श्रीगणेशाय नमः।
सुश्रुतसंहिता हिन्दीव्याख्या - कविराज अम्बिकादत्त शास्त्री — पृष्ठ 41–50
सुश्रुतसंहिता हिन्दीव्याख्या - कविराज अम्बिकादत्त शास्त्री · चौखम्बा संस्कृत सीरिज, बनारस · पृष्ठ 41–50
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४ DO विषय पृष्ठाङ्क | परीक्षा ७ ९ दुग्ध किस प्रकार की दाई का दूध न पिलावे " वालक के रोग जानने का प्रकार ८० वालकों के विकारों में औषध किसको देना चाहिए? " " औषध मात्रा, कल्क से स्तन - लेप करे " " ज्वर की विशेष चिकित्सा 33 तालुपात की चिकित्सा 27 विषयसूची विषय पृष्ठ | तुण्ठनाभि और गुदापाक चिकित्सा ८० घृतपान विधि ८१ बालक के साथ वर्ताव कैसा हो? 39 स्त्री दुग्ध न मिले तो क्या करे? 31 अन्न प्राशन कब करावे? " 2 बालक की रक्षा कैसे करे? " " ग्रहों से पीडित बालक लक्षण 33 विद्याग्रहणकाल ८२ विवाह काल 39 विषय पृष्ठाङ्क उपर्युक्त काल से कम आयु वाले पति पत्नी होने पर दोप ८२ गर्भाधान न करने योग्य व्यक्ति 99 गर्भदो - चिकित्मा 13 गर्भस्राव न हो इसलिए मासा-नुमा चिकित्सा ८४ निवृत्त - प्रसवा की सन्तति अल्पायु होती है 29 | गर्भिणी की चिकित्सा कैसी हो 19 बालक के लिए हितकर योग 22
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चिकित्सास्थान- विषयसूची विषय पृष्ठ | पहला अध्याय चिकिरसाध्याय का उपक्रम १ शारीर तथा आगन्तुक व्रण भेद 39 आगन्तुक व्रण के कर्मविशेष के प्रयोजन २ दोपों के प्रसार शक्ति के अनुसार व्रणों के भेद व्रण के लक्षण के दो भेद तथा व्रण की निरुक्ति 33 वातादि व्रणों के लक्षग " व्रण के ६० प्रकार के उपक्रमों के नाम ३ उक्त उपक्रमों में कपायादि की शोधन - रोपणोभयकारिता आदि का निर्देश 91 व्रण के अवस्याभेद से करने योग्य उपचार " अपतर्पण का निरूपण ४ आलेप के विषय और फल 95 परिषेक के फल और प्रयोग 33 लभ्यङ्ग के फल और काल ५ स्वेदन, विलापन, उपनाह और पाचन के विषय तथा प्रयोग " 1 स्रावण, स्नेहपान, वमन, विरेचन छेदन, भेदन, दारण, लेखन के विषय ६ शस्त्राभाव में अलसो, वस्त्र आदि के द्वारा निर्लेखन 99 एषण तथा आहरण के विषय " व्यधन स्रावण, सीवन, संधान, पीडन, शोणितास्थापन, निर्वापण, तरकारिका, शोधन कपाय, शोधनवर्ति, कल्क के विषय और प्रयोग ७ शोधन सर्पि, तैल, रसक्रिया एवं अवचूर्णन के विषय और प्रयोग I रोपण कपाय, रोपण वर्त्ति, रोपण कवक, रोपण सर्पि के प्रयोग 33 विषय रोपण तैल, रोपण रमक्रिया के विषय और प्रयोग रोपण चूर्ण के विषय शोधन और रोपण को सर्व व्रणों में उपयोगिता शोधन रोपण विधि का मन्त्रवत् प्रयोग निर्देश अनिर्दिष्ट योग विषयक मीमांसा वातादि दुष्ट व्रणों में गणविशेष निर्देश धूपन, उत्सादन, अवसादन, मृदुकर्म, दारुणकर्म के विषय चारकर्म, अग्निकर्म, कृष्णीकरण, पाण्डुकर्म के विषय और प्रयोग a णों का वर्गीकरण प्रयोग प्रतिसारण, लोमसंजननोपाय लोमापहरणोपाय वस्तिकर्म, उत्तरवस्ति, बन्ध, पत्रदान, कृमिघ्र के विषय तथा प्रयोग बृंहण के विषय तथा प्रयोग विषजुष्ट के विज्ञान तथा चिकित्सा शिरोविरेचन, नस्य, कवलधारण, धूमपान, मधुसर्पि तथा यन्त्र के विषय बगी के लिये देय आहार पतातुर की उपसगों से रक्षा व्रण के सक्षेप से मूलाधिष्ठान, लक्षण तथा चिकित्सा शोधनरोपणादि में अपौषधि होने पर तत्सम अन्यौपघों के ढालने का निर्देश संपूर्ण योगोक द्रव्यों के अलाम में यथालाभ द्रव्यों के ढालने निर्देश एक ही व्याधि में यौगिक का प्रक्षेप, अयौगिक का त्याग व्रण - चणी के उपद्रवनिर्देश पृष्ठांक | विषय पृष्ठाङ्क दूसरा अध्याय I सद्योवणचिकित्सा का वर्णन १३ ९ व्रण की भाकृतिमात्र में हेतु विशेष 93 " आगन्तुक व्रण की आकृति " 3 व्रणाकृति ज्ञान का फल आगन्तुक व्रणों के ६ भेद 23 छिन्न भिन्न तथा कोष्ठ के 23 कोटभेद के लक्षण विद, क्षत, पिञ्चित तथा 33 लक्षण " छिन्न, भिन्न, विद्व तथा . पिचित, घृष्ट तथा मूर्धा १० अङ्गास्थित छिन्न की " 93 लक्षण १४ 93 घृष्ट के " 9 क्षत की $ 3 आदि चिकित्सा १५ " " कर्णच्छेदादि की विशेष चिकित्सा 59 " तिर्यक् छिन्न हस्त पाद की चिकित्सा 99 पृष्ठ तथा उरःस्थल के व्रणों की चिकित्सा संपूर्ण रूप से छिन्न हस्त पाद की ११ अन्य चिकित्सा 23 " व्रण रोपणार्थं चन्दनादि तैल " 1 १२ भिन्न नेत्र की चिकित्सा १६ उदरमेद की चिकित्सा " कोष्ठगत शल्य के असाध्य लक्षण 22 " कोष्टगत साध्यव्रण की चिकित्सा 22 " " भित्र कोष्ठ के साध्य लक्षण " 39 अन्त्रभेद की चिकित्सा " 9 सुक ( अण्डकोश ) भेद की " J चिकित्सा शिर में विद्ध व्रग की चिकित्सा 99 सामान्य रूप से शरीर के किसी 23 भी भाग में विद्व की चिकित्सा " विषय विशेष से विद्ध की चिकित्सा १८ समङ्गादि रोपण ल 93 तालीशादि रोपण तैल 22 क्षत और पिचित की चिकित्सा " " घृष्ट तथा विश्लिष्ट देहादि को १३ चिकित्सा 33
