श्रीगणेशाय नमः।

अष्टाङ्गहृदयम् (सूत्रस्थान) ब्रह्मानन्द त्रिपाठी — पृष्ठ 21–30

अष्टाङ्गहृदयम् (सूत्रस्थान) ब्रह्मानन्द त्रिपाठी · चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान, दिल्ली · पृष्ठ 21–30

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( २१ ) विषय कुलथी का वर्णन सेम का वर्णन माष ( उड़द ) का वर्णन काकाण्डोला एवं केवाँच तिल का वर्णन अतसी एवं कुसुम्भ बीज माष, यवक - वर्णन धान्य- विवेचन अथ कृतान्नवर्गः पकाये गये अन्नों का वर्णन पेया का वर्णन विलेपी का वर्णन ओदन ( भात ) का वर्णन संक्षिप्त निर्देश मांसरस के गुण मूँग का कुलथी का यूष तिल, पिण्याक आदि रसाला के गुण पानक ( शीतल पेय ) के गुण लाजा का वर्णन पृथुक ( च्यूड़ा ) का वर्णन धाना का वर्णन सत्तुओं का वर्णन पिण्याक - वर्णन सवार वर्णन मूँग आदि के वेसवार अपूपों का वर्णन अथ मांसवर्गः मृग - परिचय विष्किर - परिचय प्रतुद - परिचय बिलेशय - परिचय प्रसहमृग - पक्षी महामृग - -परिचय I जलचर पक्षी मत्स्य - परिचय आठ प्रकार के मांस बकरी - भेड़ का वर्णन पृष्ठांक | विषय ९ ० शेष प्राणियों का निर्णय ९ ० मांसों का वर्णन ९ ० | शशकमांस के गुण ९ ० वर्तक आदि के मांस ९ १ मोर का मांस ९ १ कुक्कुट का मांस ९ १ पालतू मुर्गा का मांस . ९ १ क्रकर एवं उपचक्रक के मांस काणकपोतक का मांस ९ २ चटक का मांस ९ २ आठों मांसों का वर्णन ९ २ | महामृगों के मांस ९ ३ बकरा का मांस ९ ३ " भेड़ का मांस ९ ३ गाय को मांस ९ ३ भैंसा का मांस ९ ३ | सूअर का मांस ९ ३ मत्स्य का मांस ९ ३ चिलचिम मत्स्य का मांस ९ ४ लाव आदि का वर्णन ९ ४ भक्ष्यमांस- वर्णन ९ ४ अभक्ष्यमांस- वर्णन ९ ४ विशिष्ट अवयवों के मांस ९ ५ अथ शाकवर्गः ९ ५ शाकों का वर्णन ९ ५ सुनिषण्णक का वर्णन ९ ५ राजक्ष का वर्णन ९ ६ | वास्तुक का वर्णन काकमाची का वर्णन ९ ६ चांगेरी का वर्णन ९ ६ | पटोल आदि शाक ९ ७ परबल का शाक ९ ७ बृहतीद्वय का वर्णन ९ ७ | अडूसा का वर्णन ९ ८ करेला का वर्णन ९ ८ बैगन का वर्णन ९ ८ करीर का वर्णन ९ ८ तोरई ( कोशातकी ) तथा बाकुची ९ ८ ( अवल्गुज ) का शाक

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विषय तण्डुलीय का वर्णन मुञ्जातक का वर्णन पालंकी का वर्णन उपोदिका का वर्णन चञ्चु का वर्णन विदारीकन्द का वर्णन जीवन्ती का वर्णन कूष्माण्ड आदि का वर्णन पुस का वर्णन तुम्ब का वर्णन शीर्णवृन्त - फल - शाक मृणाल आदि का वर्णन कलम्ब आदि का वर्णन चिल्ली शाक का वर्णन तर्कारी आदि शाक का वर्णन पुनर्नवा एवं कालशाक करञ्ज का शाक शतावरी का शाक वंशकरीर का शाक पत्तूर का शाक कासमर्द का शाक कुसुम्भ का शाक सरसों ( सर्षप ) के पत्तों का बालमूली का शाक वृद्धमूली का शाक स्नेहसिद्ध