Author name: Dwaipayan Pradhan

शरीर तथा व्यक्तित्व की परिभाषा

शरीर तथा व्यक्तित्व की परिभाषा । – Basudeba Mishra संहतिसारानूकस्नेहोन्मानप्रमाणमानानि ।क्षेत्राणि प्रकृतिस्थो मिश्रमेतदपि शारीरम् ।।समुद्रकृत शास्त्रके व्यक्तित्वनिरुपणाधिकारः में संहति, सार, अनूक, स्नेह, उन्मान, प्रमाण, तथा मान – इनका संघात ही शरीर का परिभाषा है । एक यन्त्रवत्, मांस, स्नायु, एवं हड्डियोंके सन्धि, बन्ध, एवं पारष्परिक अविरुद्ध तथा निविड मिलन को संहनन, संघात अथवा संहति कहते […]

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On Time

On Time – Basudeba Mishra Recently, much is being discussed in scientific circles regarding the nature of time. General Relativity and Quantum theories have notions of time that are not compatible with each other. A theory proposed to unite both – a bunch of string theories – provide a range of models that describe a

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कलिधर्मः

– Basudeba Mishra कलिधर्मः – कलियुग के लक्षण कलि शव्द कल् धातुमें इन् प्रत्यय (सर्वधातुभ्योः इन् – उणादिसूत्र 4-117) से निष्पन्न हुआ है । कल् धातुके विभिन्न अर्थ है, जैसे कि कलँ गतौ॑ स॒ङ्ख्याने॑ च, कलँ॒ शब्दसङ्ख्या॒नयोः॑, कलँऽ क्षेपे॑, आदि । उसी के अनुसार कलियुग के विभिन्न लक्षण देखनेको मिलते हैं । कलते स्पर्द्धते अर्थमें

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The Mechanism of Thought (भावना).

THE MECHANISM OF THOUGHT (भावना). मनोबुद्धिरहङ्कारश्चितं करणमान्तरम्।संशयो निश्चयो गर्बः स्मरणं विषया अमी। Our internal sensory mechanism – mental faculties (चित्तवृत्ति) are based on mind (मनस्), intelligence (बुद्धिः), ego (अहङ्कारः) and consciousness (चित्त). Their respective functions are looking for alternatives, focusing on one alternative out of many, assimilating that particular alternative in self for giving command

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निरालम्बोपनिषद्

निरालम्बोपनिषद् ॐ नमः शिवाय गुरवे सच्चिदानन्दमूर्तये। निष्प्रपञ्चाय शान्ताय निरालम्बाय तेजसे। निरालम्बं समाश्रित्य सालम्बं विजहाति यः। स संन्यासी च योगी च कैवल्यं पदमश्नुते।। ||१|| एषामज्ञानजन्तूनां समस्तारिष्टशान्तये। यद्यद्बोद्धव्यमखिलं तदाशङ्कय ब्रवीम्यहम्॥ ||२|| किं ब्रह्म। क ईश्वर । को जीवः। का प्रकृतिः। कः परमात्मा को ब्रह्मा। को विष्णुः । को रुद्रः । क इन्द्रः । कः शमनः । कः

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