Author name: Dwaipayan Pradhan

ब्राह्मीस्थिति क्या है ।

ब्राह्मीस्थिति क्या है । – Basudeba Mishra एषा ब्राह्मी स्थितिः पार्थ नैनां प्राप्य विमुह्यति ।स्थित्वाऽस्यामन्तकालेऽपि ब्रह्मनिर्वाणमृच्छति ॥गीता २-७२॥ हे पार्थ, यह ब्राह्मीस्थिति है । इसको प्राप्त हो कर कभी कोई मोहित नहीं होता । इस स्थिति में यदि अन्तकाल में भी स्थित हो जाय, तो निर्वाण ब्रह्मकी प्राप्ति हो जाती है । यह बहु इप्सित […]

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On the nature of time

On the nature of time – Basudeba Mishra Time is considered as the aspect of the physical universe, which, at a given place, orders the sequence of events. Also, a designated instant in that sequence is called time – technically known as an epoch. But does it really exist? If so, does it have a

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योगसूत्रम् 1-29 व्याख्या

ततः प्रत्यकचेतनाधिगमोऽप्यन्तरायाभावश्च । योगसूत्रम् 1-29. उससे प्रत्यक् चेतन का साक्षात्कार होता है और समस्त अन्तराय विलीन होता है । प्रत्यक् शब्द का एक अर्थ पश्चिम है, जो सूर्य के अर्थात प्रकाश के दिशा के विपरीत है । प्रकाश ही उसके विपरीत दिशा में अवस्थित वस्तु का दर्शन कराता है । उसीप्रकार अन्तर्यामी बाहर के संसार

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वैशेषिक दर्शन (महर्षि कणाद प्रोक्त)

महर्षि कणाद प्रोक्त वैशेषिक वा काणाद वा औलूक्य दर्शन , Vaisheshika of Maharshi Kanada १। वैशेषिक दर्शन का सुविख्यात प्रशस्तपादभाष्य यहाँ पढ़ें। Read the authoritative commentary of Acharya Prashastapaada on Vaisheshika. २। The hindi translation of Prashastapaada Bhashya is here. एक सुदृढ़ पाठ्यक्रम के रूप में वैशेषिक दर्शन को अधिकृत आचार्य से यहाँ पढ़ें। महर्षि

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साहित्य की मृत्यु

साहित्य (Sahitya) की मृत्यु । – Basudeba Mishra भवतु इति – यह ऐसा हो – इसप्रकार के चित्तवृत्ति को इच्छा कहते हैं । वह स्वीया – परकीया भेद से दो प्रकार का होती है । मैं अथवा मेरा ऐसा हो – इसप्रकार के आत्मसम्बन्धी इच्छा स्वीया है । अन्य समस्त परसम्बन्धी इच्छा परकीया है ।

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