मूली का शाक सूखी मूली का शाक कच्ची मूली का शाक पिण्डालु का शाक कुठेरक आदि शाक सुरस का शाक सुमुख का शाक धनिया ( आर्दिका ) का शाक लशुनकन्द का शाक पलाण्डु का शाक गृञ्जनकका शाक सूरण का शाक भूकन्द का शाक शाकों में उत्तरोत्तर गुरुता ( २२ ) शाक पृष्ठांक | विषय १०४ उत्तम - अधम निर्णय १०४ अथ फलवर्गः १०४ द्राक्षा - परिचय १०४ दाडिमफल का वर्णन १०४ केला आदि फलों का वर्णन १०४ ताल आदि फलों का वर्णन १०४ बिल्वफल का वर्णन १०५ कपित्थफल का वर्णन १०५ जामुनफल का वर्णन १०५ आम का वर्णन १०५ वृक्षाम्ल का वर्णन १०५ शमीफल का वर्णन १०६ पीलुफल का वर्णन १०६ मातुलुंग ( बिजौरानीबू ) का वर्णन १०६ भिलावा का वर्णन १०६ पारेवत का वर्णन १०६ आरुकफल का वर्णन १०६ कच्चे दाख आदि फल १०७ | करमर्द ( करौंदा ) के कच्चे फल १०७ कोल, कर्कन्धु - वर्णन १०७ | इमली एवं बेर के सूखे फल १०७ | बड़हर के फल १०७ त्याज्य धान्य, शाक एवं फल १०७ अथौषधवर्गः १०७ लवण सामान्य के गुण १०७ सेंधानमक के गुण १०८ सौवर्चलनमक के गुण १०८ विड्नमक के गुण १०८ सामुद्र नमक के गुण १०८ औद्भिद् नमक के गुण १० ९ कृष्णलवण के गुण १० ९ रोमकलवण के गुण १० ९ सामान्य निर्देश १० ९ यवक्षार के गुण १० ९ सभी प्रकार के क्षार १० ९ हींग का वर्णन ११० हरीतकी का वर्णन ११० आमलक का वर्णन ११० । बिभीतक का वर्णन

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( २३ ) विषय त्रिफला का वर्णन त्रिजात एवं चतुर्जात मरिच के गुण पिप्पली के गुण सोंठ के गुण आर्द्रक के गुण त्रिकटु के गुण चव्य तथा पीपलामूल चित्रक के गुण पञ्चकोल के गुण बृहत्पञ्चमूल के गुण लघुपञ्चमूल के गुण मध्यमपञ्चमूल के गुण जीवनपञ्चमूल के गुण तृणपञ्चमूल गुण ( ७ ) अन्नरक्षाध्यायः प्राणाचार्य की नियुक्ति चिकित्सक का कर्तव्य विषैले भात के लक्षण विषैले व्यञ्जनों के लक्षण विषैले मांस आदि के लक्षण विषदाता के लक्षण विषैले अन्न की परीक्षा विषैले अन्न का प्रभाव स्पर्शज विषचिकित्सा मुख में विष का प्रभाव आमाशयगत विष के लक्षण पक्वाशयगत विष के लक्षण उक्त दोनों की चिकित्सा ताम्र एवं स्वर्ण भस्म - प्रयोग स्वर्णभस्म का प्रभाव विरोधी आहार आनूपदेशीय मांस दुग्धपान- विचार विरुद्ध द्रव्यों के लक्षण विरोधी आहारों का सेवन अपथ्य का त्याग एवं पथ्य का सेवन सहसा त्याग का निषेध दोषों का ह्रास, गुणों की वृद्धि पृष्ठांक | ११ ९ ११ ९ ११ ९ ११ ९ ११ ९ ११ ९ ११ ९ १२० १२० १२० १२० १२० १२० १२० १२१ १२२ १२२ १२२ १२३ १२३ १२३ १२४ १२४ १२४ १२५ १२५ १२५ १२५ १२५ १२५ १२६ १२६ १२६ १२६ १२८ १२ ९ १२ ९ १२ ९ विषय दोषों को दूषित न करें तीन उपस्तम्भ आहार नामक उपस्तम्भ निद्रा नामक उपस्तम्भ निद्रा का अभाव निद्रा के गुण - -दोष द निद्रा