अक्षरों का वर्गीकरण, उच्चारणप्रक्रिया तथा संख्या
– Basudeba Mishra, Topic – Varnamala पाणिनीय शिक्षा में कहा गया है – त्रिषष्टिश्चतुःषष्टिर्वा वर्णाः सम्भवतो मताः । प्राकृते संस्कृते चापि स्वयंप्रोक्ताः स्वयंभुवा । आकाशसम्भूत वर्णों में अथवा ब्रह्माजी के मत में प्राकृत तथा संस्कृत के वर्ण संख्या 63 अथवा 64 कहागया है । इनमें स्वरवर्ण 22 है । स्पर्शवर्ण 25 है । अन्तस्थ वर्ण […]
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