श्रीगणेशाय नमः।
व्याख्या · ग्रन्थ
प्रशस्तपादभाष्य — न्यायकन्दली सहित
वैशेषिक दर्शनका पदार्थधर्मसङ्ग्रह: प्रशस्तपादभाष्य, श्रीधर भट्टकी न्यायकन्दली, दोनोंका हिन्दी अनुवाद और टिप्पणियाँ, संस्करणकी भूमिका सहित।
- पृष्ठ
- 14
- मूल
- 294
- प्राक्कथन और भूमिका
- मङ्गलाचरण और उद्देश
- साधर्म्यवैधर्म्यप्रकरण
- द्रव्य: पृथिवी, जल, तेज, वायु
- द्रव्य: सृष्टिसंहार, आकाश, काल, दिक्
- द्रव्य: आत्मा और मन
- गुण: साधर्म्य, रूपादि, संख्या
- गुण: परिमाण, पृथक्त्व, संयोग, विभाग, परत्वापरत्व
- गुण: बुद्धि, संशय, विपर्यय, स्वप्न, प्रत्यक्ष
- गुण: अनुमान
- गुण: अनुमानके अवयव, हेत्वाभास, निदर्शन
- गुण: स्मृति से शब्द तक
- कर्म
- सामान्य, विशेष, समवाय