सम्बन्धी विचार दिन में न सोने का निर्देश अकालशयन से हानि चिकित्सा - निर्देश निद्रानाश के लक्षण निद्रासेवन - निर्देश पूर्ण निद्राप्राप्ति - विधि ब्रह्मचर्य नामक उपस्तम्भ स्त्रीसहवास का वर्णन मैथुन के अयोग्य स्थिति मैथुन सम्बन्धी अन्य निर्देश विपरीत व्यवहार का फल संयम का महत्त्व मैथुनोत्तर कर्तव्य राजा आदि का कर्तव्य ( ८ ) मात्राऽशितीयाध्यायः आहारमात्रा का वर्णन मात्रा में गुरु - लघु विचार हीनमात्रा वाले आहार से हानि अधिक मात्रा वाले आहार से हानि विसूचिका के लक्षण अलसक की परिभाषा विसूचिका की परिभाषा विसूचिका के लक्षण अलसक का वर्णन दण्डालसक का वर्णन आमविष का वर्णन आमदोष की चिकित्सा पार्ष्णिदाह - प्रयोग अन्य उपचार अपतर्पण - प्रयोग हेतुविपरीत आदि चिकित्सा | विपरीतार्थकारी चिकित्सा

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विषय आमाजीर्ण के लक्षण विष्टब्धाजीर्ण के लक्षण विदग्धाजीर्ण के लक्षण चिकित्सासूत्र विलम्बिका के लक्षण रसशेषाजीर्ण - चिकित्सा अजीर्ण का सामान्य लक्षण अजीर्ण के विविध कारण समशन आदि के लक्षण शास्त्रीय भोजन - विधि त्याज्य भोजन - विधि असेवनीय आहार सेवनीय आहार रात में सेंवनीय पदार्थ. अन्य पदार्थों को खाने की विधि आमाशय के चार भाग विभिन्न प्रकार के अनुपान उत्तम अनुपान अनुपान सेवन का फल १. अनुपान का निषेध २. अनुपान का निषेध ३. अनुपान का निषेध भोजन - समय का निर्देश ( ९ ) द्रव्यादिविज्ञानीयाध्यायः द्रव्य की प्रधानता द्रव्य का स्वरूप द्रव्य की उत्पत्ति उत्पत्ति के कारण नामकरण में कारण द्रव्य में अनेक रस अनेक दोषज रोग द्रव्यगत गुरु आदि गुण पार्थिव द्रव्य का वर्णन आप्य द्रव्य का वर्णन आग्नेय द्रव्य का वर्णन वायव्य द्रव्य का वर्णन नाभस द्रव्य का वर्णन औषधमय द्रव्य द्रव्यों की विशेषता ( २४ ) पृष्ठांक | विषय १३ ९ द्रव्य - वर्णन की समाप्ति १३ ९ रसवर्णन - - प्रस्ताव १३ ९ द्रव्यगत वीर्य - वर्णन १३ ९ चरकसम्मत वीर्य १३ ९ वाग्भट का मत १४० रस आदि में वीर्य की श्रेष्ठता १४० वीर्य सम्बन्धी अन्य मत १४० वाग्भट का समर्थन १४० वीर्य के लक्षण १४१ विपाक का वर्णन १४१ विपाकज रस - भेद १४१ रस, वीर्य, विपाक, प्रभाव १४२ द्रव्य का स्वाभाविक बल १४२ रस आदि का स्वाभाविक बल १४२ प्रभाव का वर्णन १४२ द्रव्य आदि के कर्म १४२ भिन्नता के उदाहरण १४३ ( १० ) रसभेदीयाध्य १४३ मधुर आदि रसों की उत्पत्ति १४३ मधुररस के लक्षण १४३ | अम्लरस के लक्षण १४३ लवणरस के लक्षण १४४ तिक्तरस के लक्षण कटुरस के लक्षण १४५ कषायरस के लक्षण १४५ रसों के स्वरूप १४५ रसों के कर्म १४५ मधुररस के कर्म १४५ अम्लरस के कर्म १४६ लवणरस के कर्म १४६ तिक्तरस के कर्म १४६ | कटुरस के कर्म १४६ कषायरस के कर्म १४६ | मधुरस्कन्ध के द्रव्य १४७ अम्लस्कन्ध के द्रव्य १४७ लवणस्कन्ध के द्रव्य १४७ तिक्तस्कन्ध के द्रव्य १४७ कटुस्कन्ध के द्रव्य १४७ | कषायस्कन्ध के द्रव्य

