Author name: Dwaipayan Pradhan

श्राद्धविज्ञान

श्राद्धविज्ञान – किसी पदार्थ का वर्तमान रहते हुए, उसमें जो कुछ अन्यपदार्थ उसके आधार पर रखा जाता है, उस सत् पदार्थ का आधार द्रव्य को सत्य कहते हैँ ।आश्रय प्रदान करने के कारण सत्यभाव को श्रत् कहते हैँ । आपः का ब्रह्ममय रूप सोम का प्रजनन करता है । श्रद्धारूप सूक्ष्म आपः आदित्य रूप अग्नि से परिताप योग से परिवर्तित हो कर छान्दोग्यउपनिषत् वर्णित पञ्चाग्निविद्या प्रक्रिया से सोम में परिणत हो जाता है । श्रत् में सोम रखा जाता है । इसलिए उसे श्रद्धा कहते हैँ । पितृओं को शुद्ध व्यञ्जनादि (श्रद्धामयोऽयं पुरुषो यो यच्छ्रद्धः स एव सः ।। गीता 17-3) श्रद्धापूर्वक समर्पण किया जाना श्रद्धया दीयते व्युत्पत्ति से श्राद्ध कहलाता है ।

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कार्यकारणवाद एवं अध्यास। On Causality & Paradoxes – 2

कार्यकारणवाद एवं अध्यास। ON CAUSALITY AND PARADOXES – 2 – Basudeba Mishra हेतुर्निमित्तं प्रकृतिश्च योनिः प्रारब्धमूले प्रभवोद्भवौ तथा ।विवर्तसञ्चारिरसप्रवाहिकप्रकृत्यपूर्वं समवायिका मताः ॥ Classification of cause-effect relationship. What is a cause? That without which something does not happen or cannot be done, is a cause (कार्यतेऽनेन । येन विना यन्न भवति तत्). It is immediately antecedent

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