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२ विषयसूची चिपय पृष्ठाङ्क | विषय पृष्ठ | विषय शरीरादि के अनुसार व्रण मे तैल. नासाभन चिकित्सा २२ | वातशोणित पृष्ठाक घृत का प्रयोग १८ कर्णभन्न चिकित्सा के द्वैविध्य निराकरण २० / सद्योत्रण में पित्तविद्रध्युक्त 99 वातशोणित की सम्प्राप्ति, निरुक्ति घृतप्रयोग " कपालभग्न चिकित्सा " तथा पूर्वरूप के लक्षण / सद्यःक्षत व्रण में घृत तैल का परिपेक " पतनादि द्वारा शोथयुक्त अङ्ग में वातशोणित 19 regar- रोपण तैल के योग्य पुरुष 39 सद्योत्रण 95 शीतप्रदेहादि विधि 99 वातशोणित रोग के लक्षण " 3 चिकित्सा का काल 2 जङ्घा और ऊरुभम में कपाट शयन • दुष्टण के उपाय विधि वातमचल वातरक्त की चिकित्सा " 1 / सभी दुष्ट व्रणों में तैलघृत " 3 पित्तप्रबल वातरक्त की चिकित्सा २८ , कएक श्रोण्यादि भनों में शयनविधि २३ | रक्तप्रबल वातरक्त की चिकित्सा का प्रयोग वातादि भेद से कल्क सद्योत्रण के ६ प्रकार तीसरा अध्याय 29 चिरविमुक्त सन्धि की चिकित्सा १ ९ चिरकाण्ड भग्न की चिकित्सा 39 भग्न में वहिर्निर्गत अस्थि " शरीर के अगविशेपानुसार भन क्रिया की विशेषता २ ९ " लेप्मप्रधल वातरक्त की चिकित्सा " ससर्गज तथा सन्निपातज वातरक्त. 99 चिकित्सा " वातरक्त में सामान्य चिकित्सा 99 भग्न चिकित्सित अध्याय का उपक्रम 99 वातरक्त में उक्त तथा अनुक्त कृच्छ्रसाध्य भग्न के विषय भन के लिये सेव्यासेव्य विषय भनों के लिये सेव्य विषय बन्धन के द्रव्य / भग्नलेपन द्रव्य ऋतुविशेपानुसार भग्न चन्धन के काल की अवधि भग्न में वन्धका निर्देश पीडायुक्त भग्न में परिषेक विधि १ ९ भग्नसन्धानक तै " भग्न में पाक न होने के लिये " प्रयल का निर्देश 39 सम्यग्रढ भग्न का लक्षण " 2 चौथा अध्याय " वातव्याधि चिकित्सा का उपक्रम २० आमाशयगत वात में पद्मरण योग पकाशयगत वात चिकित्सा वस्ति तथा श्रोत्रादिगत " क्रियायोग का समह ३० वातरक्त में निषिद्ध आहार - विहार 39 २४ | अपतानक चिकित्सा " पक्षाघात 99 मन्यास्तम्भ ” अपतन्त्रक 27 २४ | अर्दित " 3 31 गृध्रसी आदि में सिरावेध 93 कर्णशूल चिकित्सा " ३१ " 9 " 1 " की विधि " भग्न में शीतोष्ण द्रव्य का निर्देश 99 स्वमांस, रक्त, सिरा " 11 तूणी प्रतूणी चिकित्सा ३२ भन्न आभ्यन्तर औषध / सत्रण भन की चिकित्सा कालदोपाश्रय भग्न की साध्यता अवस्थाभेद से भग्न सन्धि की स्थिरता में काल की अवधि भग्नविशेष से चिकित्सा विशेष भग्न में सक्षेप से सन्धि स्थापन उपिष्ट और विश्लिष्ट में चिकित्सा उस्पष्ट नखसधि चिकित्सा अंगुलि की चिकित्सा पादभन को चिकित्सा भन जङ्घा तथा ऊरु की चिकित्सा कटिभग्न चिकित्सा पशुका चिकित्सा स्कन्धभन चिकित्सा कूर्पर सन्धिमग्न चिकित्सा जानु, गुल्फ, मणिबन्ध मग्न. हस्ततल भग्न चिकित्सा नत और उन्नत 99 प्राप्त " " 99 स्नायु, सन्धि, अस्थि प्राप्त " 93 अस्थिगत वातचिकित्सा " 39 " शुक्रगत वात चिकित्सा " सर्वाङ्ग तथा एकाङ्गगत वातचिकित्सा " 9 कफ, पित्त, रक्त ससृष्ट २५ सर्व वात रोगियों के लिये भोजन 39 93 39 वात रोग में शाल्वण उपनाह २५ वात रोग में बिना अनि के " 3 स्कन्ध वक्ष त्रिक मन्यागत 29 चिकित्सा २१ | शिरोगत वात चिकित्सा 33 वात रोग में बस्ति प्रशसा स्वेद 19 स्वेदविधि 29 वात " 33 " 3 उक्त तथा अनुक्त वात रोगों 33 99 सामान्य चिकित्सा 39 वात रोग में तिश्वक सर्वि 99 वात रोग में अणु तैल 33 वात रोग में शतपाक तथा सहस्रपाक तैल 29 वात रोग में पत्रलवण की 99 " २६ | 39, काण्ड लवण, कल्याण 97 आध्मान प्रत्याध्मान चिकित्सा अष्ठीला प्रत्यष्ठीला चिकित्सा वातरोग में हिग्वादि " चूर्ण " संसृष्ट तथा आवृत वातचिकित्सा | मेदोवृत वातचिकित्सा 33 33 ऊरुस्तम्भ का निदान ऊरुस्तम्भ में आभ्यन्तर चिकित्सा " 2 ऊरुस्तम्भ में वाह्यचिकित्सा ३३ ऊरुस्तम्भ में भोजन विधि 19 ऊरुस्तम्भ में भी स्नेहावचारण की अवस्था का निर्देश वातरोग में गुग्गुलु " 2 कल्प छठा अध्याय अर्शचिकित्सा का उपक्रम अर्श के ४ प्रकार के साधनों ३३ उपदेश का अर्श में चारपातन विधि " चारद्वारा सम्यग्दग्ध - अतिदुग्ध • " 3 हीनदग्ध के लक्षण अक्षकों की चिकित्सा " लवण स्थानादिविशेष ३४ चाहुग्रीवा, अवटु, हनुमान की चिकित्सा हनुसधिभन की चिकित्मा दन्तमन की चिकित्सा वातरोग में लवणयोग प्रशसा २२ पाँचवाँ अध्याय 99 महावातव्याधि चिकित्सा का 32 उपक्रम " से अर्श के दाह २७ में विकल्प क्षारपात में विशेष विधि चारकर्म के पश्चात् कर्म चारकर्म में व्यतिक्रमसे २७ अर्थ का निर्देश 39 ३५ 39 महान 22