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विषय मधुररस का विशिष्ट वर्णन अम्लरस का विशिष्ट वर्णन लवणरस का विशिष्ट वर्णन तिक्त एवं कटु रसों का विशिष्ट वर्णन कषायरस का विशिष्ट वर्णन रसों का वर्णन रसों के ६३ भेद रससंयोगों के असंख्य भेद ( ११ ) दोषादिविज्ञानीयाध्यायः शरीर के आधार प्रकृतिस्थ दोषों के कर्म रस आदि धातुओं के कर्म मलों के प्रमुख कर्म वातवृद्धि के लक्षण पित्तवृद्धि के लक्षण कफवृद्धि के लक्षण रसवृद्धि के लक्षण रक्तवृद्धि के लक्षण मांसवृद्धि के लक्षण मेदोवृद्धि के लक्षण अस्थिवृद्धि के लक्षण मज्जावृद्धि के लक्षण शुक्रवृद्धि के लक्षण पुरीषवृद्धि के लक्षण मूत्रवृद्धि के लक्षण स्वेदवृद्धि के लक्षण अन्य मलवृद्धि के लक्षण वातदोष के क्षय - लक्षण पित्तदोष के क्षय- लक्षण कफदोष के क्षय- लक्षण रसधातु के क्षय - लक्षण रक्तधातु के क्षय - लक्षण मांसधातु के क्षय - लक्षण मेदोधातु के क्षय - लक्षण अस्थिधातु के क्षय - लक्षण मज्जाधातु के क्षय - लक्षण शुक्रधातु के क्षय - लक्षण पुरीषक्षय के क्षय - लक्षण मूत्रक्षय के क्षय - लक्षण ( २५ ) पृष्ठांक | विषय १५६ स्वेदक्षय के लक्षण १५६ अन्य मलों के क्षय - लक्षण १५६ वृद्धि एवं क्षय - निर्देश १५६ पुरीष आदि मलों का महत्त्व १५६ वात आदि के विशिष्ट स्थान १५६ वातज रोग प्रतीकार १५७ वृद्धरक्तादि की चिकित्सा १५८ मलों की वृद्धि एवं क्षय की धातुओं की वृद्धि - क्षय १६० | वृद्धि - क्षय का कारण १६० वृद्धि -क्षय का अन्य स्वरूप १६० दोष, धातु, मल एवं स्रोतों १६१ मलायनों का परिचय १६१ | ओजस् का वर्णन १६१ | ओजःक्षय के कारण, लक्षण १६१ ओजोवृद्धि के लक्षण १६१ वृद्धि - क्षय का चिकित्सासूत्र १६२ द्वेष एवं प्रार्थना का कारण १६२ अवस्थानुसार दोषों के कर्म १६२ दोषों को सम रखना चिकित्सा की दुष्टि एवं चिकित्सा १६२ ( १२ ) दोषभेदीयाध्यायः १६२ वात के प्रमुख स्थान १६२ | पित्त के प्रमुख स्थान १६२ | कफ के प्रमुख स्थान १६३ | वात के पाँच भेद १६३ पाँच वातों का वर्णन १६३ | उदानवायु का वर्णन १६३ व्यानवायु का वर्णन १६३ | समानवायु का वर्णन १६३ | अपानवायु का वर्णन १६३ पित्त के पाँच भेद १६४ पाचकपित्त का वर्णन १६४ रञ्जकपित्त का वर्णन १६४ साधकपित्त का वर्णन १६४ | आलोचकपित्त का वर्णन १६४ भ्राजकपित्त का वर्णन १६४ कफ का वर्णन १६४ अवलम्बक कफ का वर्णन १६४ | क्लेदक कफ का वर्णन

