गीता में कश्मलम् का अर्थ
Basudeba Mishra गीतामें कश्मलम् का अर्थ क्या है । कुतस्त्वा कश्मलमिदं विषमे समुपस्थितम्। अनार्यजुष्टमस्वर्ग्यमकीर्तिकरमर्जुन ।। गीता 2-2।। हे अर्जुन! इस विषम अवसर पर तुम्हे यह कश्मलम् कहाँ से प्राप्त हुई, जिसका श्रेष्ठपुरुष सेवन नहीं करते, जो स्वर्ग को देनेवाला नहीं है और कीर्त्तीकरने वाली भी नहीं है । शङ्कराचार्य ने कश्मलम् शब्द का अर्थ नहीं […]
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