पण्डित दीनानाथ शर्मा शास्त्री सारस्वत कृत
सनातन धर्मालोक
सनातन धर्मके आचारों — शिखा, यज्ञोपवीत, गायत्री, षोडश संस्कार, प्रातःसे रात्रि तकके नित्यकर्म और पर्वों — का शास्त्रीय तथा वैज्ञानिक विवेचन। यहाँ प्रत्येक प्रकरण मुद्रित ग्रन्थसे ज्यों-का-त्यों दिया गया है — न कुछ जोड़ा गया है, न घटाया, न सारांश बनाया गया है। हर पृष्ठ अपने मुद्रित पृष्ठाङ्कके साथ मूल स्कैनसे जुड़ा है।
Sanātana Dharmālok — a scholarly account of Hindu practice, from the śikhā and the yajñopavīta to the sixteen saṃskāras and the festivals. Every chapter here is the printed text itself, reproduced verbatim from the scan and cited to its printed page. Nothing is summarised, paraphrased or machine-written.
- प्रकरण
- 95
- पृष्ठ
- 904
- सुमन
- ५
यह ग्रन्थ क्या है
‘श्रीसनातनधर्मालोक’ ग्रन्थमालाका यह पञ्चम सुमन है, जिसका विषय ग्रन्थकारके अपने शब्दोंमें है — ‘हिन्दुधर्मके आचार-विचार एवं पर्व तथा उनका वैज्ञानिक-रहस्य’। शिखा, यज्ञोपवीत, गायत्री, षोडश संस्कार, प्रातः जागरणसे रात्रि शयन तकके नित्यकर्म, भोजन-विधि, तिथि-पर्व और व्रत — इन सबका शास्त्रीय आधार क्या है और उनके पीछे कौन-सा प्रयोजन है, इसका विवेचन ग्रन्थकार वेद, स्मृति और पुराणोंके प्रमाण देकर करते हैं। प्रथम संस्करण विजयादशमी, संवत् २०१३ (सन् १९५६) को नई देहलीसे प्रकाशित हुआ।
This is the fifth volume — the book’s own word is सुमन, a flower — of the Śrī Sanātana-Dharmālok series, and its subject, in the author’s own words, is “the customs, ideas and festivals of Hindu practice, and the reasoning behind them”. It treats the śikhā and the yajñopavīta, the Gāyatrī, the sixteen saṃskāras, the daily observances from waking to sleeping, the rules of food, and the festival calendar — arguing each from cited Vedic, Smṛti and Purāṇic authority. First published at Delhi on Vijayādaśamī, Vikrama Saṃvat 2013 (1956 CE).
ग्रन्थकार
प्रणेता पण्डित दीनानाथ शर्मा शास्त्री सारस्वत — विद्यावागीश, विद्याभूषण, विद्यानिधि। वे सनातनधर्म संस्कृत कालेज, मुलतानके भूतपूर्व प्रिन्सिपल तथा संस्कृत-हिन्दी महाविद्यालय, रामदल, दरीबाकलां, देहलीके प्रिन्सिपल रहे। ग्रन्थमालाका प्रकाशन श्रीनारायण शर्मा ‘राजीव’ सारस्वत शास्त्रीने, श्रीसनातनधर्मालोक-ग्रन्थमाला कार्यालय, लाजपतनगर, नई देहलीसे किया।
पाठके विषयमें
यहाँ जो कुछ है वह ग्रन्थकारके अपने शब्द हैं। कोई सारांश नहीं बनाया गया, कोई वाक्य फिरसे नहीं लिखा गया, और किसी यन्त्रने इसे नहीं रचा — मुद्रित पृष्ठ जैसा है वैसा ही यहाँ है, अशुद्धियों सहित। प्रत्येक प्रकरण अपने मुद्रित पृष्ठाङ्कके साथ दिया गया है और मूल स्कैनसे जुड़ा है, जिससे पाठक किसी भी वाक्यको उसके अपने पृष्ठपर देखकर मिला सके।
- 1श्रीगणेशका मङ्गलाचरण
- 2शिखाकी वैज्ञानिक - रहस्यपूर्णता
- 3यज्ञोपवीत - रहस्य
- 4गायत्रीमन्त्रकी महत्ताका रहस्य
- 5कच्छबन्ध - रहस्य
- 6षोडश संस्कार- रहस्य
- 7सीमन्तोन्नयनका - रहस्य
- 8जातकर्म - रहस्य
- 9नामकरण - रहस्य
- 10निष्क्रमण - रहस्य
- 11अन्नप्राशन- रहस्य
- 12चूडाकरण - रहस्य
- 13वैवाहिक - विधियोंका रहस्य
- 14कन्याका विवाह कब?
