प्रश्नोपनिषद्
Prashnopanishat · 299 पृष्ठ · 30 खण्ड
विषय सूची
- ॐ अथर्ववेदीय-प्रश्नोपनिषत् - हिन्दीविज्ञानभाष्य पं. मोतीलाल शास्त्री वेदवीथीपथिक: ॐ अथर्ववेदीय -प्रश्नोपनिषत् - हिन्दीविज्ञानभाष्य पं ० मोतीलाल शास्त्री… 1–10
- प्रश्नोपनिषत् - हिन्दी विज्ञानभाष्य विषय - सूची विषय प्रथमप्रश्नः -१- रयिप्राणनिरूपणात्मक प्रथम प्रश्न ( रयिप्राणात्मको महानात्मा पारमेष्ठ्यः ) मूलपाठ… 11–20
- प्रथम प्रश्न प्रश्नोपनिषद्विज्ञानभाष्य रयिप्राणनिरूपण तद्ये ह वै तत्प्रजापतिव्रतं चरन्ति ते मिथुनमुत्पादयन्ते… 21–30
- प्रथम प्रश्न प्रश्नोपनिषद्विज्ञानभाष्य रविप्राणनिरूपण अथ अधिकारिस्वरूप रहस्यम्-प्राचीन भारत की वैदिककालीन सभ्यता की एवं सभ्यता में प्रचलित व्यवस्थाओं की… 31–40
- प्रथम प्रश्न ३- प्रारणो वा अर्कः । ' ५- चन्द्रमा व प्राणः । ७ - वायुर्वे प्राणः । ६ - वायुर्मे प्राणे श्रितः… 41–50
- प्रथम प्रश्न प्रश्नोपनिषद्विज्ञानभाष्य रविप्राणनिरूपण सकता, परन्तु इतना अवश्य कहेंगे कि इस अर्थ से पाठकों की वेद की ओर प्रवृत्ति अवश्य ही होगी… 51–60
- प्रथम प्रश्न प्रश्नोपनिषद्विज्ञानभाष्य रविप्राणनिरूपण " रथिर्वा एतत्सर्वं यन्मूर्तं चामूर्तं च तस्मान् मूत्तिरेव रयिः ” । -यह कहा है… 61–70
- प्रथम प्रश्न प्रश्नोपनिषद्विज्ञान माध्य रयिप्राणनिरूपण खर्च हो गया, अतएव वैज्ञानिकों ने इस मण्डल का ' सर्वं वा श्रत्सारिषम् ' - इस व्युत्पत्ति से संवत्सर… 71–80
- प्रथम प्रश्न १- श्रन्नादी ३- भद्रा ५- अनिलया ७- अनाप्ता ६ - अमाइष्टा ११- अपूर्वा रविप्राणनिरूपण प्रश्नोपनिषद्विज्ञानभाष्य २- अन्नपाली ४- कल्याणी ६- अपभया… 81–90
- अथ धिषणाप्राणनिरूपणात्मको द्वितीयप्रश्नः [ विज्ञानभाष्य ] कम्बन्धी कात्यायन ने पिप्पलाद से जो प्रजासृष्टिविषयक प्रश्न किया था, सृष्टि-रहस्यवेत्ता पिप्पलाद… 91–100
- द्वितीय प्रश्न प्रश्नोपनिषद्विज्ञानभाष्य धिषणाप्राणनिरूपण ब्रह्मा माना जाता है । वह हमारा यही याम्यप्राण है यही ब्रह्मा है… 101–110
- द्वितीय प्रश्न प्रक्रिया- -व्यूहन की त्रिलोकी । व्यूढा वायुः की प्रकार पांच । अग्निः = इन्द्रः = पृथिवी अन्तरिक्षं द्यौः - १ २- ३-३ २ प्रकाशक द्यौरिन्द्रः… 111–120
- द्वितीय प्रश्न प्रश्नोपनिषद्विज्ञान माध्य विषणाप्राणनिरूपण अन्तर्यामी सत्य बन रहा है । अथर्वासोमरूप रयि और अंगिरारूप प्राण का जो चरित है - अर्थात् संसार… 121–130
- प्रश्न प्रश्नोपनिषद्विज्ञानभाष्य प्रज्ञाप्राणनिरूपण स तस्य श्रात्मा'- श्रात्मा का यही साधारण लक्षण है । इस लक्षण के अनुसार घड़े का आत्मा मिट्टी है… 131–140
