आत्म विज्ञानोपनिषत् - मोतीलाल शास्त्री ४
Part IV Atmgativigyanopanishta Part 4 · 253 पृष्ठ · 26 खण्ड
विषय सूची
- अथ खण्डचतुष्ट्यात्मक ' श्राद्धविज्ञान ' ग्रन्थान्तर्गत श्रात्मगतिविज्ञानोपनिषत् चतुर्थ खण्ड पं. मोतीलाल शास्त्री वेदवीथिपथिकः ब्राह्मणो ब्रह्मन्… 1–10
- श्राद्धविज्ञान चतुर्थ खण्ड निगमानुगता पितृस्तुति अपने ऋतसोमध से स्वरूपतः ' ऋतासः ' ( सौम्य ) भी पितर देवप्राणानुशय सम्बन्ध से ' सत्यासः ' ( आग्नेय ) बनते… 11–20
- श्राद्धविज्ञान चतुर्थ खण्ड आत्मगतिविषये - प्रश्नपरम्परां सर्वथा जड़ हैं । यदि पुरुष केवल पञ्चभूतमय ही होता, तब तो उस अवस्था में उस ज्ञानधर्म का सर्वथा… 21–30
- श्राद्धविज्ञान चतुर्थखण्ड आत्मगतिविषये - प्रश्नपरम्परा श्रादित्याच्चन्द्रमसं, चन्द्रमसो तान् मासेभ्यः सम्वत्सरं, सम्वत्सरादादित्यं विद्युतम् तत्… 31–40
- श्राद्धविज्ञान चतुर्थ खण्ड आत्मगतिमूलकात्मस्वरूपपरिचय वक्तव्य यही है कि अन्नमय के भीतर सूक्ष्म प्राणमयकोश प्रतिष्ठित है । यही शरीर का विधर्त्ता है… 41–50
- श्राद्धविज्ञान चतुर्थ खण्ड आत्मगतिमूलकात्मस्वरूपपरिचय ७ ५ १ – श्रव्यक्तात्मा — स्वायम्भुवः ( ब्रह्मा ) ६ ४२- - यज्ञात्मा -पारमेष्ठयः ( यज्ञः ) }• +… 51–60
- श्राद्धविज्ञान चतुर्थखण्ड़ गत्या रूढः प्रत्यगात्मा तदित्थंप्रत्यगात्मनि - शरीरदशायां ( स्थूलशरीरदशायां ) क्षणिक नियमित-नित्यगतेः, नियमितनित्यभावगतेः,… 61–70
- श्राद्धविज्ञान चतुर्थं खण्ड ' श्रात्मोत्कान्तिनिमित्तानि www कहलायगी । अपने सांस्कारिक काल की अपेक्षा केवल ' कालमृत्यु ' ही व्यवस्थित है, एवं ईश्वरीयकोश… 71–80
- श्राद्धविज्ञान चतुर्थ खण्ड आत्मोत्क्रान्तिपरिचायकाः के बिजली चमकती दिखलाई पड़ती है । मेघाच्छन्न प्रकाश में इतर व्यक्तियों द्वारा दृष्ट बिजली भीइसे दिखलाई… 81–90
- श्राद्धविज्ञान चतुर्थं खण्ड श्रात्मगतिनिमित्तानि १ - यज्ञः ( स्वार्थ: ) २ - तपः ( परार्थः ) ३ - दानम् ( परमार्थ ): १. – इष्टम् ( स्वार्थः ) २ - प्रातः (… 91–100
- श्राद्धविज्ञानः चतुर्थ खण्ड आत्मगतिनिमित्तानि द्वारा प्रज्ञान मन पर जब सोरतेज का प्रबल आक्रमण होता है, तो अमावस्या के चन्द्रमा की भाँति प्रज्ञान-मन… 101–110
- & श्राद्धविज्ञान चतुर्थखण्ड पञ्चभूतानुगत व्याननाड़ी - विवर्त्त परिलेख: -१ प्रस्थामि + ४८०० मधुरो रसः २ मास ४८०० पीती वर्णः ३- त्वचायां + ४५०० साम स्पर्शः… 111–120