- 15वैवाहिक रीतिविशेषोंका रहस्य
- 16वैवाहिक विधियोंका रहस्य
- 17विवाह तथा अग्न्याधानका रहस्य
- 18परिव्रज्या वा संन्यासका रहस्य
- 19पितृमेध वा अन्त्यकर्म
- 20हिन्दुधर्मके याचार - विचारोंका वैज्ञानिक- रहस्य
- 21ब्राह्ममुहूर्त में उठनेका विज्ञ
- 22प्रातः स्मरणपद्य
- 23प्रातः हस्तदर्शनका विज्ञान
- 24प्रातः भूमिवन्दन
- 25प्रातः मलमूत्रका व्याग
- 26मट्टी से हाथोंकी शुद्धि
- 27कहां - कहां लघुशंकादि न करें
- 28कुल्ला करना तथा मुंह धोना
- 29दातन वा मंजनका प्रयोग
- 30तेल- नियमका विज्ञान
- 31प्रातः स्नानका विज्ञान
- 32तीर्थस्थानका विज्ञान
- 33स्नानादिके बाद व्यायाम
- 34मृगचर्मासनका वैज्ञानिक रहस्य
- 35देवकार्य पूर्वाभिमुख
- 36चन्दन - तिलक- विज्ञान
- 37भस्म तिलक - विज्ञान
- 38मूर्तिपूजा - विज्ञान
- 39मार्जन - विज्ञान
- 40याचमन - विज्ञान
- 41प्राणायाम वा समाधिका विज्ञान
- 42सूर्यको अर्ध्य और उसका उपस्थान
- 43जप- पाठ विज्ञान
- 44मालाकी मणियोंकी १०८ संख्याका विज्ञान
- 45मन्त्रसिद्धिका सूक्ष्म - विज्ञान
- 46वाणीका उपवास वा मानसिक - तप, मौन
- 47घण्टानाद तथा शंखध्वनि - विज्ञान
- 48यज्ञका वैज्ञानिक महत्त्व
- 49देवमन्दिरगमन - विज्ञान
- 50चरणामृतका वैज्ञानिक महत्त्व
- 51श्रीतुलसीपूजन - विज्ञान
- 52श्रीगङ्गाजलकी विशेषताका विज्ञान
- 53वृक्षोंकी चेतनता
- 54पञ्चगव्य - गोमयगोमूत्र
- 55गोमूत्र में गङ्गाका निवास
- 56गोबर में लक्ष्मीका निवास
- 57हस्तपादादि - शुद्धिका विज्ञान
- 58चाहार - शुद्धिका धर्मसे सम्बन्धं
- 59भोजन - विधि विज्ञान
- 60सिर बन्द करके भोजन न करना
- 61भोजन- नियम
- 62घृतपक्व भोजन की शुद्धताका विज्ञान
- 63बाजारू अन्न खानेका निषेध
- 64पंक्ति भोजन समाप्त होनेपर इकट्ठा उठना
- 65भोजनके बादके नियम
- 66उपवास एवं एकादशी व्रत विज्ञान
- 67घृतका दीपक जलानेका विज्ञान
- 68शयनके समय विशेष दिशाका विचार
- 69ब्रह्मचारीका भूमिपर वा तख्त पर सोना
- 70स्पृश्ता - विज्ञान
- 71संवत्सरका आरम्भ ( कल्प एवं सृष्टिसंवत्सर )
- 72मास एवं वारोंका नामक्रम - विज्ञान
- 73मास - नाम - रहस्य
- 74वानप्रस्थ - रहस्य
- 75श्रीरामनवमी ( वेद में अवतारवाद )
- 76श्रीव्यास पूर्णिमा
- 77श्रावणी और रक्षाबन्धन
- 78श्रीकृष्ण - जन्माष्टमीव्रत पूर्णतः वैज्ञानिक
- 79पितृश्राद्धपक्ष ( मृतक श्राद्ध - विज्ञान २-५ )
- 80विजयदशमीका महत्त्व एवं विजयका रहस्य
- 81दीपावलीका वैज्ञानिक- रहस्य
- 82गोपाष्टमी - विज्ञान
- 83श्रीगीतोपदेशकी तिथि और गीताकी महत्ता
- 84युद्धमें गीताका सुनाना सम्भव
- 85भगवद्गीताकी सर्वप्रियताका कारण
- 86गीताके अन्तिम मन्त्रका रहस्य
- 87गीताका गूढ उद्देश्य वा विषय
- 88श्रीगणेश - चतुर्थी
- 89श्रीमहीधरका ' गणानां त्वा ' मन्त्रका भाज
- 90संकटनाशन - गणेशचतुर्थी
- 91गणेश एवं गणनायकके स्वरूपका परिचय
- 92वसन्त पंचमी
- 93शिवरात्रिका मूषक एक सम्प्रदायका स्थापक
- 94होली विज्ञानकी कसौटीपर
- 95' ओम् ' का महत्त्व