विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र
Vishnu Sahasranama Stotra · Gita Press, Gorakhpur · 102 पृष्ठ · 11 खण्ड
विषय सूची
- फ ३५ न hp. 10. 343 751 । श्रीः । श्रीविष्णुसे होनामस्तोत्रम् ( हिन्दी अनुवादसहित ) त्वमेव माता च पिता त्वमेव त्वमेव बन्धुश्च सखा. त्वमेव… 1–10
- । जगत्की रचना करनेवाले ( ७ ब्रह्मा ) के तथा ब्राह्मण, तंप । ५ । और श्रुतिके हितकारी, सब धर्मोंको जाननेवाले, प्राणियोंकी कीर्तिको ( उनमें अपनी शक्तिसे… 11–20
- - सर्पके -उत्तम - सबके २४ । ( १७ ) १०४ वसुः सत्र भूतोंके वासस्थान, १०५ वसु-मनाः- उदार मनवाले, १०६ सत्यः सत्यस्वरूप, १०७ समात्मा - सम्पूर्ण प्राणियों में… 21–30
- साक्ष : -- हजार । ३८ । स्वभाव-स्वरूप, २३१ मर्दन व्यक्तया रनेवाले २३५ धारण ३ ९ । ( २७ ) २३६ सुप्रसादः - शिशुपालादि अपराधियोंपर भी कृपा करनेवाले, २३७… 31–40
- । ५२ । -शरीरों को : - जिससे समभाव-हविर्भाग -करने-लक्षित क्ष्मीजीको - संग्राम- । ५३ । : - मत्स्य-( ३७ ) संसारके निमित्त और उपादान कारण, ३६७… 41–50
- : - समस्त शेषरूप से 1 । ६६ । और की रक्षा न और जानने में ले सबके शरीर के ३, ५०० - ५०१ क्षिणः-दक्षिणा ( ४७ ) सोमपोऽमृतपः सोमः पुरुजित्पुरुसत्तमः… 51–60
- करने--सब - तीनों -: ७ ९ सुन्दर सुन्दर कड़ों नन्द-श्वर, विधे-वर्णन ६२२ चिलीमें वाले ( ५७ ) उदीर्णः सर्वतश्चक्षुरनीशः शाश्वतस्थिरः… 61–70
- रहित ७ सव: -है-किम्-६,७३१ पू - मुमुक्षु परमपद, बाले परम ना किये में उत्पन्न करने- । । ९ २ । वर्णवाले, वाले, ७४० ( ६७ ) चन्दनाङ्गदी - चन्दनके लेप और… 71–80
- जगत्-०३ । ०४ । रको नहा-पका गंत नस्त को : -४ यु- । ( ७७ ) धनुर्धरो धनुर्वेदो दण्डो दमयिता दमः । अपराजितः सर्वसहो नियन्तानियमोऽयमः १०५ ८५७ धनुर्धरः -… 81–90
- तीनों २६८ ता-I रूप, चा-मस्तं को ( ८७ ) यानी उनका फल देनेवाले, ९ ८२ यज्ञगुह्यम् - यज्ञों में 1. गुप्त ज्ञानस्वरूप और निष्काम यशस्वरूप, ९ ८३ अन्नम् -समस्त… 91–100
- २४२ और चिष्णु-४२ । तयां र. मिलने का पता-गीताप्रेस, पो ० गीताप्रेस ( गोरखपुर ) 101–102