पितृ स्वरूप आत्म विज्ञानोपनिषत् - मोतीलाल शास्त्री २
Part II Pitra Swarup Vigyanopanistha part 2 · 177 पृष्ठ · 18 खण्ड
विषय सूची
- अथ खण्डष्टात्मक " श्राद्धविज्ञान " - प्रन्थान्तर्गत " पितर " स्वरूपविज्ञानोपनिषत् द्वितीय काण्ड २ व्याख्याता एवं भाष्यकार पं ० मोतीलालशम्र्मा -… 1–10
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड wwwww प्रमाणोपनिषत् है । किसी भी विषय को देख कर कहना दृष्टि है, एवं किसी विषय को सुन कर कहना श्रुति… 11–20
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड प्रमाणोपनिषत् wwwwwwwww १३- ये अग्निष्वात्ता ये अनग्निष्वात्ता मध्ये दिवः स्वधया मादयन्ते… 21–30
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड प्रमाणोपनिषत् होकर न नीचे जाती न ऊपर जाती, जो प्राहुतियाँ नीचे शयन करती हैं, ( ये ही तीन आहुतियाँ हैं )… 31–40
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड प्रमाणोपनिषत् में क्या करना? इसका समाधान करती हुई श्रुति कहती है कि " इस दिन ऐसी वस्तु खानी चाहिए, जिसे देवता न खाते हों… 41–50
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड पितृणां पितर विज्ञानोपनिषद् " ब्रह्म वेदं सर्वम ” इस श्रौत सिद्धान्त के अनुसार ऋषि, पितर, असुर, देवता, गन्धर्व, सू, चन्द्रमा… 51–60
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्डं पितृपितरविज्ञानोपनिषत् भृङ्गिरा यही दोनों तत्त्व क्रमशः पितर देवता की प्रतिष्ठा हैं… 61–70
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड पितृणां पितर विज्ञानोपनिषत् www ऋषिमूर्ति प्रारणब्रह्म के मनप्रधान काम ( कामना ), प्राणप्रधान तप एवं वाक्प्रधान श्रम व्यापार… 71–80
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड पितृणां पितर विज्ञानोपनिषत् अग्नि अन्नाद है, सोम अन्न है । अन्नात्मक सोम अन्नादात्मक अग्नि का सखा ( मित्र - सहचारी ) अवश्य है,… 81–90
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड पितॄणां पितर विज्ञानोपनिषत् स्थिति में साधारण मनुष्यों को यद्यपि उक्त निगम ( वेद ) आगम ( पुराण ) सिद्धान्तों में परस्पर विरोध… 91–100
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड १ - " पुष्टि पूषा " ( ते ० ब्रा ० २ । ७१२ । १ ) । २ - " पशवो हि पूषा " ( शत ० ५ । २ । ५ । ८ )… 101–110
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड पितॄणां पितरविज्ञानोपनिषत् १२ - विष्णुः दो विजातीय पदार्थों का अथवा अनेक विजातीय पदार्थों का अन्तर्य्याम सम्बन्ध ( रासायनिक… 111–120
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड पितृणां पितरविज्ञानोपनिषत् निकलने वाली गौ नाम की रश्मियों का अवरोध करना " बलासुर " का कार्य है… 121–130
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड aaan प्राकृतिकाः - सप्त - दिव्यपितरः वैभ्राजाः दिव्य पितर विज्ञानोपनिषत् पितरः-अन्न प्रग्निष्वात्ताः १ १ ( दक्षिणा: )… 131–140
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड ४ ५ १ २ २ ३ ७२ ७२ ५ ऋतु पितर विज्ञानोपनिषत् १ ६ ५ ६ ३ ४ १ ४ ५ [ १३६ ] कल्पना की गई… 141–150
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड AllW टिक् दक्षिरमा ऋतु पितर विज्ञानोपनिषत् ( शीताल ) सूर्य: ( L ) दक्षिणा दिक् सोम शीत उत्तरा दिक् -[ १४६ ] श्राद्धविज्ञान… 151–160
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड प्रेतपितर विज्ञानोपनिषत् wwwwwww है । गायत्राग्नि प्रधान बन जाता है… 161–170
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड प्रेतपितर विज्ञानोपनिषत् * पुरुष के साथ चारों वर्णों का सम्बन्ध माना गया है… 171–177