शिव स्वरोदय - हिन्दी भाष्य सहित
Shiva Svarodaya with Hindi Translation 1899 · Khemraj Shri Krishna Das · 112 पृष्ठ · 12 खण्ड
विषय सूची
- शिवस्वरोदय । G पाटीका । श्रीः । श्रीशिवस्वरोदय । महामहोपाध्यायधर्मशास्त्राग्रगण्य श्रीयुत पण्डित मिहिरचन्द्रकृतभाषानुवादसमेत. श्रीशिवजी और पार्वतीजीका… 1–10
- श्रीः । शिवस्वरोदयः । भाषाटीकासमेतः । महेश्वरं नमस्कृत्यशैलजांगणनायकम् । गुरुं च परमात्मानं भजे संसारतारणम् । १… 11–20
- ( ) भाषाटीकासमेत । ११ व्यानोव्यापीशरीरेषु प्रधानादशवायवः । ४४ । अर्थ-समान नाभिदेशमें कंठके मध्यमें उदान और सब शरीरमें व्यापी व्यान वायु होताहै ये दश वायु… 21–30
- ( ) भाषाटीकासमेत । २१ स्वर और सायंकालको सूर्यका स्वर चलै तो उस दिन जय और लाभ कहाहै और विपरीत चलें तो वजेदे अर्थात् अनिष्ट फल होताहै । ८६… 31–40
- ( ) भाषाटीकासमेत । ३१ भागमें पवन चले तो उसको विषम कहै और हे पार्वति •उसका विपरीत फल जानना । १२७ । उभयोरेवसंचारंविषवंतंविदुर्बुधाः… 41–50
- ( ) भाषाटीकासमेत । ४१ गुणोंको वह उस स्वरको आकाशका जाने और वही स्वर योगियोंको योगका दाता होताहै । १६८ । पीतवर्ण चतुष्कोणंमधुरं मध्यमाश्रितम्… 51–60
- ( ) भाषाटीकासमेत । ५१ अर्थ- ( लं ) यह बीज पृथ्वी तत्वमें चतुरस्र ( चकोर ) सुवर्ण के समान प्रकाशमान पीतवर्ण -सुगंध ध्यान करना -और ध्यानका करनेवाला कांति व… 61–70
- ( ) भाषाटीकासमेत । ६१ अर्थ-जिस मनुष्यके श्वासके प्रवेश समयमें दूत अपने मुखसे वांछित बातको कहै तो हे सुंदरी गमन करते ही उस मनुष्यका अर्थ सिद्ध होताहै… 71–80
- ( ) भाषाटीकासमेत । ७१ अर्थ-इस विधिसे कामी पुरुष सब कामिनीयोंको नशमें करताहै परंतु मेरी यह सच्ची आज्ञाहै कि यह वशी करण किसी अन्य पुरुषको अर्थात् लंपटकोनकहै… 81–90
- ( ) भाषाटीकासमेत । ८१ पिंगलायांस्थितोजीवावामेदूतस्तुपृच्छति । तदाऽपिम्रियतेरोगीयदित्रातामहेश्वरः । ३२४… 91–100
- ( ) भाषाटीकासमेत । ९ १ अर्थ-यदि वामभुजा न दीखै तो भार्या नष्ट होगी इसमें संशय नहीं दक्षिण भुजा नदीखै तो बंधुओंका नाश होगा और एक मासमें अपनी मृत्यु होगी… 101–110
- L 111–112