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विषय पृष्ठ | अशोंयन्त्र का कथन ३५ । अर्श पर आलेपन विधि ३६ अदृश्य अर्श में थापन योग 99 अर्श में दन्त्यरिष्ट अभयारिष्ट ३७ अर्श में दोषभेदानुसार चिकित्सा विशेष " अर्श में भल्लातक विधान 99 अर्श में दोषविशेष से अन्य प्रयोग 93 अर्श में वर्जनीय विषय सातवाँ अध्याय अश्मरी चिकित्सा का उपक्रम ३८ अश्मरी में स्नेहादि कर्म 29 वाताश्मरी में पाषाणभेदादिगण 99 पित्ताश्मरी में कुशादिगण 29 कफाश्मरी में वरुणादिगण ३ ९ शर्करास्मरी में पिचुकादिगण " " वास्थ्यादि योग 39 अश्मरी में त्रिकण्टकादि योग " J " क्षारयोग " " 39 तिलादि चारयोग 99 " 3 वादि कल्क " चीरयोग 33 " 9 वीरतरादि गण " 9 39 छेदोपदेश " 9 शस्त्र द्वारा अश्मरी निकालने की विधि ४० शस्त्रकर्म के पश्चारकर्म ४१ शस्त्रकर्म में रक्षणीय ८ मर्म ४२ आठवाँ अध्याय भगन्दर चिकित्सा का उपक्रम ४२ भगन्दरों के साध्यासाध्य का विचार " भगन्दरों में शस्त्र चिकित्सा विधि " 2 शतपोनक में शस्त्रक्रिया 39 शतपोनक में शस्त्रक्रिया के पश्चारकर्म ४३ उष्ट्रग्रीव भगन्दर की चिकित्सा " 9 परिस्रावी भगन्दर की चिकित्सा ४४ परिस्रावी भगन्दर में शस्त्रक्रिया 29 शिशुओं के भगन्दर में विरेचन, अभि शस्त्र तथा चारकर्म का निषेध 93 भगन्दर में आरग्वधाद्या वत्तिं 99 आगन्तुज भगन्दर चिकित्सा " त्रिदोषज भगन्दर चिकित्सा निषेध 31 भगन्दर में शस्त्र जनित व्यथा दूर करने का उपाय 99 वात - कफज भगन्दर में उपनाह स्वेद भगन्दर में त्रिकटुकादि योग भगन्दर व्रणशोधन वर्ग ४५ विषयसूची विषय पृष्ठाङ्क भगन्दर में उत्सादन योग ४५ रसाञ्जनादि रोपण कल्क " 39 कुष्ठादिशोधन कल्क 39 49 मागध्याथ रोपण तैल " 99 न्यग्रोधादि गण " 1 99 त्रिवृतादि तैल " 27 चित्रकादि तैल " 2 भगन्दर यन्त्र कथन 93 भगन्दर में वर्ण्य विषय नौवाँ अध्याय कुष्ठचिकित्सा का उपक्रम ४५ निदान 33 कुष्ठ में वर्ण्य विषय ४६ " आहार विहार का विभाग " 9 " सामान्य चिकित्सा 22 39 दोषविशेष से क्रिया विशेष " " महातिक्तक घृत ४७ " 3 तिक्त घृत 39 " कुछ सामान्य योग 33 द में लाक्षादि योग 39 " सैन्धवादि योग ४८ 1 " हेमचीर्यादि योग 39 श्विन में भद्रोदुम्बरी योग " " पूतिकीटादि योग 99 कृष्ण सर्पादि योग 39 कुक्कुट · पुरीष योग 99 99 चार योग " " 9 तैल योग ४ ९ 99 अवल्गुजाथा वर्त्ति 29 " तुत्थादि लेप " III II III III " महानील तैल " " श्विन में गोमूत्रादि योग ५० " पूतिकादि लेप 33 कुष्ठ में समप्रदोषनिकालने का उपदेश 99 " दोष शोधन का क्रम 39 " कुछ प्रायोगिक योग 93 दाहयुक्त कुष्ठी के लिये खान • प्रयोग ५१ क्रिमि पढ़े हुये कुष्ठ चिकित्सा " 1 कुष्ठ में वज्रक तैल 1 " 1 " महावज्रक तैल 33 " लाक्षादि तैल ५२ 11 खदिरादि यवागू " " प्रदेह, उद्धर्पण तथा विरेचन में तैलघृत की उपयोगिता " } " ऊँटनी के मूत्र का योग 29 " खदिर योग की प्रशंसा 33 । विषय पृष्ठाङ्क कुष्ठियों का पथ्यापथ्य ५२ दशवाँ अध्याय महाकुष्ट चिकित्सा का उपक्रम ५२ कुष्ठ में यवकल्प 99 " जौ के बने हुए भोज्य पदार्थ ५३ " अरिष्ट विधान " आसवविधान 39 सुराविधान " " अवलेह विधान 39 चूर्ण क्रिया " लौहरसायन " खदिर विधान 99 गुडूची - विधान RV एग्यारहवाँ अध्याय प्रमेह चिकित्सितोपक्रम प्रमेह के दो प्रकार प्रमेह की सामान्य चिकित्सा प्रमेह में वर्ज्य पदार्थ और पथ्य प्रमेह में शोधनविधि सर्वप्रमेह में ५ योग २० प्रमेहों में २० योग प्रमेहों में अरिष्ट, अयस् कृति, लेह, आसव, यवागू एवं कषाय योग विशिष्ट व्यक्तियों के लिए प्रमेह में विशेष चिकित्सा साधनरहित व्यक्तियों के लिये प्रमेह में विशेष चिकित्सा 29 39 " 9 " 3 ५४ " " ५५ ५५ == ५६ = ५७ " ५८ बारहवाँ अध्याय साध्य प्रमेह पिडकाओं के लक्षण 99 प्रमेहपिढकाओं में अवस्थानुसार क्रियाविशेष का निर्देश 33 प्रमेह में धान्वन्तर घृत ५ ९ प्रमेह रोग में तोच्णशोधनका उपदेश " 2 शरीर के निम्न भाग में ही पिढका होने में कारण 99 अपक तथा पक. पिढकाओं की विशेष चिकित्सा 19 प्रमेह में शालसारादि लेह " 3 " 9 नवायस लौह ६० " लोहारिष्ट शालसारादि गण " प्रमेह निवृत्ति के लक्षण 93 तेरहवाँ अध्याय मधुमेह चिकित्सा का उपक्रम ६० शिलाजीत की उत्पत्ति 99