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विषय बोधक कफ का वर्णन तर्पक कफ का वर्णन श्लेषक कफ का वर्णन उपसंहार वात के चय, कोप, शम का वर्णन पित्त के चय, कोप, शम का वर्णन कफ के चय, कोप, शम का वर्णन दोषों के चय का वर्णन दोषों के प्रकोप का वर्णन चय, कोप, शम का वर्णन चय आदि का विशेष वर्णन कालस्वभाव का वर्णन दोषों की व्याप्ति एवं निवृत्ति निदान, रूप, चिकित्सा - वर्णन रोगों की उत्पत्ति के कारण दोषों के प्रकोप के कारण हीनयोग आदि का वर्णन काल का वर्णन कर्म का वर्णन उपसंहार एवं रोगमार्ग बाहरी रोगमार्ग आभ्यन्तर रोगमार्ग मध्यम रोगमार्ग वातदोष के कर्म पित्तदोष के कर्म कफदोष के कर्म दोषलक्षण निर्वचन का हेतु चिकित्सा में अभ्यास का महत्त्व रोगों के तीन भेद रोगों का परिचय त्रिविध रोग - चिकित्सा रोगों के दो भेद रोग - भेदों के नाम स्वतन्त्र रोग परतन्त्र रोग मलों का विचार दोषों का विचार चिकित्सासूत्र उपद्रवचिकित्सा - निर्देश ( २६ ) पृष्ठांक | विषय १७३ रोगनामनिर्धारण - विचार १७३ दोषों का रोगकर्तृत्व १७३ चिकित्साविधि - निर्देश १७४ दूष्य आदि ज्ञान -1 -निर्देश १७४ | रोग की गुरुता - लघुता का विचार १७४ भिषग्ब्रुव की निन्दा १७४ भूल का दुष्परिणाम १७४ चिकित्सक का कर्तव्य १७५ दोषभेदों का वर्णन १७५ दोषवृद्धि के तीन भेद १७५ संसर्ग के तीन भेद १७५ संसर्ग के छः भेद १७६ | समस्त दोषवृद्धि के १३ भेद १७६ १३ भेदों के उदाहरण १७६ एक भेद का निर्देश १७६ पुनः छः भेद १७७ वृद्ध दोषों का योग १७७ क्षीण दोषों का योग १७७ वृद्धि, सम, क्षय भेद से छः १७७ क्षय- - वृद्धि भेद से पुनः छः ६ १७७ ६२ दोषभेद १७८ ६३ वाँ भेद १७८ दोषों के अनन्त भेद भेद १७८ ( १३ ) दोषोपक्रमणीयाध्यायः १७८ वातदोष की चिकित्सा १७८ पित्तदोष की चिकित्सा १७ ९ कफदोष की चिकित्सा १७ ९ विषयोपसंहार १७ ९ चिकित्सा - निर्देश १७ ९ चिकित्सा का समय १७ ९ शुद्ध प्रयोग का परिचय १७ ९ दोषों का स्थानान्तर गमन १८० दोषों का कोष्ठगमन १८० पुनः रोगोत्पादन १८० अन्य स्थानों में दोषप्रकोप १८० चिकित्सा - निर्देश १८० तिर्यग्गत दोष - चिकित्सा १८० चिकित्सा - विधि १८० । साम - निराम दोषों के लक्षण

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( २७ ) विषय आम का वर्णन आमसम्बन्धी मतान्तर सामदोष एवं सामरोग सामदोषों की चिकित्सा दोषनिर्हरण - विधि आसन्न दोष का निर्हरण दोषनिर्हरण - निर्देश दोषनिर्हरण - विवेक शोधन का काल सहेतुक शोधनकाल शोधन का दृष्टिकोण शोधन की विशिष्ट विधि औषधसेवन के १० काल रोगानुसार औषध - सेवनकाल ( १४ ) द्विविधोपक्रमणीयाध्यायः चिकित्सा के दो भेद सन्तर्पण तथा अपतर्पण तत्त्वों की प्रधानता स्नेहन आदि का वर्णन प्रत्येक के दो भेद शोधन कर्म एवं उसके भेद शमन के लक्षण एवं उसके भेद बृंहण के लक्षण सन्तर्पण योग्य रोग - रोगी सन्तर्पण - चिकित्सा