श्रीगणेशाय नमः।

व्याख्या · ग्रन्थ

प्रशस्तपादभाष्य — न्यायकन्दली सहित

वैशेषिक दर्शनका पदार्थधर्मसङ्ग्रह: प्रशस्तपादभाष्य, श्रीधर भट्टकी न्यायकन्दली, दोनोंका हिन्दी अनुवाद और टिप्पणियाँ, संस्करणकी भूमिका सहित।

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14
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  1. प्राक्कथन और भूमिका 0 मूल
  2. मङ्गलाचरण और उद्देश 13 मूल
  3. साधर्म्यवैधर्म्यप्रकरण 20 मूल
  4. द्रव्य: पृथिवी, जल, तेज, वायु 25 मूल
  5. द्रव्य: सृष्टिसंहार, आकाश, काल, दिक् 13 मूल
  6. द्रव्य: आत्मा और मन 11 मूल
  7. गुण: साधर्म्य, रूपादि, संख्या 50 मूल
  8. गुण: परिमाण, पृथक्त्व, संयोग, विभाग, परत्वापरत्व 34 मूल
  9. गुण: बुद्धि, संशय, विपर्यय, स्वप्न, प्रत्यक्ष 17 मूल
  10. गुण: अनुमान 18 मूल
  11. गुण: अनुमानके अवयव, हेत्वाभास, निदर्शन 20 मूल
  12. गुण: स्मृति से शब्द तक 36 मूल
  13. कर्म 18 मूल
  14. सामान्य, विशेष, समवाय 19 मूल