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४ विषय पृष्ठाङ्क | शिलाजीत के भेद तथा धातुविशेष के अनुसार रस वीर्य में विशेषता ६० शिलाजतु की उत्तरोत्तर श्रेष्ठता ६१ । प्रधान शिलाजीत के लक्षण 39 पिलाजीत के प्रयोग का विधान 11 मधुमेह से स्वर्णमाक्षिक का विधान ६२ मधुमेह में तुवरक तैल का विधान " तुवरक तैल की सेवन विधि 39 तुवरक तैल को अभिमन्त्रि करने का मन्त्र 33 कतै का गुण 21 चौदहवाँ अध्याय उदर चिकित्सोपक्रम ६३ उदर रोगों की साध्यासाध्यता " उदर रोग में पथ्यापथ्य " 3 वातोदर चिकित्सा " " पित्तोदर चिकित्सा ६४ । मोदर चिकित्सा 99 प्योर चिकित्सा " उदररोगमें दोपानुलोमन की प्रशंसा " उदर रोगों में कतिपय सामान्ययोग " उदर रोग में मूत्रवर्त्ति ६५ उदर रोग में आनाहवत्तिं क्रिया " लोहोदर चिकित्सा ६६ उदर रोग में पट्पल घृत " यदाक्युदर में शिरावेध 33 लोहोदर में शिरादाह यद्वगुदोदर और परिस्रावी उदररोग की चिमा 33 जलोदर चिकित्सा ६७ उदर रोगों में दूध और जंगल जीवों के मोमरस का प्रयोग " } पन्द्रहवाँ अध्याय १ गर्भचिकित्सा का उपक्रम ६७ गर्भ के प्रकार 33 ' गर्भ में मन्त्र प्रयोग 99 गर्भ में गर्भ निकालने की क्रिया ६८ । मूढगर्भ को निकालने के लिए शस्त्र • प्रयोग " 1 शकर्म के पश्चारकर्म ६ ९ सूतिका रोग में ल ७० पाक यात " के विधानानुसार गुइची आदि चैट बनाने का भी निर्देश " विषयसूची विषय पृष्ठाङ्क सोलहवाँ अध्याय आम विद्वधियों में व्रणशोथ की भाँति चिकित्सा निर्देश ७० वातविधि चिकित्सा ७१ पैत्तिकविद्रधि चिकित्सा 33 रक्षादित " लैष्मिक विद्रधिचिकित्सा ७२ रक्तज आगन्तुज - विद्रधिचिकित्सा 12 लैष्मिकविधि में, सिरावेध 99 पक्कविद्रधिचिकित्सा 31 मजागत विद्रधिचिकित्सा 23 सत्रहवाँ अध्याय विसर्प नाडी स्तनरोग की चिकित्सा का उपक्रम ७३ विसर्प की साध्यासाध्यता एवं 1 सामान्य चिकित्सा 23 वातज विसर्प चिकित्सा " " पित्तज विसर्प चिकित्सा 91 पित्तजविसर्प में गौर्यादि घृत 23 कफजविसर्प चिकित्सा ७४ विसर्पों के लिए वरुणादि गण की 1 विशेषता 39 त्रिदोषज नाढीघ्रण की असाध्यता 33 वातज नाडीव्रण चिकित्सा " 3 पित्तज नाडीव्रण चिकित्सा " कोष्ठगत नाडीव्रण चिकित्सा 99 कफज नाडीव्रण चिकित्सा ७५ भागन्तुज नाडीव्रण चिकित्सा " अवस्था विशेष में, शस्त्रक्रिया निपेध " क्षार सूत्र से नाढीछेद विधि 39 नादियों में वर्ति विधान 33 स्तन्यदोष चिकित्सा ७६ अठारहवाँ अध्याय 1 आमग्रन्थिचिकित्सा १७७ आमप्रन्थि में स्नेहपानविधि, " वातजग्रन्थिचिकित्सा पित्तजग्रन्थिचिकित्सा 22 " कफजग्रन्थि चिकित्सा ७८ मेदोज ग्रन्थिचिकित्सा अपची चिकित्सा 23 33 अपची में अभिकर्म का विधान ७ ९ वातन अर्बुद चिकित्सा " पित्तज्ञ अर्बुद चिकित्सा • ८० कफज अर्बुद चिकित्मा 19 " " चातज गलगण्ड चिकित्सा ८१ कफज गलगढ चिकित्सा | विषय पृष्ठाङ्क गलगण्ड रोग में पथ्य ८१ मेद गलगण्ड चिकित्सा 99 उन्नीसवाँ अध्याय | वृद्धि में वर्ज्य विषय ८२ II वातज वृद्धि चिकित्सा I पित्तज वृद्धि - चिकित्सा I कफज वृद्धि चिकित्सा I मेद वृद्धि चिकित्सा I मूत्रज वृद्धि - चिकित्सा II II अन्वृद्धि चिकित्सा I उपदेश में सामान्य चिकित्सा ८४ I वातज उपदंश चिकित्सा " पित्तज उपदंश चिकित्सा " 1 उपदंश की अवस्थाभेद से चिकित्सा " उपदेश में चूर्ण विधान ८५ जम्ब्वादि योग " त्रिदोषज उपदेश को चिकित्सा I " " वातजश्लीपद चिकित्सा I पित्तजलीपद चिकित्सा I कफजलीपद चिकित्सा I श्लीपद में पानीयधार I ८६ बीसवाँ अध्याय अजगल्लिका चिकित्सा ८६ चिपचिकित्सा ८७ कुनख चिकित्सा 33 विदारिकाचिकित्सा 23 शर्करार्बुद- कच्छू विचर्चिका पामा की चिकित्सा " पाददारी चिकित्सा 33 अलस चिकित्सा " इन्द्रलु चिकित्सा " अरुसिका चिकित्सा ८८ दारुणक चिकित्सा " मसूरिका चिकित्सा " जतुमणि - मशक तिलकालक चिकित्सा " cuss व्यङ्ग नीलिका चिकित्सा " यौवनपिढका चिकित्सा 33 पद्मिनीकण्टक चिकित्सा परिवर्तिका तथा अवपाटिका- 23 चिकित्सा निरुद्धप्रकश चिकित्सा " I सनिरुद्धगुद चिकित्सा ८ ९ III वाक्ष्मीक · चिकित्सा II अहिपूतना चिकित्सा I ' गुदाश चिकित्सा I I इक्कीसवाँ अध्याय ९ ०
