट्टकी न्यायकन्दली, दोनोंका हिन्दी अनुवाद और टिप्पणियाँ, संस्करणकी भूमिका सहित।
- पातञ्जल योगदर्शन — व्यासभाष्य और ओमानन्द तीर्थकी व्याख्या सहित चारों पाद: सूत्र, उसका अर्थ, व्यासभाष्य, भाष्यका हिन्दी अनुवाद और स्वामी ओमानन्द तीर्थकी व्याख्या।
- ब्रह्मसूत्र — शाङ्करभाष्य और सत्यानन्दी दीपिका सहित अध्यासभाष्यसे चौथे अध्यायके अन्त तक: सूत्र, अधिकरण, पदच्छेद, सूत्रार्थ, शाङ्करभाष्य, उसका अनुवाद और सत्यानन्दी दीपिका।