श्रीगणेशाय नमः।
पितृ स्वरूप आत्म विज्ञानोपनिषत् - मोतीलाल शास्त्री २
Part II Pitra Swarup Vigyanopanistha part 2 · 177 पृष्ठ · 18 खण्ड
In English
Science of the Nature of Ancestors
This is the second volume of a series titled Shradha Vigyan written by Pandit Motilal Sharma. It contains five Upanishads regarding the nature of ancestors, including the Pramana Upanishad and the Pitra Upanishad, presented in Sanskrit with Hindi commentary.
This book answers
- What is the definition of pramana in vedic science?
- What are the different types of ancestral beings?
- What is the nature of the divine ancestors?
- How do seasonal ancestors relate to creation?
- What is the difference between pretas and other types of ancestors?
विषय सूची
- अथ खण्डष्टात्मक " श्राद्धविज्ञान " - प्रन्थान्तर्गत " पितर " स्वरूपविज्ञानोपनिषत् द्वितीय काण्ड २ व्याख्याता एवं भाष्यकार पं ० मोतीलालशम्र्मा -… 1–10
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड wwwww प्रमाणोपनिषत् है । किसी भी विषय को देख कर कहना दृष्टि है, एवं किसी विषय को सुन कर कहना श्रुति… 11–20
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड प्रमाणोपनिषत् wwwwwwwww १३- ये अग्निष्वात्ता ये अनग्निष्वात्ता मध्ये दिवः स्वधया मादयन्ते… 21–30
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड प्रमाणोपनिषत् होकर न नीचे जाती न ऊपर जाती, जो प्राहुतियाँ नीचे शयन करती हैं, ( ये ही तीन आहुतियाँ हैं )… 31–40
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड प्रमाणोपनिषत् में क्या करना? इसका समाधान करती हुई श्रुति कहती है कि " इस दिन ऐसी वस्तु खानी चाहिए, जिसे देवता न खाते हों… 41–50
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड पितृणां पितर विज्ञानोपनिषद् " ब्रह्म वेदं सर्वम ” इस श्रौत सिद्धान्त के अनुसार ऋषि, पितर, असुर, देवता, गन्धर्व, सू, चन्द्रमा… 51–60
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्डं पितृपितरविज्ञानोपनिषत् भृङ्गिरा यही दोनों तत्त्व क्रमशः पितर देवता की प्रतिष्ठा हैं… 61–70
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड पितृणां पितर विज्ञानोपनिषत् www ऋषिमूर्ति प्रारणब्रह्म के मनप्रधान काम ( कामना ), प्राणप्रधान तप एवं वाक्प्रधान श्रम व्यापार… 71–80
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड पितृणां पितर विज्ञानोपनिषत् अग्नि अन्नाद है, सोम अन्न है । अन्नात्मक सोम अन्नादात्मक अग्नि का सखा ( मित्र - सहचारी ) अवश्य है,… 81–90
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड पितॄणां पितर विज्ञानोपनिषत् स्थिति में साधारण मनुष्यों को यद्यपि उक्त निगम ( वेद ) आगम ( पुराण ) सिद्धान्तों में परस्पर विरोध… 91–100
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड १ - " पुष्टि पूषा " ( ते ० ब्रा ० २ । ७१२ । १ ) । २ - " पशवो हि पूषा " ( शत ० ५ । २ । ५ । ८ )… 101–110
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड पितॄणां पितरविज्ञानोपनिषत् १२ - विष्णुः दो विजातीय पदार्थों का अथवा अनेक विजातीय पदार्थों का अन्तर्य्याम सम्बन्ध ( रासायनिक… 111–120
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड पितृणां पितरविज्ञानोपनिषत् निकलने वाली गौ नाम की रश्मियों का अवरोध करना " बलासुर " का कार्य है… 121–130
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड aaan प्राकृतिकाः - सप्त - दिव्यपितरः वैभ्राजाः दिव्य पितर विज्ञानोपनिषत् पितरः-अन्न प्रग्निष्वात्ताः १ १ ( दक्षिणा: )… 131–140
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड ४ ५ १ २ २ ३ ७२ ७२ ५ ऋतु पितर विज्ञानोपनिषत् १ ६ ५ ६ ३ ४ १ ४ ५ [ १३६ ] कल्पना की गई… 141–150
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड AllW टिक् दक्षिरमा ऋतु पितर विज्ञानोपनिषत् ( शीताल ) सूर्य: ( L ) दक्षिणा दिक् सोम शीत उत्तरा दिक् -[ १४६ ] श्राद्धविज्ञान… 151–160
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड प्रेतपितर विज्ञानोपनिषत् wwwwwww है । गायत्राग्नि प्रधान बन जाता है… 161–170
- श्राद्धविज्ञान द्वितीय खण्ड प्रेतपितर विज्ञानोपनिषत् * पुरुष के साथ चारों वर्णों का सम्बन्ध माना गया है… 171–177