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विषय पृष्ठाङ्क अष्ठीलिका चिकित्सा ९ ० प्रथित चिकित्सा 99 कुम्भिका चिकित्सा " 3 अलनी- चिकित्सा मृति चिकित्सा 99 समूढपिडिका - चिकित्सा " अवमन्यचिकित्सा 33 पुष्करिका चिकित्सा स्पर्शहानि चिकित्सा 23 उत्तमा पिडिका चिकित्सा 19 शतपोनक चिकित्सा 99 त्वकूपाक तथा रक्तार्बुद चिकित्सा ९ १ बाइसवाँ अध्याय ओष्ठ रोग चिकित्सा ९ १ ओष्ठप्रकोप चिकित्सा 27 शीताद चिकित्सा 39 दन्तपुपुटक चिकित्सा " " दन्तवेष्ट चिकित्सा 33 शौपिर चिकित्सा ९ २ । उपकुश चिकित्सा " 3 दन्तवैदर्भ चिकित्सा 33 अधिदन्तक चिकित्सा अधिमांस चिकित्सा 33 दन्तनाडी चिकित्सा " दन्तहर्ष चिकित्सा " " दन्तशर्करा कपालिका की चिकित्सा ९ ३ कृमिदन्तक चिकित्सा 23 हनुमोक्ष चिकित्सा 32 जिह्वाकण्टक चिकित्सा 29 उपजिह्वा चिकित्सा 29 शुण्डिका चिकित्सा 99 तुण्डिकेरी अधुप - कूर्म संघात तालुपुप्पुर की चिकित्सा ९ ४ तालुपाक चिकित्सा " कण्ठरोहिणी चिकित्सा कण्ठशालक चिकित्सा अधिजिह्निका चिकित्सा ९ ५ एक्वृन्द- गिलायु - गलविद्रधि की चिकित्सा " 2 मुखपाक चिकित्सा मुखरोग में कवल विधि " असाध्य मुखरोग " " t तेइसवाँ अध्याय शोफचिकित्सा का उपक्रम ९ ६ शोथ के भेद " शोथ का निदान तथा संप्राप्ति 13 वातजादि भेद से शोध के लक्षण " विषयसूची ] विषय पृष्टाव दोषों के स्थानसंश्रय विशेष से शोथ में विशेषता ९ ६ शोथों के साध्यासाध्य विचार 11 शोथ के उपद्रव " शोध रोगियों के लिये वर्ज्य विषय ' ९ ७ दोपानुसार शोथ की चिकित्सा " शोथ में सामान्य चिकित्सा शोथ में अपथ्य " चौबीसवाँ अध्याय अनागताबाधप्रतिषेध अध्याय का उपक्रम ९ ८ | दन्तधावन विधि 22 जिह्वा निर्लेखन के लक्षण तथा गुण " मुखप्रक्षालन की विधि और गुण 99 नेत्राञ्जन की विधि तथा गुण 23 ताम्बूल भक्षण की विधि और गुण ९९ शिरोऽभ्यङ्ग के गुण 29 शिरोऽभ्यङ्ग के लिए तैल 11 केशप्रसाधनी ( कंधी ) और कर्ण में तेल ढालने के गुण " 3 अभ्यङ्ग के गुण 29 सर्वान परिपेक के गुण 99 स्नेहावगाहन के गुण 29 अभ्यङ्गादि में प्रकृति विशेष से तैल योग 22 अभ्यङ्ग के अयोग्य व्यक्ति " व्यायाम के विधि और गुण अति. व्यायाम के दोष, व्यायोम के अधिकारी १०० गु उदर्पण तथा उत्सादन के गुण " 3 गुण १०१ स्नान के अनधिकारी 11 अनुलेपन के गुण " " पुष्प, वस्त्र, रत्न धारण के गुण 99 मुखालेपन के गुण " 9 नेत्रा के गुण 99 देवता अतिथि विप्रपूजन के गुण 29 आहार के गुण 27 पादप्रक्षालन के गुण 33 पादाभ्यङ्ग के गुण " पादत्राण धारण के गुण १०२ केश नखच्छेदन के गुण 29 कवचधारण के गुण " 1 विश्राम करने के गुण " 9 टहलने गुण 27 सुखकर शय्या तथा आसन के गुण " ५ | विषय पृष्ठाक लाने के गुण १०२ | पैर दबाने के गुण " 3 तेज वायु सेवन के गुण दोष तथा निर्वात स्थान के गुण 33 धूप तथा छाया के गुण १०३ अग्निसेवन के गुण " " निद्रा के गुण 29 ऋतुभेद से पेय रसों का निर्देश १०४ त्रिदोष के शमन में व्यायाम का महत्व १०५ अधिक मैथुन के दोष 99 सद्वृत्त का उपसंहार १०६ पच्चीसवाँ अध्याय मिश्रक चिकित्सा का उपक्रम १०६ कर्णपाली रोगों की संख्या तथा नाम 99 परिपोट के लक्षण 23 उत्पात के लक्षण १०७ उन्मन्य के लक्षण दुःखवर्धन के लक्षण 33 परिलेही के लक्षण 99 कर्णपाली रोगों की सामान्य चिकित्सा 29 परिपोटक की चिकित्सा " उत्पात पालीरोग चिकित्सा " उन्मन्थ पालीरोग चिकित्सा " 1 परिलेही की चिकित्सा 99 कर्णपाली को पुष्ट और मृदु बनाने की चिकित्सा " 9 कर्णपालीवर्धन तैल १०८ पलित रोग " केश को काला करने के लिए सैरीयकादि तैल 39 मुख पर मर्दन करने के लिए त १० ९ राजाओं के योग्य अङ्गराग " J छब्बीसवाँ अध्याय क्षीणवल वालों के लिए वाजीकरण चिकित्सा का उपक्रम १० ९ वाजीकरण के योग्य मनुष्य 99 वाजीकरण की निरुक्ति ११० " मानसिक कीवता के लक्षण " 3 अत्यधिक मैथुन के लिए वाजीकरण " वाजीकरण लप्सी 22 शष्कुली 29 99 यस्ताण्ड योग 23 पूपलिका 19 " 3 विदारीकन्द योग 19