- तृतीय प्रश्न ( ३ ) तीसरा प्रश्न है-१ - यजुर्वेद ३१ । १६ । प्रज्ञाप्राणनिरूपण प्रश्नोपनिषद्विज्ञानभाष्य । २ । -ऋ-२- शत ० ब्रा ० ७ । ५ । २ । ६… 141–150
- तृतीय प्रश्न प्रश्नोपनिषद्विज्ञानभाष्य प्रज्ञाप्राणनिरूपण यह आदित्यात्मक बाह्यप्राण उदित होता है । सचमुच बात यथार्थ है… 151–160
- तृतीय प्रश्न प्रश्नोपनिषद्विज्ञानभाष्य प्रज्ञाप्राणनिरूपण तीसरी है निद्रा-और प्यास है, मनएव इन दोनों वृत्तियों को हम असा करने के लिए तप्यार चतुर्थ हैं… 161–170
- प्रश्नोपनिषद्विज्ञान माध्य तृतीय प्रश्न एते नाडीसहस्रेषु वर्तन्ते जीवरूपिणः । १- ध्यानबिन्दू ० ५१-५८ एवं ६०… 171–180
- चतुर्थ प्रश्न ११- २ - प्रत्रिमरीची १-२ - वसिष्ठागस्त्यौ १-२ ऋतुदक्ष १-२ - मृग्वङ्गिरसौ १- विश्वामित्रः १-मत्स्यः १-२ - पुलस्त्य पुलहौ १- शत ० ब्रा ० ८… 181–190
- चतुर्थ प्रश्न प्रश्नोपनिषद्विज्ञान भाष्य प्रज्ञामात्रा प्राणमात्रायुक्त १० इन्द्रिएँ-१- वाक् ( प्राणप्रधान प्रतएव कर्मेन्द्रिय ) २- प्राण ( ज्ञानप्रधान… 191–200
- चतुर्थ प्रश्न प्रश्नोपनिषद्विज्ञानभाष्य भूतप्राणनिरूपण का जाग्रदवस्था में जो सम्बन्ध होता है स्वप्न में यही संस्कार पुनः पुनः उद्बुद्ध होकर क्रीड़ा किया… 201–210
- चतुर्थ प्रश्न प्रश्नोपनिषद्विज्ञानभाष्य भूतप्राणनिरूपण अल्पता से इसमें हैं । केवल नाममात्र में अन्तर है- जैसा कि ' कठोपनिषत् ' के ' ब्रह्मसत्य- देव सत्य… 211–220
- अथ श्रव्यक्तप्राणनिरूपणात्मकः पञ्चमप्रश्नः ५ ५- स्वयम्भूः - अव्यक्तम् " स एव सर्वं यद्भूतं यच्च भाव्यं सनातनम्… 221–230
- पंचम प्रश्न प्रश्नोपनिषद्विज्ञान माध्य अव्यक्तप्राणनिरूपण श्रश्वमेध है । अकं अश्वमेध की समष्टि ही ' अर्काश्वमेध ' है… 231–240
- पश्चिम प्रश्न प्रश्नोपनिषद्विज्ञानभाष्य अव्यक्तप्राणनिरूपण ६- चत्वारिंशस्तोम — ( २४ ) ७- चतुश्चत्वारिंशस्तोम - ( ४४ ) → छन्दोमास्तोम नाम से प्रसिद्ध – '… 241–250
- पश्वम प्रश्न प्रश्नोपनिषद्विज्ञानभाष्य अध्यरात्राणनिरूपण अब यदि वह त्रिमात्र से युक्त पूर्ण ( क्षर से उस ' पर ' का ध्यान करता है तो वह: मृत्यु के अनन्तर -… 251–260
- षष्ठ प्रश्न प्रश्नोपनिषद्विज्ञानभाष्य षोडशी प्रजापतिनिरूपण ष्ठित होते हैं । मनुष्य विना विषय के अपने ज्ञान से नई - नई वस्तु बनाया करता है… 261–270
- षष्ठ प्रश्न प्रश्नोपनिषद्विज्ञान माध्य षोडशी प्रजापतिनिरूपण व्यवहारों में सर्वथा अक्षम नहीं होता… 271–280
- षष्ठ प्रश्न प्रश्नोपनिषद्विज्ञान भाष्य षोडशोप्रजापतिनिरूपणं प्राण उसके अपान, उदान, समान, व्यानरूप में परिणत होता है… 281–290
- षष्ठ प्रश्न प्रश्नोपनिषद्विज्ञान भाष्य षोडशी प्रजापतिनिरूपण श्री कृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मत्यं च… 291–299