Author name: Dwaipayan Pradhan

अक्षरों का वर्गीकरण, उच्चारणप्रक्रिया तथा संख्या

– Basudeba Mishra, Topic – Varnamala पाणिनीय शिक्षा में कहा गया है – त्रिषष्टिश्चतुःषष्टिर्वा वर्णाः सम्भवतो मताः । प्राकृते संस्कृते चापि स्वयंप्रोक्ताः स्वयंभुवा । आकाशसम्भूत वर्णों में अथवा ब्रह्माजी के मत में प्राकृत तथा संस्कृत के वर्ण संख्या 63 अथवा 64 कहागया है । इनमें स्वरवर्ण 22 है । स्पर्शवर्ण 25 है । अन्तस्थ वर्ण […]

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IS 2⁰ = 1? THE VEDIC VIEW

By Basudeba Mishra Number (सङ्ख्या) is a property of everything that exists, by which we differentiate between similars (भेदाभेद विभागो हि लोके सङ्ख्या निबन्धन). It is not the same as the object (mass – गुरुत्व or form – रूप) or the effect of energy (action), and is different from all other properties (अन्वयव्यतिरेकाभ्यां सङ्ख्याभ्युपगमे सति).

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सम्यक् ख्यानं संख्या ।

– Basudeba Mishra सा यस्मिन् वर्त्तते तत् साङ्ख्य । विशिष्टरूप से किसी तत्त्व का (अन्य तत्त्वों से भेद प्रदर्शन पूर्वक) स्वरूप प्रकथन को संख्या कहते हैं (भेदाभेद विभागोहि लोके संख्या निबन्धन) । जो सर्वत्र अभेदरूप से प्रतीत होता है, वह एक है (एक इता संख्या । इता अनुगता सर्वत्र या संख्या सा एक । अन्वयव्यतिरेकाभ्यां

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