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६ विषय पृष्ठाव | वाजीकरण आमलक योग ११० " अण्ड योग १११ | $ 3 महिपादिशु योग 33 " अश्वत्थ योग 19 13 विदारीमूल योग 39 माप योग 29 गोधूमादि योग 59 " 9 पादाभ्यङ्ग योग 99 33 स्वयंगुतादि योग 39 29 कतिपय योग " } " चीर योग " 33 योग के फल " " सत्ताइसवाँ अध्याय सर्वोपघात शमनीय रसायन का उपक्रम ११२ रसायन के योग्य अवस्था तथा मनुष्य 39 रसायन विदङ्गतदुल योग 18 गम्भारी का योग ११३ खरेटी रसायन योग 33 वराहीकन्द रसायन योग 22 विजयसार आदि रसायन योग ११४ सन के फल का रसायन योग 33 अट्टाइवाँ अध्याय श्वेत चाकुची के बीजों का रसायन योग ११४ मण्डूकपर्णी स्वरस रसायन योग १ ९ ५ ग्राह्मीस्वरस रसायन योग I ग्राह्मी घृत रसायन " चचा रसायन योग 33 रसायन शतपाक वचा घृत ११६ आयुर्वर्द्धक रसायन " " विसकाथ रसायन योग 35 दारिद्र्यनाशक रसायन योग मेधावर्धक वचादि योग " अरिष्टशामक मध्वादियोग " सौभाग्यकारक गोचन्दनादि योग 29 सौभाग्यकारक पद्मादि योग ११७ बुद्धि मेधावर्धक गण आयुवर्धक गण उन्तीसवाँ अध्याय स्वभावव्याधिप्रतिनिपेधनीय रसा यन का उपक्रम ११७ २४ प्रकार के सोम 33 सोम सेवन की विधि 35 सोम सेवन का फट ११ ९ | विषयसूची विषय पृष्ठ | सोमों के सामान्य लक्षण १२० विविध सोमों के विशिष्ट लक्षण 33 सोमों की उत्पत्ति के स्थानों का निर्देश 33 Idea अध्याय निवृत्त संतापीय रसायनाध्याय का उपक्रम १२० रसायन सेवन के अयोग्य पुरुष सोमसदृश अन्य रसायन ओषधियाँ १२१ रासायनिक ओषधियों के सेवन का फल 33 रासायनिक विविध औषधियों के लक्षण " रासायनिक औषधिकों के उखाड़ने का मन्त्र १२२ पूर्वोक ओषधियों के उत्पत्ति प्रदेश " इकतीसवाँ अध्याय स्नेहो पयौगिक चिकित्सा का उपक्रम १२३ स्नेह की प्रशंसा " स्नेह के भेद एवं उनमें गोघृत तथा तिल तेल की प्रधानता " विविध स्थावर स्नेहों के गुण 29 काथ तथा स्नेह के पाक क्रम में एकदेशीय मत १२४ | पल कुढवादिमान परिभाषा " स्नेहपाककल्प 93 त्रिविध स्नेहपाक के लक्षण १२५ स्नेहसिद्धि के लक्षण " स्नेहपान विधि घृतपान के योग्य मनुष्य 13 तैलपान के योग्य मनुष्य 33 सापान के योग्य मनुष्य 1 जापान के योग्य मनुष्य दोष विशेष के अनुसार घृतपान 39 दोपों के संसर्ग विशेष में ६३ रस योग " 9 अच्छ स्नेहपान का निर्देश 22 स्नेहपान में काल विचार " स्नेहपान में उपद्रव स्वरूप तृष्णा की चिकित्सा १२६ स्नेह की मात्रा का निर्देश " स्नेहपान के काल की अवधि I सः स्नेहन योग I | स्नेहपान के अयोग्य मनुष्य १२७ I सम्यक स्निग्ध के लक्षण I अतिस्निग्ध के लक्षण I I विषय ठाड रुक्ष तथा अतिस्निग्ध के लिये प्रतीकार १२७ स्नेहपान के फ " 1 बत्तीसवाँ अध्याय स्वेद प्रयोग चिकित्सा का उपक्रम १२८ स्वेद के भेद " 2 तापस्वेद विधि $ 5 ऊष्मस्वेद तथा नाहीस्वेद की विधि " भूस्वेद तथा अश्मस्वेद की विधि " 1 | कुटी स्वेदन विधि " 1 प्रस्तरस्वेद विधि " 3 उपनाह स्वेद विधि १२ ९ अवगाहन तथा परिषेचन की विधि " दोपविशेष में स्वेदविशेष का उपयोग " 1 निरनिस्वेद 33 चतुर्विध स्वेदों के दो भेद 11 स्वेद के पूर्व स्नेह की आवश्यकता " 1 स्वेद के गुण " 1 सम्यक् चिन्न के लक्षण १३० अतिस्विन के लक्षण 31 श्वेद के अयोग्य रोगी " 3 स्वेदमाध्य व्याधियों में निपिद्ध स्थान में स्वेदन का विधान 29 स्वेदन के पश्चात् कर्तव्य " तैंतीसवाँ अध्याय दोषों के अवस्था विशेष से चिकित्सा विशेष का निर्देश 99 वमन विरेचन का विधान " चमन के अयोग तथा अतियोग के लक्षण चमन के सम्यग्योग के लक्षण १३१ 33 सम्यग्वमन हो जाने के बाद कर्तव्य " चमन कराने का फल " 3 वमन के अयोग्य रोगी चमन के अयोग्य रोगों में चमन का १३२ विशेष निर्देश 99 चमन के योग्य रोगी विरेचन औषध पीये हुए के लिये " अपथ्य १३३ चमन और विरेचन में दोषों के निकलने का क्रम विरेधन के अयोग्य तथा अतियोग " 2 के लक्षण " 3 सम्यग्विरेचन के लक्षण 22 विरेचन के बाद पथ्य विधान
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विषय पृष्ठाङ्क विरेचन के फल १३३ | विरेचन के अयोग्य रोगी " 3 विरेचन के योग्य रोगी १३४ चमन और विरेचन के दोष निर्हरण विशेषता " " विरेचन का सम्यक् प्रवर्त्तन न होने में कारण " 2 विरेचनीय औषध की श्रेष्ठत " 3 दुर्बल के दोपहरण में विशेष विधि " स्थान से चलित दोपों को अवश्य निकालने का निर्देश " रकोष्ठ के संशोधन की विधि " } शोधन का स्नेह स्वेदपूर्वक प्रयोग " " अतिस्निग्ध के लिये स्नेह विरेचन का निषेध " विरेचन के अयोग्य व्यक्ति 99 स्नेहसाम्य वालों के लिए संशोधन विधि 99 अविज्ञात कोष्ठ वालों के लिये सशोधन में विशेषता १३५ । राजा का योग्य विरेचन " 2 रूक्ष का संशोधन करने में दोष " " संशोधन के द्वारा सुखपूर्वक दोपों के निकालने का निर्देश " चौंतीसवाँ अध्याय वमन विरेचन दोषज व्याधि चिकि. रसा का उपक्रम १३५ चमन के अधोगमन व्यापद