के उपादान अपतर्पण योग्य रोग - रोगी शोधन, शमन के योग्य रोग - रोगी सन्तर्पण का निषेध अपतर्पण - निर्देश सन्तर्पण के लाभ अपतर्पण के लाभ योग, अतियोग, हीनयोग उनके लक्षण अतिस्थूलता आदि रोग चिकित्सासूत्र विशेष चिकित्सा विडंगादि योग व्योषादियोग की फलश्रुति कृशता आदि रोग पृष्ठांक | विषय १८८ स्थूलता से कृशता श्रेष्ठ १८८ कृशता, स्थूलता - चिकित्सा १८८ कृशता चिकित्सा १८८ मांस की महत्ता १८८ स्थूलता - कृशता की चिकित्सा १८ ९ ( १५ ) शोधनादिगणसंग्रहाध्यायः १८ ९ वमनकारक द्रव्य १८ ९ विरेचनकारक द्रव्य १८ ९ निरूहणोपयोगी द्रव्य १८ ९ शिरोविरेचनोपयोगी द्रव्य १८ ९ वातनाशक द्रव्य १८ ९ पित्तनाशक द्रव्य १ ९ ० कफनाशक द्रव्य १ ९ ० जीवनीय गण विदार्यादि गण १ ९९ १ सारिवादि गण १ ९ १ पद्मकादि गण १ ९ १ परूषकादि गण १ ९ १ अञ्जनादि गण १ ९ १ पटोलादि गण १ ९ २ गुडूच्यादि गण १ ९ २ आरग्वधादि गण १ ९ २ असनादि गण १ ९ २ वरुणादिगण १ ९ २ ऊषकादि गण १ ९ २ वीरतर्वादि गण १ ९ ३ रोधादि गण १ ९ ३ अर्कादि गण १ ९ ३ | सुरसादि गण १ ९ ३ मुष्ककादि गण १ ९ ४ वत्सकादि गण १ ९ ४ वचादि गण १ ९ ४ हरिद्रादि गण १ ९ ४ | प्रियङ्ग्वादि गण १ ९ ४ अम्बष्ठादि गण १ ९ ४ मुस्तादि गण १ ९ ४ न्यग्रोधादि गण १ ९ ५ एलादि गण १ ९ ५ | श्यामादि गण

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विषय द्रव्यग्रहण - निर्देश गणोक्त द्रव्यों के प्रयोग ( १६ ) स्नेहविधिरध्यायः स्नेहन एवं रूक्षण - वर्णन चार प्रकार के स्नेह घृत की प्रधानता स्नेहों के प्रमुख गुण उत्तरोत्तर गुरुता स्नेहयोगों के नाम स्नेहनयोग्य व्यक्ति स्नेहन के अयोग्य व्यक्ति घृतस्नेह के योग्य व्यक्ति तैलस्नेह के योग्य व्यक्ति वसा - मज्जास्नेह वसास्नेह का क्षेत्र ऋतुभेद से स्नेह - निर्देश दिन में स्नेहसेवन - निर्देश शीतकाल में तैल - प्रयोग रात्रि में घृतपान - विधान कारण - भेद से रात्रि में घृतपान स्नेहसेवन- विचार स्नेहसेवन के भेद की युक्ति स्नेहसेवन- -प्रकार स्नेह की विचारणाएँ विचारणा पर विचार अच्छपेय के लाभ स्नेहमात्रा- विचार शोधनार्थ स्नेहमात्रा शमनार्थ स्नेहमात्रा बृंहणार्थ स्नेहपान - विधि बृंहणस्नेहपान के योग्य व्यक्ति स्नेहसेवन का प्रभाव विविध स्नेहों के अनुपान स्नेहपानार्थ आहार - विचार स्नेहपानार्थ विहार - विचार सर्वत्र त्याज्य कर्म शमनस्नेहपान में उपचार स्नेहपान की अवधि सम्यक् स्निग्ध पुरुष के लक्षण ( २८ ) पृष्ठांक विषय २०३ अतिस्निग्ध के लक्षण २०३ मिथ्या स्निग्ध के लक्षण स्नेहव्यापत् - चिकित्सा २०४ विरूक्षण - निर्देश २०४ स्वेदन आदि के प्रयोग २०४ | स्नेहन के पूर्व रूक्षण विधि २०४ असात्म्य स्नेह की शक्ति २०४ सद्यः स्नेहन का निर्देश २०५ सात सद्यः स्नेहन- योग २०५ लवण के गुण २०५ स्नेहनयोगों का निषेध २०५ कुष्ठादि के योग्य स्नेह २०५ क्षीण पुरुषों के योग्य स्नेह २०५ स्नेहसेवन से लाभ τ २०६ ( १७ ) स्वेदविधिरध्यायः २०६ | स्वेदन के चार भेद २०६ | तापस्वेद का वर्णन २०६ | उपनाहस्वेद का वर्णन २०६ बन्धनद्रव्य - निर्देश २०६ ऊष्मस्वेद का वर्णन २०६ | द्रवस्वेद का वर्णन २०६ | अवगाहनस्वेद - विधि २०६ स्वेदन - विधि २०७ स्वेदन - विधिभेद २०७ | दोषभेद से स्वेदन २०७ स्थानभेद से स्वेदन २०७ अन्यत्र स्वेदन - निर्देश २०७ स्वेदन का सम्यक् योग २०८ स्वेदन का अतियोग २०८ | स्वेदन एवं स्तम्भन औषध २०८ | स्तम्भन के सम्यक् योग के लक्षण २०८ | स्तम्भन के अतियोग के लक्षण २०८ स्वेदन के अयोग्य रोगी एवं रोग २०८ स्वेदन के योग्य रोगी २० ९ अनाग्नेय स्वेदनयोग्य रोग २० ९ अनाग्नेय स्वेदों का वर्णन २० ९ स्वेदन - प्रयोग का फल २० ९ ( १८ ) वमन विरेचनविधिरध्यायः २० ९ वमन विरेचन - व्यवस्था

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( २ ९ ) विषय वमन - निर्देश वमन के अयोग्य व्यक्ति वमन आदि का निषेध विरेचन के योग्य रोग विरेचन के अयोग्य रोग वमनकारक औषधद्रव्य एवं प्रयोग -वमन की प्रतीक्षा वमनकारक यत्न वमन में औषध - प्रयोग वमन की अवधि हीनयोग में औषध प्रयोग वमन का हीनयोग वमन का सम्यग्योग वमन का अतियोग वमन के पश्चात् कर्म स्नान एवं भोजन विधि पेया आदि क्रम - निर्देश पेया आदि से लाभ वमन - विरेचन के वेग एवं परिमाण वमन - विरेचन की अवधि एवं मान भारमापन - विधि वमन के बाद विरेचन मृदुकोष्ठ का वर्णन क्रूरकोष्ठ का वर्णन दोषानुसार विरेचन विरेचक उपाय पुनः विरेचन - प्रयोग हीनयोग के लक्षण समयोग के लक्षण अतियोग के लक्षण समयोग में पश्चात् कर्म समयोग में भोजनविधि लंघन - निर्देश लंघन का फल पेया आदि की आवश्यकता पेयासेवन का निषेध वमन - विरेचन की प्रतीक्षा वमन - विरेचन की चिकित्सा मृदुविरेचन का निर्देश पृष्ठांक | २१ ९ २२० २२० २२० २२० विधि २२१ २२१ २२१ २२१ २२२ २२२ २२२ २२२ | २२२ २२२ २२३ | २२३ | २२३ २२३ २२४ | २२४ | २२४ २२४ २२४ २२४ २२४ २२५ २२५ २२५ २२५ २२५ २२५ २२५ २२६ २२६ २२६ २२६ २२६ २२६ विषय औषध प्रयोग में सावधानी दुर्बल के दोषों पर विचार दोषनिर्हरण की आवश्यकता पुनः शोधन - निर्देश विरेचन में विविध विचार शोधन के अयोग्य रोगी शोधन के भेद स्नेहन - स्वेदन - प्रयोग मलों का उत्क्लेशन स्नेहन - स्वेदन के लाभ संशोधन से लाभ ( १ ९ ) बस्तिविधिरध्यायः बस्ति का वर्णन बस्ति का प्रयोग | बस्तिप्रयोग से लाभ बस्ति - परिचय निरूहण के अयोग्य | निरूहण एवं अनुवासन के योग्य निरूहण एवं अनुवासन के अयोग्य बस्तिनेत्र - परिचय नेत्र - निरुक्ति | नेत्र का आकार | नेत्र की मोटाई | बस्तिनेत्र