सम्यक् ख्यानं संख्या ।
– Basudeba Mishra सा यस्मिन् वर्त्तते तत् साङ्ख्य । विशिष्टरूप से किसी तत्त्व का (अन्य तत्त्वों से भेद प्रदर्शन पूर्वक) स्वरूप प्रकथन को संख्या कहते हैं (भेदाभेद विभागोहि लोके संख्या निबन्धन) । जो सर्वत्र अभेदरूप से प्रतीत होता है, वह एक है (एक इता संख्या । इता अनुगता सर्वत्र या संख्या सा एक । अन्वयव्यतिरेकाभ्यां […]
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