का निर्देश 99 वरेचन के ऊर्ध्वगमन व्यापद् का निर्देश १३६ सावशेष औषध व्यापद का वर्णन " " जीर्णोध व्याप का वर्णन " " अल्पदोष हरण व्यापद का वर्णन 99 वातशूल व्यापद का वर्णन 29 वमन विरेचन के अयोग व्यापद् का वर्णन १३७ अतियोग व्यापद का वर्णन " " वमन के अतियोग का वर्णन 99 विरेचन के अतियोग का वर्णन १३८ जीवशोणित और रक्त पित्त परीक्षा " आध्मान व्यापद का वर्णन 33 परिकर्त्तिकाव्याप का वर्णन 99 प्रवाहिका व्याप का वर्णन 1 ', १३ ९ औषध के प्रवृत्त वेग को रोकने से उत्पन्न अवस्था का वर्णन विबन्धव्यापद का वर्णन 22 २ सु ० चि ० विषयसूची | विषय पृष्ठ कतिपय वमन विरेचन व्यापों के अन्तर का निर्देश १३ ९ पूर्वोक्त व्यापदों का हेतु 39 पैंतीसवाँ अध्याय नेत्रबस्ति के प्रमाण, विभाग तथा चिकित्सा का उपक्रम १४० यस्ति की प्रशंसा " " वस्ति - साध्य रोग " यस्ति नेत्र का प्रमाण 99 चालक और वृद्धों की बस्ति में विशेषता १४१ वस्तिनेत्र के निर्माण द्रव्यों और आकृतियों का निर्देश 39 aft के निर्माण द्रव्य " वस्ति निर्माण की प्रक्रिया 23 aft के भेद 99 विशुद्ध देह में ही स्नेहवस्ति विधान का निर्देश १४२ aft कर्म के अयोग्य मनुष्य 99 रोग विशेष में केवल स्थापन का निर्देश 99 वस्ति द्वारा सर्वांगगत दोषों के हर का निर्देश 99 बस्ति की व्यापत्तियों का निर्देश १४३ छत्तीसवाँ अध्याय नेत्रवस्ति व्यापचिकित्सा का उपक्रम १४३ नेत्रप्रणिधान व्यापद का वर्णन एवं उसकी चिकित्सा 99 नेत्रदोष व्यापद् का वर्णन और उसकी चिकित्सा 99 वस्तिदोष व्यापद् का वर्णन और उसकी चिकित्सा १४४ वस्तिपीडन दोष व्यापद का वर्णन और उसकी चिकित्सा 93 afer द्रव्यदोष व्याप का वर्णन और उसकी चिकित्सा " 9 शय्यादि दोष व्यापद का वर्णन और उसकी चिकित्सा १४५ भयोग आदि व्यापदों का वर्णन और उनकी चिकित्सा 99 निरुहण तथा अनुवासन के काल की अवधि १४६ सैंतीसवाँ अध्याय | ' अनुवासन और उत्तरवस्ति चिकित्सा का उपक्रम १४६ विरेचन के उपरान्त अनुवासन की विधि " 9 9 | विषय पृष्ठाङ्क अनुवासन वस्ति का पूर्व कर्म १४६ अनुवासन के लिए तैलों का वर्णन " चित्रकादि तैल अनुवासनार्थः १४७ भूतकादि तैल 33 मधुकादितैल १४८ मृणाला दितैल " 9 त्रिफलादि तैल " 9 पाठादितैल 99 विडङ्गादि तैल 93 वायु के अतिप्रकोप में अशुद्ध पुरुष के अनुसान की विधि " 9 वायु के अतिप्रकोप में अस्निग्ध पुरुष के अनुवासन की विधि 99 दोषभेद से अनुवासन तैल 99 रात्रि में वस्तिदान का निषेध १४ ९ दिन में वस्ति प्रदान के गुण 99 अवस्था विशेष में रात्रि में भी अनुवासन की विधि " ऋतु विशेष के अनुसार वस्ति के काल में विशेषतायें " वाताधिक्य में सर्वदा अनुवासन aft की विधि " 9 बिना भोजन किये हुए को स्नेह वस्तिका प्रतिषेध भोजनोत्तर अविलम्ब अनुवासन देने का निर्देश 39 अनुवासन वस्ति देने की विधि 93 अनुवासन औषधि के एकबार में ही लौट आने में दोष १५० स्नेहहीन तथा स्नेहाधिक अनुवासन दोष " 9 सम्यग् अनुवासित के लक्षण 91 स्वस्ति के प्रथमादि दान से कार्य का निरूपण अनुवासन का फल " अनुवासन अथवा निरूह में से किसी एक वस्ति के अधिक सेवन में दोष १५१ स्नेहवस्ति का अवस्थाविशेष से विधान का निर्देश 29 अभ्यास से बस्ति आपद् विहीन होने का निर्देश " " दोपामिभूत स्नेहवस्ति के व्यापद् 29 पूर्वोक्त व्यापदों की चिकित्सा " अधिक भोजन करने पर स्नेहवस्ति देने से उत्पन्न व्यापद और उनकी चिकित्सा अशुद्ध देहवाले को अनुवासन देने में व्यापद और उनकी चिकित्सा "
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८ विषय पृष्ठाङ्क | स्नेह का अनुसरण उदर में होने पर व्यापद् तथा उनकी चिकित्सा १०१ स्वेदन तथा शोधन से रहित अवस्था मैं अल्प स्नेह देने पर व्यापद् और उनकी चिकित्मा १५२ अल्प भोजन किए हुए को मन्द गुण से व्यापद् और उनकी चिकिमा " स्नेह वस्ति के न निकलने पर व्या परकाल की अवधि का निर्देश " उपद्रव न करने वाले स्नेहवस्ति के न निकलने पर उपेक्षा का निर्देश " एक स्नेहवस्ति के बिना निकले दूसरी वस्ति न देने का निर्देश 39 उत्तरवस्ति विधि का निर्देश 93 उत्तरवस्ति के द्रव्य की मात्रा 19 स्त्रियों के उत्तरवस्ति के नेत्र का प्रमाण " स्त्रियों के लिए नेत्र प्रणिधान की विधि " स्त्रियों की उत्तरवस्ति में स्नेह का मान " J उत्तरवस्ति के योग्य वस्ति का निरूपण I पुरुषों को उत्तरस्ति के प्रणिधान की विधि १०३ त्रियों की