का छिद्र | कर्णिका का वर्णन | बस्तिपुट का वर्णन | अन्य बस्तिपुट - विधान | निरूहणबस्ति की मात्रा | अनुवासनबस्ति की मात्रा बस्ति देने की विधि बस्तिनेत्र के प्रवेश की विधि | बस्ति के पश्चात् कर्म | स्नेह के लौटने पर आहार | स्नेह के न लौटने पर चिकित्सा | विशेष - चिकित्सा | पुनः अनुवासन - - प्रयोग प्र | निरूहणबस्ति - प्रयोग | निरूहण - प्रयोगविधि | बस्तिद्रव - निर्माणविधि

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विषय अन्य आचार्यों का मत बस्तिद्रव्य - मिश्रणविधि निरूहण का पश्चात्कर्म बस्ति के लौटने की अवधि अनेक बस्ति - प्रयोग सम्यग्योग आदि का संकेत सम्यग्योग में पश्चात् कर्म विकारों का शमन पुनः अनुवासन - प्रयोग अनुवासन के विविध योग सम्यग्योग का वर्णन दोषानुसार बस्तिसंख्या आहार - विधान वातदोष में बस्तिप्रयोग पित्तदोष में बस्तिप्रयोग कफदोष में बस्तिप्रयोग सन्निपात में बस्तिप्रयोग तीन ही बस्तियाँ बस्तिनाम - भेद उक्त मतों की प्रामाणिकता बस्तिकर्म की अवधि बस्तिकर्म का वर्णन बस्तिकाल का वर्णन बस्तियोग का वर्णन स्नेह एवं निरूहण प्रयोग बस्तियों का प्रयोगक्रम बस्ति की त्रिदोषनाशकता मात्राबस्ति का वर्णन मात्राबस्ति - सेवन मात्राबस्ति की विशेषता उत्तरबस्ति का वर्णन उत्तरबस्ति में नेत्र का प्रमाण स्नेहमात्रा का प्रमाण उत्तरबस्ति - प्रयोगविधि उत्तरबस्ति की संख्या स्त्रियों में उत्तरबस्ति बस्तिनेत्र का परिमाण स्नेहमात्रा का निर्देश उत्तरबस्ति - प्रयोगविधि ( ३० ) पृष्ठांक | विषय २३६ वमन आदि में कालनिर्देश २३६ | बस्ति द्वारा दोषनिर्हरण २३६ | बस्तिप्रयोग की प्रशंसा २३६ | सिरावेध का महत्त्व २३६ ( २० ) नस्यविधिरध्यायः २३७ नस्य का वर्णन २३७ नस्यकर्म के भेद २३७ विरेचननस्य का प्रयोग -२३७ बृंहणनस्य का प्रयोग २३७ शमननस्य का प्रयोग २३७ विरेचननस्य के द्रव्य २३७ बृंहणनस्य के द्रव्य २३८ | शमननस्य के द्रव्य २३८ नस्य के भेद २३८ | नस्य - प्रयोगविधि २३८ | नस्य की मात्रा २३८ | नस्य के अयोग्य व्यक्ति २३८ | नस्य के योग्य समय २३८ | रोगानुसार नस्य - प्रयोग २३८ नस्यसेवन की सीमा २३८ | नस्य का पूर्वकर्म २३ ९ | नस्य - प्रयोगविधि २३ ९ मूर्च्छाशान्ति की विधि २३ ९ स्नेहनस्य प्रयोग २३ ९ नस्यप्रयोग की प्रतीक्षा २३ ९ धूमपान - प्रयोग २३ ९ स्नेहननस्य का सम्यग्योग २३ ९ रूक्षनस्य का हीनयोग २४० स्नेहननस्य का अतियोग २४० विरेचननस्य का सम्यग्योग २४० मिथ्यायोग, हीनयोग के लक्षण २४० प्रतिमर्शनस्य प्रयोग २४० प्रतिमर्शनस्य का निषेध २४१ प्रतिमर्शनस्य के काल २४२ प्रतिमर्शनस्य के लाभ २४२ अवस्था का विचार २४२ नस्य में तेल का प्रयोग २४२ मर्श - प्रतिमर्श में फलभेद २४२ । अणुतैल का वर्णन