- श्राद्धविज्ञान चतुर्थखण्ड श्रात्मगतिनिमित्तानि ( आकारभेद ) ही पदार्थ भेद प्रतीति का कारण है । इसी छन्दोभेद से वह एक नाना रूप में परिणत हो रहा है… 121–130
- श्राद्धविज्ञान चतुर्थं खण्ड आत्मगतिंनिमित्तानि परिवर्तनशीला है, ईश्वरानुगता निमित्तचतुष्टयी - याथातथ्यतोऽर्थान् व्यदधाच्छाश्वतीभ्यः समाभ्य: ' इस… 131–140
- श्राद्ध विज्ञान चतुर्थ खण्ड आत्मगतिनिमित्तानि यह पार्थिवसंस्था भूपिण्डानुगत दक्षिणभाव से युक्त है, अतएव तदनुगतादिक् दक्षिणदिक् ही मानी गई है… 141–150
- श्राद्धविज्ञान चतुर्थ खण्ड ब्रह्मपथातिवाहिक परिलेख: -आत्मगतिनिमित्तानि ब्रह्मपथः । देवपथः । देवयानः । उत्तरमार्गः । शुक्लमार्गः । प्रकाशमार्गः… 151–160
- श्राद्धविज्ञान चतुर्थ खण्ड winn आत्मगतिनिमित्तानि प्रतिष्ठित है । इस दक्षिणोत्तर दिक् की अपेक्षा देवयानपथान्तर्गत ब्रह्मपथ से सम्बन्ध रखने वाले… 161–170
- श्राद्धविज्ञान चतुर्थ खण्ड आत्मगति निमित्तानि wwwwwww - " तद्य इत्थं विदुः- ये चेमेऽरण्ये श्रद्धा - तप इत्युपासते, तेऽचिषमभिसम्भवन्ति, अर्चिषोऽहः, अह्न… 171–180
- श्राद्धविज्ञान चतुर्थं खण्ड भूपिण्डानुगत आकाश परिलेखः परामुक्तिस्थानम् ( श्रात्मगति त्रैलोक्य ) उ.ध्रुव उत्तराकाशः उत्तराकाश: ४० अंशात्मकः , प्रदेश में… 181–190
- श्राद्धविज्ञान चतुर्थ खण्ड आत्मगतिनिमित्तानि इस दूसरी क्रमगति के सद्गति, दुर्गति, योनिगति ये तीन विवर्त्त बतलाए गए हैं… 191–200
- श्राद्धविज्ञान चतुर्थ खण्ड आत्मगतिनिमित्तानि प्रसिद्ध देवता और असुर इस प्रकार अर्द्ध- अर्द्ध सम्पति के भोक्ता बने हुए हैं… 201–210
- श्राद्धविज्ञान चतुर्थ खण्ड आत्मगति निमित्तानि १ २ ३ ४ १ २ ३ ४. १ २ १ २ ३ ४ ५ " प्रो - श्रा - व - य " - " अ - स्तु - श्रौ - षट् " - " य - ज " - " ये - य -… 211–220
- श्राद्धविज्ञान चतुर्थखण्ड आत्मगतिनिमित्तानि शुत्री से सम्बन्ध रखने वाले त्रैलोक्य - त्रिलोकीरूप पार्थिवलोकविवर्त्त का स्पष्टीकरण किए बिना देवस्वर्गस्वरूप… 221–230
- श्राद्धविज्ञान चतुर्थखण्ड www आत्मगति निमित्तानि wwwwwwm सन्तरण इसी गौप्रारण से होता है, जैसा कि आगे स्पष्ट होने वाला है… 231–240
- श्राद्धविज्ञान चतुर्थं खण्ड श्रात्मगतिनिमित्तानि से चार विवर्त्त हैं । ब्रह्मलोक में पहुँच जाना सालोक्य है, ब्रह्मसान्निध्य प्राप्त कर लेना सामीप्य है,… 241–250
- [ २१७ ] आत्मगतिविवर्त्तभावाः ↓ नित्यगतिः क्रमगतिः सम्वत्सरगतिः अहरहर्गति + ↓ अगतिगतिः लोकालोकगतिः इहलोकगतिः समवलयम् भूमोदर्कसमवलयम् क्षीणोदर्कसमवलयम् 4… 251–253