उत्तरयस्ति प्रणिधान विधि " त्रियों के निरूहवस्ति के लिये काथ का प्रमाण 23 उत्तरवस्ति में स्नेह के न निकलने पर उसके निकालने का उपाय " वस्तिदाह में चिकित्सा 22 उत्तरयति का फल १५४ अड़तीसवाँ अध्याय निरूह विधान का उपक्रम 33 निरूह के प्रणयन की विधि 3 निरुह के अतियोग का निषेध १५० fies के लक्षण अनिन्दि के लक्षण 33 सुनिरुढ के लक्षण " 3 स्वति के गुग 39 देर तक निरूह के रहने से दोष 39 अन्न वाये हुए को आस्थापन का निषेध अन्न वाले के लिये आस्थापन देने से गुग " या विशेष में अन्न खाये हुए को भी निरूह देने का निर्देश १५६ विषयसूची विषय पृष्ठाङ्क | आस्थापन में उपयोगी द्रव्य १५६ । निरूह में दोषानुसार क्वाथ की मात्रा " वस्ति द्रव्य के योजन का क्रम 99 द्वादश प्रसृन प्रमाण का साधन " " शम्पाकादि आस्थापन १५७ । गुडूच्यादि आस्थापन 93 कुशादि आस्थापन " " लोध्रादि आस्थापन १५८ । भद्रादि आस्थापन 93 दशमूलादि आस्थापन " J वृपादि आस्थापन 29 रास्त्रादि आस्थापन 33 वातरोग में आस्थापन कल्पना १५ ९ पित्तरोग में आस्थापन कल्पना 99 कफरोग में आस्थापन कल्पना 11 शोगित रोग में आस्थापन कल्पना " 3 शोधनास्थापन कल्पना " 3 लेखनास्थापन क्वपना " 3 बृंहणास्थापन कल्पना 99 वाजीकरास्थापन कल्पना 33 पिच्छावस्ति कल्पना " } संप्राद्यास्थापन कल्पना " 3 पूर्वोक कल्पों से स्नेहवस्तियों के विधान का निर्देश 29 बन्ध्याओं को वस्ति देने के लिए शतपाक बला तैल " सच्चभेद से वस्ति का भेद 33 कालादि भेद से वस्ति भेद " } एरण्ड - बीजादि उत्क्लेशन वस्ति " 3 दोपहर स्ति १६० शमन वस्ति 33 माधुतैलिक वस्ति प्रशंसा माधुनैलिक वस्ति कल्पना 39 युक्तरथ वस्ति कल्पना 13 दोपहर वस्ति कल्पना " 3 सिद्धवस्ति कल्पना 23 मुस्तादि आस्थापन वस्ति 33 अनुक्त आस्थापन की कल्पना का सूत्र ” आस्थापना किये हुए लोगों के लिए वर्ण्य विषय 93 मायुतैलिक वस्ति की श्रेष्ठता में हेतु १६१ उन्तालिसवॉ अध्याय आतुरोपद्रव की चिकित्सा का उपक्रम ३६१ सशोधन किये हुए के अग्निमान्द्य का प्रतिकार " | संशोधन में हृतदोष का प्रमाण 33 विषय पृष्ठाक हृतदोष प्रमाण विशेष से अन्न संसर्जन क्रम में विशेषता १६१ अवस्थाविशेष से तर्पणादि क्रम १६२ मानसिक विकारों का उपचार " हृतदोष के प्रमाण में मतभेद 99 वलविशेष से अन्नसंसर्जनक्रम विशेषता " समर्जनक्रम के द्वारा तीव्र अग्नि में रसों के सेवन क्रम का निर्देश १६३ स्नेहपान तथा वमन किये हुए लोगों के लिये अन्न देने का क्रम " संशोधन के बाद वर्ज्य परिहार के समय की अवधि वस्ति में परिहार काल की अवधि " शुद्ध के समानधर्मी अन्य रोगियों का निर्देश " } स्नेहपान किये हुए लोगों के परि, हरणीय का परिहार न करने के दोप " पूर्वोक्त दोपों की चिकिस्सा १६४ सशुद्ध के द्वारा सेवन योग्य अन्न पान 99 चालिसवॉ अध्याय धूम - नस्य कवलग्रह चिकित्सा का उपक्रम १६४ धूमवत्ति के साधन द्रव्य 33 धूमपान की विधि १६५ धूम विशेष से धूमपान में विशेष विधि " धूमपान के अयोग्य 33 अकाल में धूमपान करने से होने वाले व्यापद " धूमपान के समयों का निर्देश " " धूमों के प्रत्येक कार्य १६६ धूमपान 33 धूम के योगातियोग के लक्षण 39 प्रायोगिक आदि धूमों के पीने की मर्यादा धूपन की विधि " 3 नस्य के लक्षण और उसके भेद 39 स्नैहिक नस्य के प्रयोग का वर्णन शिरोविरेचन के योग्य रोगी " स्नैहिक और वैरेचनिक नस्यों १६७ का काल 29 नस्यदान की विधि " स्नैहिक नस्य का प्रमाण 23 स्नैहिक नस्य के पश्चात् कर्तव्य कर्म "
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विषय पृष्ठाङ्क: स्नैहिक नस्य के योग, अतियोग तथा अयोग के लक्षण १६८ नस्य में शिरोविरेक स्नेह का प्रमाण " वैरेचनिक नस्य के योग, आयोग तथा अतियोग के लक्षण 33 अवपीडनस्य के योग्य पुरुष प्रधमन नस्य प्रयोग के विषय " नस्य के अयोग्य पुरुष १६ ९ । विषयसूची II विपय पृष्ठ | नस्य के व्याप १६ ९ | नस्य व्यापदों के दो प्रकार 31 at व्यापदों को चिकित्सा प्रतिमर्श नस्य का समय 99 प्रतिमर्श नस्य के गुण प्रतिमर्श की मात्रा नस्य सामान्य के गुण दोपविशेष से नस्य में स्नेहविशेष " चतुर्विध कल १७० विषय पृष्ठाक कफहर त्रिकटुकादि कवल १७० कवल तथा गण्डूप में भेद गन्डूप धारण के काल की अवधि 33 दोपविशेष से कवलविशेष का निर्देश 95 शुद्ध कवल के लक्षण " दाहनाशन तिलादि कवल मुसरोग में प्रतिसारण विधि R । प्रतिसारण में पश्चात् कर्तव्य कर्म "